{"_id":"58a2a5f54f1c1b1235d85635","slug":"supreme-court-verdict-and-jailed-indian-politicians","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट के बड़े फैसले जिन्होंने दिग्गजों की राजनीति पर लगाया ब्रेक ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट के बड़े फैसले जिन्होंने दिग्गजों की राजनीति पर लगाया ब्रेक
नंदलाल शर्मा, अमर उजाला डिजिटल
Updated Tue, 14 Feb 2017 01:49 PM IST
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फाइलः वीके शशिकला
- फोटो : Social Media
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तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की करीबी और अन्नाद्रमुक की नेता और महासचिव वीके शशिकला को सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति मामले में चार साल जेल की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद शशिकला 10 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगी। दो जजों की बेंच ने आपसी सहमति से फैसला देते हुए शशिकला को सरेंडर करने के लिए कहा है। इस तरह तमिलनाडु में चल रहे राजनीतिक उठापटक में कार्यकारी मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम का रास्ता साफ हो गया है।
कोर्ट के इस फैसले के बाद अन्नाद्रमुक की महासचिव शशिकला देश के उन नेताओं की लिस्ट में शामिल हो गई हैं, जिनको भ्रष्टाचार के केस में जेल जाना पड़ा है। हालांकि शशिकला कोई नेता नहीं थी, उन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन जयललिता की मौत के बाद उन्हें पार्टी का महासचिव चुना गया था।
गौरतलब है कि जनप्रतिनिधि अधिनियम के अनुसार, किसी अपराध में दोषी और दो साल के से अधिक के कारावास की सजा पाने वाला कोई भी व्यक्ति दोषसिद्धि से सजा खत्म होने के छह साल बाद तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य रहेगा।
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अन्नाद्रमुक की 'अम्मा' को भी हुई जेल
68 करोड़ रुपए की आय से अधिक की संपत्ति अर्जित करने के 19 साल पुराने मामले में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट यानी पीसीए के तहत विशेष अदालत ने जयललिता, शशिकला, जेएलवअरासी और व्ही. सुधाकरन को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। जयललिता को जेल जाना पड़ा।
जयललिता पर कोई सरकारी पद लेने, छह साल तक चुनाव लड़ने की पाबंदी लग गई थी। नतीजतन उन्हें सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। आरोप था कि वर्ष 1991 से 96 के दौरान जब वह पहली बार तमिलनाडू की मुख्यमंत्री रही थीं तब उन्होंने आय से अधिक की 68 करोड़ रुपए की संपत्ति बनाई थी।
तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री को बाद में कर्नाटक हाईकोर्ट से क्लीन चिट मिल गई थी। शशिकला के साथ इस मामले में जयललिता का भी नाम था, लेकिन 5 दिसंबर को उनका निधन हो गया।
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कोर्ट के इस फैसले के बाद अन्नाद्रमुक की महासचिव शशिकला देश के उन नेताओं की लिस्ट में शामिल हो गई हैं, जिनको भ्रष्टाचार के केस में जेल जाना पड़ा है। हालांकि शशिकला कोई नेता नहीं थी, उन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन जयललिता की मौत के बाद उन्हें पार्टी का महासचिव चुना गया था।
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गौरतलब है कि जनप्रतिनिधि अधिनियम के अनुसार, किसी अपराध में दोषी और दो साल के से अधिक के कारावास की सजा पाने वाला कोई भी व्यक्ति दोषसिद्धि से सजा खत्म होने के छह साल बाद तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य रहेगा।
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अन्नाद्रमुक की 'अम्मा' को भी हुई जेल
