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Supreme Court: विवादित बयान मामले में तेजस्वी यादव को सुप्रीम कोर्ट का निर्देश; चंद्रबाबू नायडू को मिली राहत

Mon, 29 Jan 2024 05:40 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 29 Jan 2024 05:40 PM IST
सार

न्यायमूर्ति एएस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने तेजस्वी यादव को नया बयान दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया। पहले हलफनामे पर शिकायतकर्ता ने आपत्ति दर्ज कराई थी।

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Supreme Court Updates SC directs Tejashwi Yadav to file proper statement withdrawing his Gujarati thugs remark
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजद नेता तेजस्वी यादव को गुजराती ठग वाली टिप्पणी को वापस लेते हुए उचिन बयान दाखिल को कहा है। दरअसल, तेजस्वी ने कहा था कि केवल गुजराती ही ठग हो सकते हैं। अब कोर्ट ने उन्हें इस टिप्पणी को वापस लेते हुए उचित बयान दाखिल करने का निर्देश दिया है। 

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न्यायमूर्ति एएस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने तेजस्वी यादव को नया बयान दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया। पहले हलफनामे पर शिकायतकर्ता ने आपत्ति दर्ज कराई थी। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई पांच फरवरी के लिए तय की। इसके बाद तेजस्वी यादव ने 19 जनवरी को शीर्ष अदालत में एक हलफनामा दायर कर अपनी कथित गुजराती ठग वाली टिप्पणी वापस ले ली थी।
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क्या है मामला?
शीर्ष अदालत तेजस्वी यादव की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उनकी कथित 'केवल गुजराती ही ठग हो सकते हैं' टिप्पणी को लेकर अहमदाबाद की एक कोर्ट में उनके खिलाफ लंबित आपराधिक मानहानि की शिकायत को राज्य के बाहर किसी स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की गई थी। 
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कोर्ट में पहले क्या हुआ?
इससे पहले शीर्ष कोर्ट ने राजद नेता की याचिका पर सुनवाई करते हुए पहले आपराधिक मानहानि शिकायत की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी और इसे दायर करने वाले गुजरात निवासी याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया था। 

गुजरात की कोर्ट में क्या हुआ?
दरअसल, गुजरात कोर्ट ने अगस्त में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 202 के तहत तेजस्वी यादव के खिलाफ प्रारंभिक जांच की थी और एक स्थानीय व्यवसायी और कार्यकर्ता हरेश मेहता की शिकायत पर उन्हें समन करने के लिए पर्याप्त आधार पाया 
था।

शिकायत में क्या?
शिकायत के मुताबिक, तेजस्वी यादव ने मार्च 2023 में पटना में मीडिया से बात करते हुए कहा था कि वर्तमान स्थिति में केवल गुजराती ही ठग हो सकते हैं और उनकी धोखाधड़ी माफ कर दी जाएगी। अगर वे एलआईसी या बैंकों का पैसा लेकर भाग गए तो कौन जिम्मेदार होगा? मेहता ने दावा किया कि यादव की टिप्पणियों ने सभी गुजरातियों को बदनाम किया है।

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Supreme Court - फोटो : ANI

न्यायिक आदेशों का पालन का निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों को न्यायिक आदेशों का पालन करने का निर्देश देने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका सोमवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने आश्चर्य जताया कि इस तरह का सामान्य आदेश कैसे पारित किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सभी अदालती आदेशों का शर्तों के अधीन पालन किया जाना चाहिए। पीठ में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे।

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सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI

NCSC में रिक्तियों को भरने के लिए याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में रिक्त पदों को भरने का निर्देश देने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर सोमवार को केंद्र से जवाब मांगा। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) एक संवैधानिक संस्था है, जिसका मकसद अनुसूचित जातियों के हितों की रक्षा करना और उन्हें भेदभाव और शोषण के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करना है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अलावा मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने एनसीएससी को भी नोटिस जारी किया।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

अरुणाचल के मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी याचिका पर नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस जनहित याचिका पर केंद्र, अरुणाचल प्रदेश सरकार और अन्य से जवाब मांगा, जिसमें मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाली कंपनियों को सार्वजनिक कार्यों के ठेके देने की सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने गैर सरकारी संगठनों सेव मोन रीजन फेडरेशन और स्वैच्छिक अरुणाचल सेना द्वारा दायर याचिका पर भारत संघ, राज्य सरकार, सीबीआई, खांडू और अन्य को नोटिस जारी किया। मामले में पेमा खांडू के पिता दोरजी खांडू की दूसरी पत्नी रिनचिन ड्रेमा और उनके भतीजे त्सेरिंग ताशी को पक्षकार बनाया गया है। दोरजी खांडू की 2011 में मुख्यमंत्री रहते हुए एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी। याचिका में दावा किया गया कि हितों का स्पष्ट टकराव होने के बावजूद रिनचिन ड्रेमा की कंपनी ब्रांड ईगल्स को बड़ी संख्या में सरकारी ठेके दिए गए हैं।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र सरकार की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने अमरावती इनर रिंग रोड (आईआरआर) घोटाला मामले में टीडीपी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू को दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली आंध्र प्रदेश सरकार की याचिका सोमवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने नायडू को राहत देते हुए उच्च न्यायालय के 10 जनवरी के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य की अपील खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि अन्य आरोपियों से जुड़ी उसी एफआईआर से उत्पन्न एक अपील को शीर्ष अदालत ने नवंबर, 2022 में पहले ही खारिज कर दिया था। इसमें कहा गया कि 2022 के आदेश के मद्देनजर, पीठ राज्य की अपील पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि नायडू को अग्रिम जमानत देते समय उसके या उच्च न्यायालय द्वारा की गई कोई भी टिप्पणी मामले की जांच को प्रभावित नहीं करेगी।

