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SC: बिना राज्य की सहमति के CBI जांच पर बंगाल सरकार ने उठाए सवाल, सुप्रीम कोर्ट करेगा मामले पर विचार

Wed, 10 Jul 2024 11:28 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 10 Jul 2024 11:28 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल के वाद पर कानून के अनुरूप, गुण-दोष के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार की तरफ से आपत्ति को भी खारिज कर दिया।

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Supreme Court West Bengal CBI Probe Plea Maintainability Sandeshkhali Case Scams news and updates
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सीबीआई द्वारा जांच के मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है। दरअसल, ममता सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में सीबीआई जांच के खिलाफ दायर याचिका में एक वाद दाखिल किया था, जिसमें कहा गया था कि राज्य द्वारा सीबीआई जांच की सामान्य सहमति वापस लिए जाने के बावजूद एजेंसी वहां जांच कर रही है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मामले में विचार करने की बात कही है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल के वाद पर कानून के अनुरूप, गुण-दोष के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार की तरफ से आपत्ति को भी खारिज कर दिया।
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कोर्ट ने सीबीआई को माना केंद्र के अधीन
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम, 1946 के विभिन्न प्रावधानों का हवाला दिया। पीठ ने 74 पन्ने के आदेश में कहा, विशेष पुलिस बल, जिसे डीएसपीई कहा जाता है, के गठन से लेकर, इसके जांच किए जाने वाले अपराधों या अपराधों के वर्गों को निर्दिष्ट करने वाली अधिसूचनाएं जारी करना, इसका अधीक्षण और प्रशासन व केंद्र शासित प्रदेशों से बाहर के क्षेत्रों में डीएसपीई की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र का विस्तार सब केंद्र के अधीन है। 
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 सिर्फ इतना ही नहीं, केवल ऐसे अपराधों की ही डीएसपीई से जांच की जा सकती है, जिन्हें केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित करती है। शीर्ष अदालत ने 8 मई को संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत दायर मुकदमे की सुनवाई योग्यता पर केंद्र की आपत्तियों पर सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में अब अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।

केंद्र के वकील ने सीबीआई को बताया था स्वतंत्र निकाय
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पश्चिम बंगाल सरकार पर शीर्ष अदालत के समक्ष दो अलग-अलग मामलों में एक ही मुद्दे पर मुकदमा चलाने का आरोप लगाया। मेहता ने कहा, राज्य सरकार किसी भी मामले में सीबीआई जांच के लिए सहमति वापस लेने के लिए व्यापक और सर्वव्यापी निर्देश जारी करने के अधिकार का दावा नहीं कर सकती।

राज्य सरकार सिर्फ मामला-दर- मामला आधार पर सहमति देने या अस्वीकार करने की शक्ति का प्रयोग कर सकती है। उन्होंने अदालत से मुकदमे को खारिज करने का अनुरोध किया था। मेहता ने यह भी कहा था कि सीबीआई केंद्र के अधीन नहीं है। यह एक स्वतंत्र निकाय है।
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