68 करोड़ रुपए की आय से अधिक की संपत्ति अर्जित करने के 19 साल पुराने मामले में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट यानी पीसीए के तहत विशेष अदालत ने जयललिता, शशिकला, जेएलवअरासी और व्ही. सुधाकरन को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। जयललिता को जेल जाना पड़ा।
जयललिता पर कोई सरकारी पद लेने, छह साल तक चुनाव लड़ने की पाबंदी लग गई थी। नतीजतन उन्हें सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। आरोप था कि वर्ष 1991 से 96 के दौरान जब वह पहली बार तमिलनाडू की मुख्यमंत्री रही थीं तब उन्होंने आय से अधिक की 68 करोड़ रुपए की संपत्ति बनाई थी।
तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री को बाद में कर्नाटक हाईकोर्ट से क्लीन चिट मिल गई थी। शशिकला के साथ इस मामले में जयललिता का भी नाम था, लेकिन 5 दिसंबर को उनका निधन हो गया।
भारतीय राजनीति की 'दुर्गा' को भी जाना पड़ा जेल
फाइलः इंदिरा गांधी
- फोटो : Social Media
1978 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को जेल जाना पड़ा था। 19 दिसंबर, 1978 को संसद की कार्यवाही से इंदिरा गांधी को निलंबित कर दिया गया था। तत्कालीन मोरारजी देसाई सरकार ने इसके बाद उन्हें संसद के सत्र जारी रहने तक के लिए जेल भेज दिया गया था। उन पर संसदीय विशेषाधिकार के हनन का आरोप था।
इंदिरा संसद भवन में गिरफ्तारी के आदेश मिलने तक टिकी रहीं। आखिरकार रात के आठ बजकर 47 मिनट पर उन्हें स्पीकर के दस्तखत वाला गिरफ्तारी आदेश दिया गया। गिरफ्तारी के बाद वह संसद के उसी दरवाजे से बाहर निकलीं, जहां से वह प्रधानमंत्री की हैसियत से बाहर निकला करती थीं।
इस गिरफ्तारी के बाद तकरीबन हफ्ते भर तक इंदिरा गांधी दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद रही थीं। उन्हें तिहाड़ जेल के वार्ड नंबर 19 में रखा गया था। जेवियर मोरो ने अपनी किताब 'द रेड साड़ी' में लिखा है कि 'इस दौरान सोनिया गांधी खुद खाना लेकर इंदिरा के लिए तिहाड़ जेल जाती थी।'
इंदिरा संसद भवन में गिरफ्तारी के आदेश मिलने तक टिकी रहीं। आखिरकार रात के आठ बजकर 47 मिनट पर उन्हें स्पीकर के दस्तखत वाला गिरफ्तारी आदेश दिया गया। गिरफ्तारी के बाद वह संसद के उसी दरवाजे से बाहर निकलीं, जहां से वह प्रधानमंत्री की हैसियत से बाहर निकला करती थीं।
इस गिरफ्तारी के बाद तकरीबन हफ्ते भर तक इंदिरा गांधी दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद रही थीं। उन्हें तिहाड़ जेल के वार्ड नंबर 19 में रखा गया था। जेवियर मोरो ने अपनी किताब 'द रेड साड़ी' में लिखा है कि 'इस दौरान सोनिया गांधी खुद खाना लेकर इंदिरा के लिए तिहाड़ जेल जाती थी।'
चारा घोटाला में लालू को जेल
फाइलः लालू यादव
- फोटो : social media
1997 में सीबीआई ने चारा घोटाला मामले में आरोप-पत्र दाखिल किया तो लालू यादव को मुख्यमन्त्री पद से हटना पड़ा। अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सत्ता सौंपकर लालू राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष बन गये और अपरोक्ष रूप से सत्ता की कमान अपने हाथ में रखी। चारा घोटाला मामले में लालू यादव को जेल भी जाना पड़ा और वे कई महीने तक जेल में रहे भी।
लगभग सत्रह साल तक चले इस ऐतिहासिक मुकदमे में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज प्रवास कुमार सिंह ने लालू प्रसाद यादव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये 3 अक्टूबर 2013 को पाँच साल की कैद व पच्चीस लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
यादव और जदयू नेता जगदीश शर्मा को घोटाला मामले में दोषी करार दिये जाने के बाद लोकसभा से अयोग्य ठहराया गया। इसके कारण राँची जेल में सजा भुगत रहे लालू प्रसाद यादव को लोक सभा की सदस्यता भी गंवानी पड़ी। चुनाव आयोग के नये नियमों के अनुसार लालू प्रसाद अब 11 साल (5 साल जेल और रिहाई के बाद के 6 साल) तक लोकसभा चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाला में दोषी सांसदों को संसद की सदस्यता से अयोग्य ठहराये जाने से बचाने वाले प्रावधान को भी निरस्त कर दिया था। लोकसभा के महासचिव एस बालशेखर ने यादव और शर्मा को सदन की सदस्यता के अयोग्य ठहराये जाने की अधिसूचना जारी कर दी।
