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Supreme Court: 'सजा देना महज लॉटरी न हो, स्पष्टता बेहद जरूरी'; कानून मंत्रालय से व्यापक नीति बनाने की सिफारिश

Mon, 20 May 2024 07:36 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Mon, 20 May 2024 07:36 PM IST
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Supreme court updates SC agrees to hear plea against local bar association in Telangana
Supreme Court - फोटो : ANI

अदालतों की ओर से जल्दबाजी में और एक ही जैसे अपराध में किसी दोषी को कम और किसी को अधिक सजा सुनाए जाने को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कानून मंत्रालय से व्यापक सजा नीति बनाने को कहा। शीर्ष अदालत ने कहा कि सजा देना महज एक लॉटरी नहीं होनी चाहिए, इसके लिए स्पष्ट नीति जरूरी है। साथ ही नीति कभी भी न्यायाधीश केंद्रित नहीं होनी चाहिए क्योंकि समाज को सजा का आधार जानना जरूरी है।

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जस्टिस एमएस सुंदरेश और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने पटना हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इन्कार करते हुए यह टिप्पणी की। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दो आपराधिक मामलों में नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया था। इसमें एक मामला नाबालिग से दुष्कर्म का था, जिसमें 12 दिसंबर, 2021 को आरोपी की गिरफ्तारी हुई और निचली अदालत ने 27 जनवरी, 2022 को उसे मौत की सजा भी सुना दी। शीर्ष अदालत ने पाया कि आरोपी को अपना बचाव करने का उचित अवसर नहीं दिया गया और न्यायाधीश ने अनुचित जल्दबाजी की।
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पीठ ने कहा, सजा देना बिना सोचे-समझे की गई प्रतिक्रिया का परिणाम भी नहीं होनी चाहिए। यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। कोई भी अनुचित असमानता निष्पक्ष सुनवाई की अवधारण के खिलाफ होगी और यह न्याय के विपरीत भी होगा। पीठ ने कहा कि यह मुद्दा बेहद जटिल है और स्थिति से निपटना राज्यों और केंद्र सरकार का कर्तव्य है।
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नीति पर आयोग बनाने का सुझाव
शीर्ष अदालत ने न्याय विभाग, कानून और न्याय मंत्रालय, केंद्र सरकार को एक व्यापक नीति शुरू करने पर विचार करने की सिफारिश की है। अदालत ने कहा है कि इस मुद्दे पर सचेत चर्चा और बहस होनी चाहिए। इसके लिए विभिन्न क्षेत्र के विशेषज्ञों और हितधारकों को शामिल करते हुए सजा की नीति पर उचित सुझाव देने के लिए एक आयोग का गठन किया जा सकता है।
सजा पर अभियुक्त को सुना जाना चाहिए 

सजा देने में असमानताएं दिखती हैं
पीठ ने कहा, सजा पर अभियुक्त को सुनना उनका एक मूल्यवान अधिकार है। सजा एक महत्वपूर्ण पहलू है। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि जब सजा की बात आती है तो हमारे पास कोई स्पष्ट नीति या कानून नहीं है। वर्षों से यह न्यायाधीश-केंद्रित हो गया है और सजा देने में असमानताएं दिखती हैं। अपने फैसले में अदालत ने कानून मंत्रालय के सचिव को एक व्यापक सजा नीति शुरू करने की व्यवहार्यता पर छह महीने के भीतर एक हलफनामा दाखिल करने और उस पर एक रिपोर्ट देने के लिए कहा है।

खुली जेलों का क्षेत्र कम न करने का 'सुप्रीम' निर्देश

शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया है कि देश में खुली जेलों के क्षेत्र को कम करने का प्रयास नहीं किया जाएगा। अर्ध खुली या खुली जेलों में कैदियों को दिन में अपने जीविकोपार्जन के लिए बाहर काम करने की अनुमति दी जाती है। इसके बाद शाम को कैदी जेल में चले जाते हैं। खुली जेलों का उद्देश्य कैदियों के मानसिक तनाव को करना है। इसके माध्यम से कैदी जेल के बाहर समाज से जुड़ते हैं। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता वकील के. परमेश्वर की दलीलें सुनीं। बता दें कि के. परमेश्वर जेलों और कैदियों से संबंधित मामले में न्याय मित्र के रूप में मदद करते हैं। परमेश्वर ने अदालत को बताया कि केंद्र द्वारा एक ड्राफ्ट तैयार किया गया है। ड्राफ्ट में खुली जेलों को ‘खुले सुधार संस्थान’ नाम दिया गया था।  शीर्ष अदालत ने खुले सुधार संस्थानों के संबंध में गृह मंत्रालय को हालिया घटनाक्रम पर एक स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीठ को बताया गया कि जयपुर में सांगानेर खुले कैंप का क्षेत्र कम करने की कोशिश हो रही है। अदालत ने निर्देश दिया है कि खुले कैंप, संस्थान और जेलों के क्षेत्र को कम नहीं किया जाएगा। 


तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले पर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में तेलंगाना उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर की गई याचिका पर सुनवाई होगी। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने स्थानीय बार एसोसिएशन में नामांकित वकीलों को ही राज्य में सिविल जज की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी थी। न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने वकील वी राकेश रेड्डी की याचिका पर एक नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही अदालत ने वी राकेश रेड्डी को तेलंगाना के सिविल जज की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी है। याचिकाकर्ता को अपना आवेदन ऑनलाइन अपलोड करने के लिए कहा गया है। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया है कि आवेदन को अस्वीकार नहीं किया जाएगा। बता दें कि तेलंगाना राज्य न्यायिक सेवा नियम 2023 के अनुसार परीक्षा में शामिल होने वाले आवेदनकर्ता को अनिवार्य रूप से स्थानीय बार एसोसिएशन का सदस्य होना जरूरी है। 

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