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SC: सुप्रीम कोर्ट ने अब्बास अंसारी मामले में आदेश वापस लिया; पुलिस से पूछा- क्या उनके खिलाफ कोई जांच लंबित?

Fri, 21 Feb 2025 09:52 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 21 Feb 2025 09:52 PM IST
सार

अब्बास अंसारी मऊ निर्वाचन क्षेत्र से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के विधायक हैं। जमानत याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि मामले में जांच जारी है। इस मामले में उन्हें छह सितंबर, 2024 को गिरफ्तार किया गया था।

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SC recalls order in UP MLA Abbas Ansari case, asks police if any probe pending against him
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपना आदेश वापस ले लिया, जिसमें पुलिस से गैंगस्टर एक्ट के तहत एक मामले में विधायक अब्बास अंसारी के खिलाफ जांच 10 दिनों के भीतर पूरी करने को कहा गया था। कोर्ट ने इसकी बजाय यह जानना चाहा कि क्या उनके खिलाफ कोई जांच लंबित है? जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 6 मार्च को तय की। 

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आदेश वापस लेने का वाकया तब हुआ, जब अब्बास अंसारी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और यूपी गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य ने मामले में गलत हलफनामा दाखिल किया है और अब्बास अंसारी के खिलाफ कुछ भी लंबित नहीं है। यूपी सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने कहा कि उन्हें मामले पर और स्पष्टीकरण की जरूरत है।
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इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को गैंगस्टर अधिनियम के तहत विधायक अब्बास अंसारी के खिलाफ एक मामले में 10 दिनों के अंदर जांच पूरी करने का निर्देश दिया था। पीठ ने कहा था कि मामले की जांच पूरी होने के बाद वह अंसारी की जमानत याचिका पर विचार करेगी। दरअसल, अब्बास अंसारी ने मुठभेड़ के डर से 31 जनवरी को ‘गैंगस्टर’ अधिनियम के तहत एक मामले में अधीनस्थ अदालत की कार्यवाही में डिजिटल माध्यम से पेश होने की मांग की थी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी
पिछले साल 18 दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस मामले में अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन पर और कुछ अन्य लोगों पर वित्तीय एवं अन्य लाभ के लिए गिरोह बनाने का आरोप लगाया गया था।

जबरन वसूली और मारपीट का आरोप
चित्रकूट जिले के कोतवाली कर्वी थाने में 31 अगस्त, 2024 को अंसारी, नवनीत सचान, नियाज अंसारी, फराज खान और शाहबाज आलम खान के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एवं असामाजिक क्रियाकलाप (रोकथाम) अधिनियम, 1986 की धारा दो, तीन के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन पर जबरन वसूली और मारपीट का आरोप लगाया गया था।

6 सितंबर, 2024 को गिरफ्तार किया गया था
अंसारी मऊ निर्वाचन क्षेत्र से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के विधायक हैं। जमानत याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि मामले में जांच जारी है। इस मामले में उन्हें छह सितंबर, 2024 को गिरफ्तार किया गया था।

संबंधित वीडियो

बॉम्बे हाईकोर्ट में तीन अतिरिक्त न्यायाधीशों की स्थायी नियुक्ति को मंजूरी
भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बॉम्बे हाईकोर्ट में तीन अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। 20 फरवरी को हुई बैठक में कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति शैलेश प्रमोद ब्रह्मे, फिरदौस फिरोज पूनीवाला और जितेंद्र शांतिलाल जैन के नामों को स्थायी न्यायाधीश के रूप में मंजूरी दी।

कॉलेजियम ने यह भी सिफारिश की कि बॉम्बे हाईकोर्ट में अतिरिक्त हाईकोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति मंजूषा अजय देशपांडे का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया जाना चाहिए। कॉलेजियम ने मद्रास हाईकोर्ट में पांच अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। जिनके नाम की सिफारिश की गई है, वे हैं- न्यायमूर्ति रामासामी शक्तिवेल, पी धनबल, चिन्नासामी कुमारप्पन और कंडासामी राजशेखर। पटना हाईकोर्ट के लिए न्यायाधीशों के रूप में अधिवक्ता आलोक कुमार सिन्हा, रितेश कुमार, सोनी श्रीवास्तव, सौरेन्द्र पांडेय और अंशुल राज के नामों को मंजूरी दी गई।

सुप्रीम कोर्ट ने यासीन मलिक को 7 मार्च को तिहाड़ से जम्मू कोर्ट में वर्चुअल पेशी के आदेश दिए
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख और तिहाड़ जेल में बंद यासीन मलिक को 7 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जम्मू कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और उज्जल भुयान की पीठ ने कहा कि जम्मू की विशेष अदालत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणाली से पूरी तरह से सुसज्जित है और इससे वर्चुअल सुनवाई में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीबीआई की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जम्मू एवं कश्मीर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा दायर रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणाली सुचारू रूप से काम कर रही है।

मलिक की शारीरिक पेशी पर आपत्ति
सीबीआई ने कहा कि यासीन मलिक को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए जेल से बाहर नहीं लाया जा सकता। इससे पहले, जम्मू की एक निचली अदालत ने 20 सितंबर 2022 को आदेश दिया था कि मलिक को शारीरिक रूप से अदालत में लाकर अभियोजन पक्ष के गवाहों से जिरह करने का मौका दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही जम्मू एवं कश्मीर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को जम्मू कोर्ट में उचित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

