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Supreme Court: ममकूटाथिल की अग्रिम जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, HC के आदेश को पीड़िता ने दी चुनौती
Sat, 07 Mar 2026 03:42 PM IST
Pavan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Sat, 07 Mar 2026 03:42 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
सुप्रीम कोर्ट में केरल के पलक्कड़ से निष्कासित कांग्रेस विधायक राहुल ममकूटथिल को दी गई अग्रिम जमानत के खिलाफ याचिका दाखिल की गई है। यह याचिका उस महिला ने दायर की है, जिसने विधायक पर दुष्कर्म और जबरन गर्भपात कराने का आरोप लगाया है। याचिका में केरल हाईकोर्ट के 12 फरवरी के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें विधायक को अग्रिम जमानत दी गई थी।
हाईकोर्ट ने जमानत देते समय कहा था कि जांच एजेंसी यह साबित नहीं कर पाई कि मामले में विधायक की हिरासत में पूछताछ जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा था कि शिकायतकर्ता के व्यवहार से पहली नजर में यह लगता है कि दोनों के बीच सहमति से शारीरिक संबंध थे, हालांकि अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान ही होगा। अदालत ने विधायक को कुछ शर्तों के साथ राहत दी थी। उन्हें शिकायतकर्ता या गवाहों से संपर्क न करने, सबूतों से छेड़छाड़ न करने, ट्रायल कोर्ट की अनुमति के बिना केरल से बाहर न जाने और अपना पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया गया था।
इससे पहले तिरुवनंतपुरम की सत्र अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था। विधायक को 6 दिसंबर 2025 से इस मामले में गिरफ्तारी से सुरक्षा मिली हुई है। विधायक के खिलाफ इस तरह के तीन मामले दर्ज हैं। इनमें से दो मामलों में उन्हें गिरफ्तारी से राहत मिल गई, जबकि तीसरे मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था और करीब दो हफ्ते जेल में रहने के बाद नियमित जमानत मिली थी।
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हाईकोर्ट ने जमानत देते समय कहा था कि जांच एजेंसी यह साबित नहीं कर पाई कि मामले में विधायक की हिरासत में पूछताछ जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा था कि शिकायतकर्ता के व्यवहार से पहली नजर में यह लगता है कि दोनों के बीच सहमति से शारीरिक संबंध थे, हालांकि अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान ही होगा। अदालत ने विधायक को कुछ शर्तों के साथ राहत दी थी। उन्हें शिकायतकर्ता या गवाहों से संपर्क न करने, सबूतों से छेड़छाड़ न करने, ट्रायल कोर्ट की अनुमति के बिना केरल से बाहर न जाने और अपना पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया गया था।
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इससे पहले तिरुवनंतपुरम की सत्र अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था। विधायक को 6 दिसंबर 2025 से इस मामले में गिरफ्तारी से सुरक्षा मिली हुई है। विधायक के खिलाफ इस तरह के तीन मामले दर्ज हैं। इनमें से दो मामलों में उन्हें गिरफ्तारी से राहत मिल गई, जबकि तीसरे मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था और करीब दो हफ्ते जेल में रहने के बाद नियमित जमानत मिली थी।
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