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सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स: सुकेश चंद्रशेखर को शीर्ष अदालत से झटका, सजा पर रोक लगाने की याचिका सुनने से इनकार

Mon, 02 Nov 2026 02:44 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 02 Nov 2026 02:44 PM IST
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Supreme Court Updates Sukesh Chandrasekhar And Others Pleas in Hindi
सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स - फोटो : अमर उजाला

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। दिल्ली की एक अदालत ने सुप्रीम कोर्ट का जज बनकर फोन करने और एक विशेष न्यायाधीश को प्रभावित करने की कोशिश के मामले में उसे आठ साल जेल की सजा सुनाई थी।

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न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ के सामने सुकेश की याचिका सुनवाई के लिए आई थी। पीठ ने इसे सुनने से इनकार कर दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी याचिका की थी खारिज
दिल्ली की अदालत ने 20 अगस्त को सुकेश चंद्रशेखर को दोषी ठहराया था। इसके बाद 29 अगस्त को उसे आठ साल कैद की सजा सुनाई गई। सुकेश ने निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की थी। साथ ही उसने अपील पर फैसला आने तक अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग भी की थी।

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16 अक्तूबर को हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि दोषसिद्धि के फैसले के खिलाफ अपील पहले से लंबित है। ऐसे में निचली अदालत की टिप्पणियों और निष्कर्षों को अपीलीय अदालत में चुनौती दी जा सकती है। हाईकोर्ट ने सुकेश को अपील के दौरान अपनी सभी दलीलें रखने की छूट दी थी।

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तीन अपराधों में सुनाई गई थी आठ साल की सजा
दिल्ली की अदालत ने इस मामले को न्यायिक व्यवस्था के प्रति गंभीर अपराध बताते हुए इसे 'संस्थागत अपवित्रता' करार दिया था। सुकेश को सरकारी कर्मचारी का रूप धारण करने और सरकारी कर्मचारी को डराने के अपराध में दो-दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। वहीं, गुमनाम तरीके से संदेश भेजकर आपराधिक धमकी देने के मामले में चार साल की सजा दी गई थी। अदालत ने तीनों सजाओं को एक के बाद एक चलाने का आदेश दिया था। इस वजह से कुल सजा आठ साल हुई।

कैसे रची गई थी जज बनकर फोन करने की साजिश?
यह मामला 28 अप्रैल 2017 का है। उस समय सुकेश चंद्रशेखर एक भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस हिरासत में था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, उसने एक पुलिस कांस्टेबल का मोबाइल फोन हासिल कर लिया था। इसके बाद उसने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली तत्कालीन विशेष न्यायाधीश पूनम चौधरी के आधिकारिक फोन नंबर पर संपर्क किया।

ट्रायल कोर्ट के मुताबिक, सुकेश ने पहले खुद को सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश का निजी सचिव बताया और बाद में उसी न्यायाधीश के रूप में अपनी पहचान बताई। अदालत ने माना था कि उसने न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के इरादे से जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश का रूप धारण किया था।

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नौकरी के बदले पैसे लेने के मामले में DMK नेता नेहरू को सुप्रीम कोर्ट से झटका
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और डीएमके नेता केएन नेहरू की याचिका खारिज कर दी। नेहरू ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ 634 करोड़ रुपये के कथित नौकरी के बदले पैसे लेने के मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई आधार नहीं है।

यह मामला 2021 से 2026 के बीच का है। उस समय नेहरू तमिलनाडु सरकार में नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग के मंत्री थे। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से मिली जानकारी के आधार पर हाईकोर्ट ने सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) को मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया था।

नेहरू ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दाखिल की थी, लेकिन 26 अक्टूबर को इसे खारिज कर दिया गया। अदालत ने साफ किया था कि एफआईआर दर्ज करने और जांच का आदेश देने का मतलब किसी को दोषी ठहराना नहीं है। जांच के बाद ही आरोपों की सच्चाई सामने आएगी।
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