लोकसभा द्वारा जारी इस अधिसूचना के बाद संसद की सदस्यता गंवाने वाले लालू प्रसाद यादव भारतीय इतिहास में लोकसभा के पहले सांसद बने, जबकि जनता दल यूनाइटेड के एक अन्य नेता जगदीश शर्मा दूसरे, जिन्हें 10 साल के लिये अयोग्य ठहराया गया।
लगभग सत्रह साल तक चले इस ऐतिहासिक मुकदमे में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज प्रवास कुमार सिंह ने लालू प्रसाद यादव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये 3 अक्टूबर 2013 को पाँच साल की कैद व पच्चीस लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
यादव और जदयू नेता जगदीश शर्मा को घोटाला मामले में दोषी करार दिये जाने के बाद लोकसभा से अयोग्य ठहराया गया। इसके कारण राँची जेल में सजा भुगत रहे लालू प्रसाद यादव को लोक सभा की सदस्यता भी गंवानी पड़ी। चुनाव आयोग के नये नियमों के अनुसार लालू प्रसाद अब 11 साल (5 साल जेल और रिहाई के बाद के 6 साल) तक लोकसभा चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाला में दोषी सांसदों को संसद की सदस्यता से अयोग्य ठहराये जाने से बचाने वाले प्रावधान को भी निरस्त कर दिया था। लोकसभा के महासचिव एस बालशेखर ने यादव और शर्मा को सदन की सदस्यता के अयोग्य ठहराये जाने की अधिसूचना जारी कर दी।
लोकसभा द्वारा जारी इस अधिसूचना के बाद संसद की सदस्यता गंवाने वाले लालू प्रसाद यादव भारतीय इतिहास में लोकसभा के पहले सांसद बने, जबकि जनता दल यूनाइटेड के एक अन्य नेता जगदीश शर्मा दूसरे, जिन्हें 10 साल के लिये अयोग्य ठहराया गया।
ओमप्रकाश चौटालाः पहले मुख्यमंत्री जिनको हुई जेल
फाइलः ओमप्रकाश चौटाला
- फोटो : Social Media
घड़ियों की स्मगलिंग के लिए घर से निकाले जाने वाले ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को दिल्ली की एक अदालत ने शिक्षक भर्ती घोटाले में 10 साल की सजा सुनाई। जेल की सजा काट रहे चौटाला जोड़ी पर हरियाणा सिविल सेवा में भी फर्जी भर्ती कराने पर मामला दर्ज है।
जाटों के बड़े नेता देवीलाल के बेटे ओमप्रकाश चौटाला देश के ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं जिनको किसी आरोप में दोषी पाया गया है। 2 दिसंबर 1989 को देवीलाल का पुत्र प्रेम तब जागा जब उन्हें केंद्र में उप प्रधानमंत्री का पद मिला और तब उन्होंने अपने बेटे ओम प्रकाश चौटाला को हरियाणा के मुख्यमंत्री का पद दिया।
जूनियर बेसिक ट्रेंड शिक्षक भर्ती घोटाले में भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों में पिछले सप्ताह चौटाला पिता पुत्र और दो आईएएस अधिकारी सहित 55 लोगों को दोषी ठहराने वाले विशेष सीबीआई न्यायाधीश विनोद कुमार ने दोषियों को अलग अलग अवधि की जेल की सजा सुनाई।
जाटों के बड़े नेता देवीलाल के बेटे ओमप्रकाश चौटाला देश के ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं जिनको किसी आरोप में दोषी पाया गया है। 2 दिसंबर 1989 को देवीलाल का पुत्र प्रेम तब जागा जब उन्हें केंद्र में उप प्रधानमंत्री का पद मिला और तब उन्होंने अपने बेटे ओम प्रकाश चौटाला को हरियाणा के मुख्यमंत्री का पद दिया।
जूनियर बेसिक ट्रेंड शिक्षक भर्ती घोटाले में भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों में पिछले सप्ताह चौटाला पिता पुत्र और दो आईएएस अधिकारी सहित 55 लोगों को दोषी ठहराने वाले विशेष सीबीआई न्यायाधीश विनोद कुमार ने दोषियों को अलग अलग अवधि की जेल की सजा सुनाई।
इन नेताओं को भी काटनी पड़ी जेल की सजा
अमित शाह
- फोटो : फाइल फोटो
अमित शाह
मौजूदा बीजेपी अध्यक्ष और बतौर विधायक लगातार पांच चुनाव जीतने वाले अमित शाह कई मामलों में आरोपी रहे हैं। इनमें चोरी, अपहरण और हत्या जैसे मामले भी शामिल हैं। सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर केस में उनकी गिरफ्तारी भी हुई और तीन महीने जेल में रहना पड़ा। हालांकि तीन महीने के बाद ही बेल मिल गई।
