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Supreme Court Updates: सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार अंसारी की मौत को लेकर दायर याचिका सुनने से किया इनकार
Wed, 30 Apr 2025 03:46 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 30 Apr 2025 03:46 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : PTI
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मृत माफिया मुख्तार अंसारी की मौत को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। यह याचिका मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी की ओर से दायर की गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि चूंकि याचिका मूल रूप से मुख्तार अंसारी के जीवित रहते दायर की गई थी, इसलिए उनकी मृत्यु के बाद कार्यवाही जारी रखने का कोई आधार नहीं है। अदालत ने उमर अंसारी को सलाह दी कि वह आगे कोई कानूनी कार्रवाई करने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाए। इससे पहले अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को मेडिकल और न्यायिक रिकॉर्ड जमा करने का निर्देश दिया था, जो बाद में उमर को मुहैया कराए गए।
पहलगाम आतंकी हमले की जांच की अपील, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर
सुप्रीम कोर्ट कल यानी 1 मई को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करेगा। मामला 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन का निर्देश देने की अपील की है। याचिका में केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की सरकार को कश्मीर में अन्य पर्यटकों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय करने के निर्देश देने की अपील भी की गई है। याचिका कश्मीर निवासी मोहम्मद जुनैद, फतेह कुमार साहू और विक्की कुमार ने दायर की है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ में होगी।
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पहलगाम आतंकी हमले की जांच की अपील, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर
सुप्रीम कोर्ट कल यानी 1 मई को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करेगा। मामला 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन का निर्देश देने की अपील की है। याचिका में केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की सरकार को कश्मीर में अन्य पर्यटकों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय करने के निर्देश देने की अपील भी की गई है। याचिका कश्मीर निवासी मोहम्मद जुनैद, फतेह कुमार साहू और विक्की कुमार ने दायर की है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ में होगी।
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आम्रपाली समूह का मामला: अब जुलाई में सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आम्रपाली समूह के मामलों में आगे की सुनवाई जुलाई महीने में होगी। घर खरीदारों की याचिकाओं सहित अन्य याचिकाओं को नए चीफ जस्टिस बीआर गवई का कार्यकाल शुरू होने के बाद सूचीबद्ध किया जाएगा। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने बुधवार को कहा कि उसने मामले का निपटारा करने की कोशिश की, क्योंकि यह अनिश्चितकाल तक नहीं चल सकता। हालांकि, जस्टिस त्रिवेदी सुप्रीम कोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान 9 जून को ही सेवानिवृत्त हो जाएंगी। ऐसे में मामले की सुनवाई के लिए नई पीठ का गठन होगा। न्यायमूर्ति त्रिवेदी ने कहा कि वह पदभार ग्रहण करने के बाद से ही इस मामले की सुनवाई कर रही हैं। उन्होंने निपटारे का भरसक प्रयास किया लेकिन अभी भी कुछ मुद्दों पर सुनवाई बाकी है। प्रभावी निपटान के लिए पक्षों को आगे आना होगा। न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा का कार्यकाल अभी लंबा है, ऐसे में वे शीर्ष अदालत में हैं इस मुकदमे से जुड़े बाकी मुद्दों का ध्यान रखेंगे। बता दें कि यह मुकदमा साल 2017 से ही अदालत में लंबित है। मुकदमे में घर खरीदारों की ओर से पेश हुए वकील एम एल लाहोटी ने कहा, आम्रपाली समूह के तत्कालीन प्रबंधन के अधिकारियों और प्रमोटरों से पैसे की वसूली कुछ मुद्दे हैं, जिसका उल्लेख मामले में 2019 के मुख्य फैसले में किया गया था। इस पर अंतिम निर्णय जरूरी है। फैसले में उल्लिखित मुद्दों को अंतिम रूप से तय किए बिना नहीं छोड़ा जा सकता।
