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सुप्रीम कोर्ट तय करेगा, क्या राज्य यूजीसी के अधिकारों को दरकिनार कर ले सकते हैं परीक्षा न कराने का फैसला

Wed, 19 Aug 2020 03:27 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 19 Aug 2020 03:27 AM IST
सार

  • यूजीसी के 30 सितंबर तक हर हाल में परीक्षाएं कराने के निर्देश के खिलाफ अर्जियों पर फैसला सुरक्षित 
  • जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ कर रही है सुनवाई

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Supreme Court Will Decide, Can States Bypass UGCs Rights, To Decide Not To Conduct Exam
supreme court - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह तय करेगा कि क्या कोई राज्य या आपदा प्रबंधन अथॉरिटी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अधिकारों को दरकिनार कर अंतिम वर्ष की परीक्षाएं रद्द करने का फैसला ले सकते हैं।

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यूजीसी के 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं अनिवार्य रूप से कराने संबंधी निर्देश के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा, एक बात जो हमें दिमाग में रखनी है, वह यह है कि छात्रों के कल्याण के बारे में छात्रों को नहीं तय करना है बल्कि वैधानिक निकाय को तय करना है।
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पीठ यह तय करेगी कि क्या आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत किसी राज्य को परीक्षा निरस्त करने का अधिकार है या नहीं? मालूम हो कि महाराष्ट्र, दिल्ली और ओडिशा ने यूजीसी की अधिसूचना को दरकिनार कर अंतिम वर्ष की परीक्षाएं नहीं कराने का फैसला किया है।
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पीठ ने कहा, यहां मामले के दो पहलू हैं। पहला यह कि राज्य कह रहे हैं कि वह परीक्षाएं आयोजित नहीं करा सकते और दूसरा यह कि पिछले प्राप्त अंकों के आधार पर  रिजल्ट घोषित करना है। सवाल यह भी है कि अगर राज्य परीक्षाएं आयोजित न कराने का फैसला लेते हैं तो क्या वह डिग्री जारी कर सकते हैं।

सुनवाई के दौरान यूजीसी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, इस मामले में महाराष्ट्र सरकार का परीक्षा नहीं कराने का फैसला राजनीतिक दांवपेंच है। उन्होंने बताया कि 6 मई को महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित समिति ने खुद परीक्षाएं आयोजित कराने की सिफारिश दी है।


यूजीसी का निर्देश भी विद्यार्थियों के हित में है लेकिन यह राष्ट्रीय आपदा है। राज्य की किसी अथॉरिटी द्वारा यूजीसी के नियमों को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। 

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