SC: 'दहेज उत्पीड़न में पति के दूर के रिश्तेदार न फंसाए जाएं', सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों को किया आगाह
जस्टिस सीटी रविकुमार व जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने आरोपी पति के चचेरे भाई की पत्नी पायल शर्मा के खिलाफ 2020 की एफआईआर और आरोपपत्र को रद्द कर दिया। पायल को पीड़िता के पिता ने एफआईआर में आरोपी नामित किया था। याचिकाकर्ता ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के मामला रद्द करने से इन्कार करने के बाद शीर्ष कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामले में अदालतों को आगाह किया कि वे सुनिश्चित करें कि पत्नी के कहने पर पति के दूर के रिश्तेदारों को भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के तहत बेवजह न फंसाया जाए।
जस्टिस सीटी रविकुमार व जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने आरोपी पति के चचेरे भाई की पत्नी पायल शर्मा के खिलाफ 2020 की एफआईआर और आरोपपत्र को रद्द कर दिया। पायल को पीड़िता के पिता ने एफआईआर में आरोपी नामित किया था। याचिकाकर्ता ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के मामला रद्द करने से इन्कार करने के बाद शीर्ष कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट के दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए शीर्ष कोर्ट ने कहा, हाईकोर्ट यह जांच करने के लिए बाध्य है कि क्या पति के दूर के रिश्तेदारों पर आरोप अतिशयोक्तिपूर्ण और अतिरंजित था? आरोप तय होने से पहले भी आरोपपत्र को निरस्त करने के लिए सीआरपीसी की धारा 482 के तहत याचिका दायर की जा सकती है। सिर्फ इसलिए आवेदन को खारिज करना न्याय हित में नहीं होगा कि आरोप तय होने के समय आरोपी कानूनी व तथ्यात्मक मुद्दों पर बहस कर सकता है।
रिश्तेदार शब्द कानून में परिभाषित नहीं
पीठ ने कहा, रिश्तेदार शब्द कानून में परिभाषित नहीं किया गया है, इसलिए इसे एक अर्थ दिया जाना चाहिए, जैसा कि आम तौर पर समझा जाता है। सामान्य तौर पर, इसमें किसी भी व्यक्ति के पिता, माता, बेटा, बेटी, भाई, बहन, भतीजा, भतीजी, पोता या पोती या किसी व्यक्ति के जीवनसाथी को शामिल किया जा सकता है। एफआईआर व अंतिम रिपोर्ट व सामग्रियों पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद पीठ ने कहा, यह मानने में हिचकिचाहट नहीं है कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे आरोपी पर अपराध साबित होता है।
कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग
कोर्ट ने कहा, ऐसे आरोपों के आधार पर मुकदमे का सामना करना अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के अलावा और कुछ नहीं होगा। प्रीति गुप्ता एवं अन्य बनाम झारखंड राज्य व अन्य (2010) पर भरोसा करते हुए पीठ ने कहा, हमें मानने में हिचकिचाहट नहीं है कि इस कोर्ट की टिप्पणी असल में, वैवाहिक विवादों में कर्तव्य का निर्वहन न करने पर चेतावनी है कि पति के परिवार का करीबी रिश्तेदार न होने वाले व्यक्ति को फंसाना अतिशयोक्ति है या ऐसे व्यक्ति के खिलाफ आरोप अतिशयोक्तिपूर्ण है।
यह था मामला
अमित शर्मा और वंदना शर्मा की शादी 23 फरवरी, 2019 को हुई थी। 7 मार्च, 2019 को अमित कनाडा चला गया और वंदना अपने ससुराल वालों के साथ जालंधर में अपने ससुराल में ही रुक गई। 2 दिसंबर, 2019 को वंदना भी कनाडा चली गई। 22 सितंबर, 2020 को अमित ने अपनी पत्नी वंदना से तलाक लेने के लिए कनाडा के पारिवारिक न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
- 3 दिसंबर, 2020 को वंदना के पिता ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें याचिकाकर्ता और उसके पति सहित सभी आरोपियों के खिलाफ विभिन्न अपराधों के आरोप लगाए गए थे।
संबंधित वीडियो
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.