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सीजेआई चंद्रचूड़ - फोटो : ANI

असूचीबद्ध याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग कर रहे वकील को सीजेआई की फटकार
सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने दोपहर 12 बजे एक असूचीबद्ध याचिका पर तत्काल सुनवाई का उल्लेख करने के लिए एक युवा वकील को फटकार लगाई। सीजेआई ने कहा, यह कोई रेलवे प्लेटफॉर्म नहीं है जहां आप आने वाली किसी भी ट्रेन पर चढ़ सकें। वकील न्यायिक सुधारों की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई चाहते थे। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई कर रही थी।

सीजेआई ने पूछा, आप दोपहर 12 बजे ऐसा कैसे बता सकते हैं? क्या आप सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं? आप बस खड़े हों और इसका उल्लेख करें! हम जुर्माना लगाएंगे। वकील ने बताया कि वह दिल्ली हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करता है। इस पर सीजेआई ने पूछा, क्या दिल्ली हाईकोर्ट में यह प्रथा है कि एक वकील किसी भी समय खड़ा होता है और किसी मामले का उल्लेख करता है? सीजेआई ने वकील को शीर्ष अदालत में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को समझने के लिए किसी अन्य वकील से परामर्श करने की सलाह दी। सीजेआई की पीठ सुबह 10:30 बजे दिन की कार्यवाही की शुरुआत में तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए मामलों का उल्लेख सुनती है।

गुजरात हाईकोर्ट को मजिस्ट्रेटों को फिर से प्रशिक्षित करने की जरूरत
 सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक आरोपी को शीर्ष अदालत से अंतरिम अग्रिम जमानत मिलने के बाद हिरासत में भेजने के लिए सूरत के मजिस्ट्रेट और गुजरात पुलिस की खिंचाई की। शीर्ष अदालत ने कहा कि गुजरात हाईकोर्ट को मजिस्ट्रेटों को फिर से प्रशिक्षित किए जाने की जरूरत है।

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले में गुजरात सरकार और सूरत पुलिस अधिकारियों से इस संबंध में जवाब मांगा और राज्य हाईकोर्ट को एक पक्षकार बनाया है। पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि यह हमारे संज्ञान में लाया गया है कि गुजरात में मजिस्ट्रेट अग्रिम जमानत आदेशों के बाद एक पंक्ति जोड़ते हैं कि जांच अधिकारी रिमांड के लिए आवेदन दायर करने के लिए स्वतंत्र है। इसके बाद रिमांड आवेदन दायर किया गया और मजिस्ट्रेट ने मंजूरी दे दी। यह पता चलने के बाद कि आवेदक मेरिट के आधार पर अग्रिम जमानत का हकदार है, सीआरपीसी की धारा 438 के मूल उद्देश्य को विफल करता है। 

महज अभियुक्त का पेश न होना जमानत रद्द का आधार नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी आपराधिक मामले में अभियुक्त की अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित न होना ही जमानत रद्द करने का आधार नहीं हो सकता है। जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 6 सितंबर, 2023 के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने इस आधार पर याचिकाकर्ता कृष्ण शर्मा की जमानत रद्द कर दिया था कि वह अदालत के निर्देश के बावजूद उसके समक्ष पेश नहीं हुआ था।

1.6 करोड़ मुआवजे का भुगतान नहीं करने पर थलसेना व वायुसेना से जवाब-तलब

सुप्रीम कोर्ट ने थलसेना और वायुसेना से एक अधिकारी को चिकित्सकीय लापरवाही के लिए मुआवजे के रूप में 1.6 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं करने पर उनके खिलाफ दायर अवमानना के मामले में जवाब मांगा है। चिकित्सकीय लापरवाही के कारण वह अधिकारी एचआईवी से पीड़ित हो गए थे। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2023 में वायुसेना को एक सैन्य अस्पताल में रक्त चढ़ाने के दौरान एचआईवी से संक्रमित एक बुजुर्ग को मुआवजे के रूप में लगभग 1.6 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत ने वायुसेना और थलसेना को उनके आचरण के लिए फटकार लगाई थी और उन्हें संयुक्त रूप से और अलग-अलग रूप से उत्तरदायी ठहराया था।

शरद पवार गुट की याचिकाओं पर 15 तक फैसला लें विस अध्यक्ष
सुप्रीम कोर्ट ने अजित पवार गुट के खिलाफ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के शरद पवार गुट की अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने के लिए महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष को 15 फरवरी तक का समय दिया है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के आग्रह को स्वीकार करते हुए समय बढ़ाया है।

पीठ ने 30 अक्तूबर को विस अध्यक्ष को 31 जनवरी तक निर्णय लेने का निर्देश दिया था। समयसीमा समाप्त होने से दो दिन पहले विस अध्यक्ष ने तीन सप्ताह के अतिरिक्त समय की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि चूंकि स्पीकर शिवसेना विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने में व्यस्त थे, इसलिए वह समयसीमा का पालन करने की स्थिति में नहीं हैं।

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