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि अदालत को प्रभावी सहायता के लिए मामले में एक एमिकस क्यूरी नियुक्त करना चाहिए। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने घर खरीदारों की ओर से पेश लाहोटी और अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, को 2019 में कोर्ट रिसीवर नियुक्त किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आम्रपाली समूह के मामलों में आगे की सुनवाई जुलाई महीने में होगी। घर खरीदारों की याचिकाओं सहित अन्य याचिकाओं को नए चीफ जस्टिस बीआर गवई का कार्यकाल शुरू होने के बाद सूचीबद्ध किया जाएगा। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने बुधवार को कहा कि उसने मामले का निपटारा करने की कोशिश की, क्योंकि यह अनिश्चितकाल तक नहीं चल सकता। हालांकि, जस्टिस त्रिवेदी सुप्रीम कोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान 9 जून को ही सेवानिवृत्त हो जाएंगी। ऐसे में मामले की सुनवाई के लिए नई पीठ का गठन होगा। न्यायमूर्ति त्रिवेदी ने कहा कि वह पदभार ग्रहण करने के बाद से ही इस मामले की सुनवाई कर रही हैं। उन्होंने निपटारे का भरसक प्रयास किया लेकिन अभी भी कुछ मुद्दों पर सुनवाई बाकी है। प्रभावी निपटान के लिए पक्षों को आगे आना होगा। न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा का कार्यकाल अभी लंबा है, ऐसे में वे शीर्ष अदालत में हैं इस मुकदमे से जुड़े बाकी मुद्दों का ध्यान रखेंगे। बता दें कि यह मुकदमा साल 2017 से ही अदालत में लंबित है। मुकदमे में घर खरीदारों की ओर से पेश हुए वकील एम एल लाहोटी ने कहा, आम्रपाली समूह के तत्कालीन प्रबंधन के अधिकारियों और प्रमोटरों से पैसे की वसूली कुछ मुद्दे हैं, जिसका उल्लेख मामले में 2019 के मुख्य फैसले में किया गया था। इस पर अंतिम निर्णय जरूरी है। फैसले में उल्लिखित मुद्दों को अंतिम रूप से तय किए बिना नहीं छोड़ा जा सकता।
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि अदालत को प्रभावी सहायता के लिए मामले में एक एमिकस क्यूरी नियुक्त करना चाहिए। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने घर खरीदारों की ओर से पेश लाहोटी और अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, को 2019 में कोर्ट रिसीवर नियुक्त किया गया था।
नितिन गडकरी के 2019 के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज; सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रखा बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नागपुर से 2019 के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिकाओं में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने कांग्रेस उम्मीदवार नाना फल्गुनराव पटोले और नागपुर निर्वाचन क्षेत्र के एक मतदाता नफीस खान की याचिका को खारिज कर दिया। इन्होंने हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के 26 फरवरी, 2021 के आदेश को चुनौती दी थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि गडकरी 2024 के आम चुनावों में फिर से सीट जीतें और हाईकोर्ट का रुख सही है। पीठ ने कहा, हमें हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता। हाईकोर्ट ने आदेश में चुनाव याचिकाओं को खारिज करने से इन्कार कर दिया, लेकिन परिवार के सदस्यों की आय और उनके स्वामित्व वाली भूमि के संबंध में उनमें किए गए कुछ कथनों को खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नागपुर से 2019 के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिकाओं में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने कांग्रेस उम्मीदवार नाना फल्गुनराव पटोले और नागपुर निर्वाचन