कनिमोझी
डीएमके प्रमुख करुणानिधि की बेटी और राज्यसभा सांसद कनिमोझी टूजी स्पेक्ट्रम मामले की प्रमुख आरोपियों में से एक हैं। इस मामले में कलिगनर टीवी को फायदा पहुंचाने का उन पर आरोप है। सीबीआई ने कनिमोझी को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया था। उन पर 200 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप है। 6 महीने जेल के बाद उन्हें जमानत मिल गई। इस मामले में दोषी पाए जाने पर उन्हें कभी भी सजा हो सकती है।
ए. राजा
डीएमके नेता एंडीमुत्थु राजा टूजी घोटाले में मुख्य आरोपी हैं। एक लाख छिहत्तर हजार करोड़ के इस बड़े घोटाले में उन पर टूजी स्पेक्ट्रम के बंटवारे में भेदभाव करने का आरोप है। 15 महीने जेल की सजा काट चुके राजा अभी जमानत पर बाहर हैं।
बीएस येदुरप्पा
बीएस येदुरप्पा दक्षिण भारत में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री रहे हैं और बेंगलुरु जमीन घोटाले और खनन सहित अन्य मामलों में मुख्य अभियुक्त हैं। आरोप है कि उन्होंने बेंगलुरु में अपने बेटे को जमीन आवंटित की। लोकायुक्त की रिपोर्ट के मुताबिक अवैध खनन के चलते कर्नाटक को 1827 करोड़ का नुकसान हुआ है। लोकायुक्त की शिकायत पर जेल काटने वाले येदुरप्पा अभी जमानत पर हैं।
अमर सिंह
समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह पर तीन बीजेपी सांसदों को घुस देने का आरोप है। नोट के बदले वोट कांड में 13 दिन की सजा काट चुके अमर सिंह को बाद में जमानत मिल गई।
मौजूदा बीजेपी अध्यक्ष और बतौर विधायक लगातार पांच चुनाव जीतने वाले अमित शाह कई मामलों में आरोपी रहे हैं। इनमें चोरी, अपहरण और हत्या जैसे मामले भी शामिल हैं। सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर केस में उनकी गिरफ्तारी भी हुई और तीन महीने जेल में रहना पड़ा। हालांकि तीन महीने के बाद ही बेल मिल गई।
कनिमोझी
डीएमके प्रमुख करुणानिधि की बेटी और राज्यसभा सांसद कनिमोझी टूजी स्पेक्ट्रम मामले की प्रमुख आरोपियों में से एक हैं। इस मामले में कलिगनर टीवी को फायदा पहुंचाने का उन पर आरोप है। सीबीआई ने कनिमोझी को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया था। उन पर 200 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप है। 6 महीने जेल के बाद उन्हें जमानत मिल गई। इस मामले में दोषी पाए जाने पर उन्हें कभी भी सजा हो सकती है।
ए. राजा
डीएमके नेता एंडीमुत्थु राजा टूजी घोटाले में मुख्य आरोपी हैं। एक लाख छिहत्तर हजार करोड़ के इस बड़े घोटाले में उन पर टूजी स्पेक्ट्रम के बंटवारे में भेदभाव करने का आरोप है। 15 महीने जेल की सजा काट चुके राजा अभी जमानत पर बाहर हैं।
बीएस येदुरप्पा
बीएस येदुरप्पा दक्षिण भारत में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री रहे हैं और बेंगलुरु जमीन घोटाले और खनन सहित अन्य मामलों में मुख्य अभियुक्त हैं। आरोप है कि उन्होंने बेंगलुरु में अपने बेटे को जमीन आवंटित की। लोकायुक्त की रिपोर्ट के मुताबिक अवैध खनन के चलते कर्नाटक को 1827 करोड़ का नुकसान हुआ है। लोकायुक्त की शिकायत पर जेल काटने वाले येदुरप्पा अभी जमानत पर हैं।
अमर सिंह
समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह पर तीन बीजेपी सांसदों को घुस देने का आरोप है। नोट के बदले वोट कांड में 13 दिन की सजा काट चुके अमर सिंह को बाद में जमानत मिल गई।
किसी ने भर्ती में पैसा बनाया, तो किसी ने टेलीकॉम को भुनाया
शिबू सोरेन
- फोटो : फाइल
रशीद मसूद
कांग्रेस के राज्य सभा सांसद रशीद मसूद मेडिकल भर्ती घोटाले के आरोपी रहे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए अयोग्य छात्रों को मेडिकल सीटें आवंटित की। 2013 में उन्हें 4 साल की जेल हुई। वे पहले ऐसे सांसद हैं जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने संसद से बाहर का रास्ता दिखाया।
