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Supreme Court: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने रखा बरकरार, हरियाणा की याचिका खारिज
Wed, 14 Feb 2024 06:21 AM IST
यशोधन शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Wed, 14 Feb 2024 06:21 AM IST
सार
सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय पीठ ने 13 न्यायिक अधिकारियों को पदोन्नत करने के हाईकोर्ट के निर्देश को चुनौती देने वाली असफल उम्मीदवारों और हरियाणा सरकार की विशेष अनुमति याचिकाओं को खारिज कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्धारित उस मानदंड को बरकरार रखा जिसमें जिला न्यायाधीशों के पद पर पदोन्नति चाहने वाले न्यायिक अफसरों को साक्षात्कार में न्यूनतम 50 फीसदी अंक प्राप्त करने की शर्त है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय पीठ ने 13 न्यायिक अधिकारियों को पदोन्नत करने के हाईकोर्ट के निर्देश को चुनौती देने वाली असफल उम्मीदवारों और हरियाणा सरकार की विशेष अनुमति याचिकाओं को खारिज कर दिया।
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मामला हरियाणा सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस रूल्स, 2007 के नियम 8 में उल्लिखित पदोन्नति प्रक्रिया के तहत योग्यता-सह-वरिष्ठता के माध्यम से चयन के लिए 65 फीसदी कोटा से संबंधित था। हाईकोर्ट की कार्रवाई को मुख्य रूप से इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि नियम मौखिक परीक्षा के लिए न्यूनतम कट-ऑफ मानदंड निर्धारित नहीं करते हैं।
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हरियाणा राज्य ने इस आधार पर निर्देश पर आपत्ति जताई कि हाइकोर्ट ने मानदंड तैयार करने से पहले अनुच्छेद 233 के अनुसार राज्य सरकार से परामर्श नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि नियम मौखिक परीक्षा के लिए न्यूनतम कट-ऑफ के पहलू पर मौन हैं, इसलिए हाईकोर्ट के पूर्ण न्यायालय के प्रस्ताव के माध्यम से ऐसी शर्त निर्धारित करना उचित था। याचिकाकर्ताओं ने साक्षात्कार की आवश्यकता पर भी सवाल उठाया था। लेकिन इस तर्क को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साक्षात्कार के महत्व पर जोर दिया।
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