क्षेत्र के एक मतदाता नफीस खान की याचिका को खारिज कर दिया। इन्होंने हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के 26 फरवरी, 2021 के आदेश को चुनौती दी थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि गडकरी 2024 के आम चुनावों में फिर से सीट जीतें और हाईकोर्ट का रुख सही है। पीठ ने कहा, हमें हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता। हाईकोर्ट ने आदेश में चुनाव याचिकाओं को खारिज करने से इन्कार कर दिया, लेकिन परिवार के सदस्यों की आय और उनके स्वामित्व वाली भूमि के संबंध में उनमें किए गए कुछ कथनों को खारिज कर दिया।
देश के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना ने बुधवार को कहा कि ऐसी दुनिया में जहां ध्यान लंबे समय तक नहीं टिक पाता, सबसे शक्तिशाली संदेश सबसे लंबा नहीं बल्कि सबसे सटीक होना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि कानूनी सहायता के प्रति जागरूकता न तो उपदेशों के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है और न ही यह भारी भरकम शब्दों वाली होनी चाहिए। सीजेआई खन्ना राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। समारोह में अखिल भारतीय रील-मेकिंग और लघु फिल्म प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विधि छात्रों को सम्मानित भी किया गया। उन्होंने कहा कि कोई भी योजना तभी सफल होती है, जब उसका जमीनी स्तर पर बेहतर असर दिखता है। बकौल सीजेआई, कोई भी योजना बनाते समय उन लोगों की बात सुननी चाहिए, जिन्हें योजनाओं की जरूरत है। भारत में दुनिया की सबसे बड़ी कानूनी सहायता प्रणाली होने का उल्लेख करते हुए सीजेआई खन्ना ने कहा, लगभग 80 प्रतिशत भारतीय निशुल्क कानूनी सहायता के लिए पात्र हैं। लक्षित लाभार्थियों के अलावा, हमें उन लोगों से भी जुड़ना चाहिए जो जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं।
सोशल मीडिया रील के खतरों पर भी बोले CJI खन्ना
सीजेआई खन्ना ने कहा, भारत के कानूनी सहायता मॉडल को और अधिक विशिष्ट बनाने वाली बात यह है कि यह केवल आरोपियों की मदद करने पर ही ध्यान केंद्रित नहीं करता है, बल्कि पीड़ित और गवाहों की भी उतनी ही तत्परता से सहायता प्रदान करता है। नीतियां और योजनाएं अलग-अलग काम नहीं करती हैं। देश में कई योजनाएं और नीतियां हैं, लेकिन हम उन्हें कैसे लागू करते हैं और उनसे लाभार्थियों को कितना प्रभावी फायदा होता है, ये बात भी महत्वपूर्ण है। एकाग्रता घटना का जिक्र करते हुए सीजेआई ने कहा, 30 सेकंड या उससे कम समय में सोशल मीडिया के रील लोगों की राय बदलने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। आभासी तरीके से मिलने से इतर हमें दर्शकों से वहीं मिलना चाहिए जहां वे हैं। कानूनी सहायता के लिए तैयार जागरूकता सामग्री उपदेश या शब्दजाल से भरे नहीं होने चाहिए। ऐसी दुनिया में जहां एकाग्रता घट रही है, ध्यान देर तक नहीं टिकता, सबसे शक्तिशाली संदेश लंबा नहीं सबसे सटीक होना चाहिए।
सोशल मीडिया रील के खतरों पर भी बोले CJI खन्ना
सीजेआई खन्ना ने कहा, भारत के कानूनी सहायता मॉडल को और अधिक विशिष्ट बनाने वाली बात यह है कि यह केवल आरोपियों की मदद करने पर ही ध्यान केंद्रित नहीं करता है, बल्कि पीड़ित और गवाहों की भी उतनी ही तत्परता से सहायता प्रदान करता है। नीतियां और योजनाएं अलग-अलग काम नहीं करती हैं। देश में कई योजनाएं और नीतियां हैं, लेकिन हम उन्हें कैसे लागू करते हैं और उनसे लाभार्थियों को कितना प्रभावी फायदा होता है, ये बात भी महत्वपूर्ण है। एकाग्रता घटना का जिक्र करते हुए सीजेआई ने कहा, 30 सेकंड या उससे कम समय में सोशल मीडिया के रील लोगों की राय बदलने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। आभासी तरीके से मिलने से इतर हमें दर्शकों से वहीं मिलना चाहिए जहां वे हैं। कानूनी सहायता के लिए तैयार जागरूकता सामग्री उपदेश या शब्दजाल से भरे नहीं होने चाहिए। ऐसी दुनिया में जहां एकाग्रता घट रही है, ध्यान देर तक नहीं टिकता, सबसे शक्तिशाली संदेश लंबा नहीं सबसे सटीक होना चाहिए।