कांग्रेस नेता सुखराम
पूर्व टेलीकॉम मंत्री सुखराम पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं। सीबीआई ने 1996 में उनके घर से 3.6 करोड़ रुपए बरामद किए थे। उन पर टेलीकम्युनिशकेशन क्षेत्र में अनियमितता बरतने के आरोप हैं। कई मामलों में कोर्ट उन्हें जेल भेज चुकी है। कोर्ट ने 2002 में तीन साल की और 2011 में 5 साल की सजा सुनाई।
बंगारू लक्ष्मण
पूर्व कैबिनेट मंत्री बंगारू लक्ष्मण पर आर्म्स डील कांड में घुस लेने का आरोप लगा। उन पर आरोप था कि सेना को रक्षा उपकरण उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने एक विदेशी कंपनी से पैसा लिया था। मामले की जांच में कोर्ट ने उन्हें दोषी पाया और 2012 में उन्हें चार साल की सजा सुनाई। 2014 में बेल मिलने के कुछ ही दिन बाद उनकी मौत हो गई।
शिबू सोरेन
झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष शिबू सोरेन 2004 में मनमोहन सिंह की सरकार में कोयला मंत्री बने, लेकिन चिरूडीह कांड में गिरफ्तारी का वारंट जारी होने के बाद उन्हें केन्द्रीय मंत्रिमंडल से 24 जुलाई 2004 को इस्तीफा देना पड़ा। चिरूडीह कांड में 11 लोगों की हत्या हुई थी। वर्तमान में शिबू सोरेन झारखंड के दुमका लोकसभा सीट से छठी बार सांसद चुने गये हैं।
सुरेश कलमाड़ी
70 हजार करोड़ के राष्ट्रमंडल खेल घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक सुरेश कलमाड़ी को सीबीआई ने पहले ट्रायल पर रखा और फिर जेल भेजा। साथ ही उन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। उन पर कई और मामले भी चल रहे हैं। 10 महीने जेल में रहने के बाद कलमाड़ी को जमानत मिल गई। दोषी पाए जाने पर उन्हें कभी भी सजा हो सकती है। कलमाड़ी पुणे से कांग्रेस सांसद रहे हैं।
कांग्रेस के राज्य सभा सांसद रशीद मसूद मेडिकल भर्ती घोटाले के आरोपी रहे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने लाभ के लिए अयोग्य छात्रों को मेडिकल सीटें आवंटित की। 2013 में उन्हें 4 साल की जेल हुई। वे पहले ऐसे सांसद हैं जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने संसद से बाहर का रास्ता दिखाया।
कांग्रेस नेता सुखराम
पूर्व टेलीकॉम मंत्री सुखराम पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं। सीबीआई ने 1996 में उनके घर से 3.6 करोड़ रुपए बरामद किए थे। उन पर टेलीकम्युनिशकेशन क्षेत्र में अनियमितता बरतने के आरोप हैं। कई मामलों में कोर्ट उन्हें जेल भेज चुकी है। कोर्ट ने 2002 में तीन साल की और 2011 में 5 साल की सजा सुनाई।
बंगारू लक्ष्मण
पूर्व कैबिनेट मंत्री बंगारू लक्ष्मण पर आर्म्स डील कांड में घुस लेने का आरोप लगा। उन पर आरोप था कि सेना को रक्षा उपकरण उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने एक विदेशी कंपनी से पैसा लिया था। मामले की जांच में कोर्ट ने उन्हें दोषी पाया और 2012 में उन्हें चार साल की सजा सुनाई। 2014 में बेल मिलने के कुछ ही दिन बाद उनकी मौत हो गई।
शिबू सोरेन
झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष शिबू सोरेन 2004 में मनमोहन सिंह की सरकार में कोयला मंत्री बने, लेकिन चिरूडीह कांड में गिरफ्तारी का वारंट जारी होने के बाद उन्हें केन्द्रीय मंत्रिमंडल से 24 जुलाई 2004 को इस्तीफा देना पड़ा। चिरूडीह कांड में 11 लोगों की हत्या हुई थी। वर्तमान में शिबू सोरेन झारखंड के दुमका लोकसभा सीट से छठी बार सांसद चुने गये हैं।
सुरेश कलमाड़ी
70 हजार करोड़ के राष्ट्रमंडल खेल घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक सुरेश कलमाड़ी को सीबीआई ने पहले ट्रायल पर रखा और फिर जेल भेजा। साथ ही उन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। उन पर कई और मामले भी चल रहे हैं। 10 महीने जेल में रहने के बाद कलमाड़ी को जमानत मिल गई। दोषी पाए जाने पर उन्हें कभी भी सजा हो सकती है। कलमाड़ी पुणे से कांग्रेस सांसद रहे हैं।