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Supreme Court: अब हर शनिवार को खुली सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री; एमटेक समूह की पूर्व अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज

Mon, 16 Jun 2025 07:34 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 16 Jun 2025 07:34 PM IST
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supreme court updates SC registry offices to remain open on Saturdays
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यह फैसला लिया कि उसकी रजिस्ट्री और दफ्तर अब 14 जुलाई से हर शनिवार को खुले रहेंगे। अब तक की परंपरा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की पीठें शनिवार को सुनवाई नहीं करती हैं। 16 जून को जारी एक नोटिस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, शीर्ष कोर्ट की रजिस्ट्री और दफ्तर 14 जुलाई 2025 से हर शनिवार सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक खुले रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 145 के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए लिया है और सुप्रीम कोर्ट नियम, 2013 में संशोधन किया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने एमटेक समूह के पूर्व चेयरमैन को अंतरिम जमानत देने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एमटेक ग्रुप के पूर्व चेयरमैन अरविंद धाम को 2,700 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन के मामले में अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने कहा कि सात अप्रैल को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच पहले ही धाम की जमानत याचिका खारिज कर चुकी है और उन्हें जेल में समर्पण करने का निर्देश दिया गया था।

धाम की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि उनके मुवक्किल पिछले 11 महीनों से जेल में हैं और उनकी नियमित जमानत याचिका फरवरी 2025 से दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है। बेंच ने कहा, याचिकाकर्ता की इन रणनीतियों से हमें कोई असर नहीं पड़ा। आपकी विशेष अनुमति याचिका पहले ही तीन जजों की बेंच खारिज कर चुकी है। अब आप गर्मी की छुट्टियों में वही राहत फिर से मांग रहे हैं, जो पहले ठुकराई जा चुकी है। इसके बाद मुकुल रोहतगी ने याचिका वापस ले ली। बेंच ने गर्मियों की छुट्टियों में वरिष्ठ वकील को कोर्ट में देखकर नाराजगी भी जाहिर की।

बेंच ने कहा, हमें समझ नहीं आता कि छुट्टियों में वरिष्ठ वकील क्यों पेश होते हैं। सुप्रीम कोर्ट पहले भी इस पर टिप्पणी कर चुका है। पहले भी कई बेंच ने वरिष्ठ वकीलों से अनुरोध किया है कि वे छुट्टियों के दौरान पेश न हों और अपने जूनियर साथियों को कोर्ट की प्रक्रिया सीखने का मौका दें। 7 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद धाम को अगली सुबह जेल में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। धाम की ओर से यह दलील दी गई थी कि उन्हें दिल की बीमारी है और एंजियोग्राफी के लिए कुछ और समय की जरूरत है या अंतरिम जमानत दी जाए।
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महिला वायुसेना अधिकारी को सेवामुक्त करने के आदेश पर अगली सुनवाई तक सुप्रीम रोक
 सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और वायुसेना को निर्देश दिया कि वे उस महिला अधिकारी को सेवा से मुक्त न करें, जिसे स्थायी कमीशन देने से इन्कार कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि नियमित पीठ में होने वाली अगली सुनवाई तक महिला अधिकारी को अपनी सेवा जारी रखने की इजाजत दी जानी चाहिए।

जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने अपने फैसले के लिए शीर्ष अदालत के 22 मई के आदेश का हवाला दिया। इसमें विंग कमांडर निकिता पांडे की याचिका पर केंद्र और वायुसेना को इसी प्रकार के निर्देश दिए गए थे और कहा कि यही निर्देश विंग कमांडर कविता भाटी के मामले में लागू होंगे। पक्षकारों के अधिकारों या अधिकारी के पक्ष में समानता के प्रति पूर्वाग्रह के बिना, पीठ ने कहा कि विंग कमांडर कविता भाटी को कार्यमुक्त नहीं किया जाना चाहिए तथा अगली सुनवाई तक उन्हें सेवा में बने रहने की अनुमति दी जानी चाहिए। शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी भाटी ने दावा किया कि उन्हें गलत तरीके से स्थायी कमीशन देने से मना कर दिया गया।  

शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई 6 अगस्त को नियमित पीठ के समक्ष तय की है। नियमित पीठ इसी दिन वायुसेना से संबंधित मामलों पर सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत ने 22 मई को केंद्र और वायुसेना को निकिता पांडे को सेवा से मुक्त करने से रोक दिया था। वह ऑपरेशन बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा थीं, लेकिन उन्हें स्थायी कमीशन देने से मना कर दिया गया था। उन्होंने स्थायी कमीशन देने में भेदभाव का दावा किया था।  

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न्यायिक सेवा के लिए तीन साल प्रैक्टिस अनिवार्य वाले फैसले पर समीक्षा याचिका
 सुप्रीम कोर्ट में नए विधि स्नातकों को न्यायिक सेवा परीक्षा में प्रवेश के लिए तीन साल की प्रैक्टिस के न्यूनतम मानदंड वाले उसके फैसले पर समीक्षा याचिका दाखिल की गई है। सीजेआई बीआर गवई की तीन सदस्यीय पीठ ने 20 मई के अपने फैसले में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) बनने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम तीन साल की कानूनी प्रैक्टिस को अनिवार्य कर दिया था। याचिकाकर्ता चंद्र सेन यादव जो हाल ही में विधि स्नातक बने है ने समीक्षा याचिका में तर्क दिया कि यह इच्छुक विधि स्नातकों के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।  

 
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