बीफ मामले में असम सरकार को सुप्रीम  कोर्ट ने लगाई फटकार
बीफ के परिवहन पर प्रतिबंध मामले में सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार को फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों के पीछे भागने के बजाय बेहतर काम करना चाहिए। न्यायमूर्ति ए एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने गोमांस ले जाने वाले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी और मामले को 16 अप्रैल के लिए स्थगित कर दिया। राज्य सरकार के वकील ने मांस के नमूने को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजे जाने की जानकारी दी। इस पर पीठ ने कहा कि राज्य को इन लोगों के पीछे भागने से बेहतर काम करना चाहिए। वकील ने कहा कि ट्रक रोके जाने के बाद ड्राइवर मांस के बारे में जानकारी नहीं दे सका था। इसके बाद मांस को फॉरेंसिक लैब में भेज दिया गया। अदालत ने कहा कि कोई व्यक्ति विभिन्न जानवरों के पैकेटबंद कच्चे मांस को देखकर ही उनमें अंतर नहीं कर सकता। किसी व्यक्ति को कैसे पता चलेगा कि यह गोमांस या कोई अन्य मांस है? नंगी आंखें उनमें अंतर नहीं कर सकतीं। आरोपी के वकील ने कहा कि आरोपी एक गोदाम का मालिक था और उसने केवल पैक किया हुआ कच्चा मांस ही पहुंचाया था।
 

छत्तीसगढ़ के कांग्रेस विधायक के निर्वाचन के खिलाफ कार्यवाही पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा के कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के निर्वाचन के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने भाजपा नेता प्रेम प्रकाश पांडे को नोटिस जारी किया, जिन्होंने राज्य के भिलाई नगर निर्वाचन क्षेत्र से यादव के निर्वाचन को चुनौती दी है। यादव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा और अधिवक्ता सुमीर सोढ़ी ने दलील दी कि उच्च न्यायालय ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत उस आवेदन को खारिज करने में गलती की, जिसमें पांडे की चुनाव याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाया गया था।

भाजपा नेता ने इस आधार पर चुनाव को चुनौती दी कि यादव ने अपना नामांकन दाखिल करते समय सही तथ्यों का खुलासा नहीं किया और कुछ बिंदुओं को गलत तरीके से बताया, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत थे। पांडे ने आरोप लगाया कि यह एक भ्रष्ट आचरण है और याचिकाकर्ता के नामांकन पत्र को गलत तरीके से स्वीकार किया गया। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पांच जुलाई 2024 को यादव की याचिका खारिज कर दी जिसमें पांडे की याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाया गया था।

सुपरटेक की 16 परियोजनाएं एनबीसीसी को देने के आदेश पर सुप्रीम रोक
 सुप्रीम कोर्ट ने कर्ज में डूबी रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक की करीब 9,500 करोड़ रुपये की 16 आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने का काम सरकारी कंपनी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) को सौंपने के आदेश पर रोक लगा दी है। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने यह आदेश दिया था।

शीर्ष कोर्ट ने सुपरटेक व अन्य इच्छुक कंपनियों से भी कहा है कि वे परियोजनाओं को अपने हाथ में लेने के बारे में नए सिरे से प्रस्ताव प्रस्तुत करें।

चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार व जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ एनसीएलएटी के आदेश के खिलाफ अपीलों पर शुक्रवार को सुनवाई कर रही थी। पीठ ने घर खरीदारों के लिए चिंता व्यक्त की और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। पीठ ने इस बात की जांच करने पर भी सहमति जताई है कि क्या ट्रिब्यूनल ने एनबीसीसी को नियुक्त करने में दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) प्रक्रिया का पालन किया है। पीठ ने समाधान पेशेवर से कहा है कि वह अपना काम फिर से शुरू करे और एनबीसीसी को कोई काम या िजम्मेदारी न सौंपे। साथ ही मामले की सुनवाई एक अप्रैल से शुरू होने वाले सप्ताह में तय कर दी। उधर, सुपरटेक ने दावा किया कि वह बाहरी हस्तक्षेप के बिना परियोजनाओं को पूरा करने में सक्षम है।  

मई में शुरू होना था काम
एनसीएलएटी के निर्देश के तहत, एनबीसीसी को 31 मार्च, 2025 तक इन परियोजनाओं के लिए काम देने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया था। इसके तहत अगले महीने के भीतर औपचारिक अनुबंध सौंपे जाने थे और मई 2025 तक निर्माण शुरू होना था। एनबीसीसी को परियोजनाएं सौंपने के अलावा एनसीएलएटी ने प्रत्येक परियोजना के लिए एक शीर्ष समिति के गठन का भी निर्देश दिया था। इन समितियों को निर्माण प्रक्रिया की देखरेख करने का काम सौंपा गया था।

49,748 आवासीय इकाइयां अधर में
एनसीएलएटी के आदेश में सुपरटेक की 16 आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए एनबीसीसी को परियोजना प्रबंधन सलाहकार नियुक्त किया गया था। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और कर्नाटक में लगभग 49,748 आवास इकाइयां शामिल हैं। ये परियोजनाएं अधर में लटकी हुई हैं और लगभग 27,000 खरीदारों को अपने घर का इंतजार है।

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