अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग पर सुप्रीम कोर्ट दोबारा पारित नहीं करेगा आदेश
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सांविधानिक व राष्ट्रीय महत्व के मसलों की अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कोई न्यायिक आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस संबंध में वर्ष 2018 में दिए गए शीर्ष अदालत के ही आदेश का अनुपालन करने की मांग पर न्यायिक आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।
लेकिन पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि इस मामले में चीफ जस्टिस (सीजेआई) एसए बोबडे द्वारा प्रशासनिक स्तर पर कोई निर्णय लेना ही उचित रहेगा।सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल माधवी दीवान ने पीठ को बताया कि 2018 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
वहीं, अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि सेक्रेटरी जनरल ने लाइव स्ट्रिमिंग के लिए आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में चीफ जस्टिस को प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेना चाहिए।
इसके बाद जस्टिस मिश्रा के अतिरिक्त जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस एमके शाह की मौजूदगी वाली पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक हिस्से को किसी भी तरह आदेश नहीं दिया जा सकता। क्या संसद को यह आदेश दिया जा सकता है कि वह इस या उस कानून को बनाए? पीठ ने कहा, हमें यह मामला सीजेआई द्वारा प्रशासनिक पहलू पर जांच के लिए छोड़ देना चाहिए।
क्या था 2018 का आदेश?
केंद्र सरकार ने जुलाई 2018 में सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि प्रयोग के तौर पर चीफ जस्टिस की अदालत में सांविधानिक मसलों पर होने वाली कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की जा सकती है। इसके आधार पर शीर्ष अदालत ने आदेश जारी करते हुए कहा था कि यह पारदर्शिता ऐसी होगी, जैसे ‘सूर्य की किरणें’ सबसे अच्छा ‘कीटाणुनाशक’ होती हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा था कि एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर केवल सांविधानिक पीठ के सामने पेश कुछ खास श्रेणी के सांविधानिक या राष्ट्रीय महत्व वाले मुकदमों की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग की जा सकती है।