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Supreme Court: पूर्व सिमी चीफ की अर्जी पर MP को नोटिस; HDFC बैंक के सीईओ ने लीलावती ट्रस्ट की FIR को दी चुनौती

Fri, 04 Jul 2025 06:01 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 04 Jul 2025 06:01 AM IST
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Supreme Court Updates Notice to MP Govt SIMI chief plea HDFC CEO challenge Lilavati Trust FIR hindi legal news
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

सुप्रीम कोर्ट ने स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के पूर्व प्रमुख सफदर नागोरी की याचिका पर मध्य प्रदेश राज्य को नोटिस जारी किया है। सफदर नागोरी ने राजद्रोह कानून पर रोक लगाए जाने के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है। इस रोक के कारण उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित उनकी अपील की कार्यवाही रुकी हुई है। अवकाशकालीन पीठ के समक्ष पेश होते हुए नागोरी के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को राजद्रोह सहित कई आतंकवाद संबंधी अपराधों के तहत दोषी ठहराया गया था। उन्होंने संबंधित सजाएं पूरी कर ली हैं, लेकिन राजद्रोह के आरोप के खिलाफ उनकी अपील, जिसके लिए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है, रुकी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ्ते में तय कर दी। 2017 में मध्य प्रदेश की एक जिला अदालत ने सिमी मास्टरमाइंड नागोरी और 11 अन्य आरोपियों को हथियार, विस्फोटक, गोला-बारूद रखने और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों की साजिश रचने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

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एचडीएफसी बैंक के सीईओ ने लीलावती ट्रस्ट की एफआईआर को दी चुनौती
एचडीएफसी बैंक और इसके सीईओ एवं एमडी शशिधर जगदीशन ने मुंबई में प्रसिद्ध लीलावती अस्पताल चलाने वाले लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट की एफआईआर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। लीलावती ट्रस्ट ने एचडीएफसी सीईओ पर धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोप लगाया है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को मामले पर विचार करने पर सहमति जताई है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ के समक्ष जगदीशन के वकील मुकुल रोहतगी ने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का आग्रह किया। पीठ ने कहा कि मामले को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। वकील ने कहा, लीलावती अस्पताल के ट्रस्टियों की ओर से एमडी और बैंक के खिलाफ एक तुच्छ एफआईआर दर्ज की गई है। रोहतगी ने दावा किया कि बैंक को उनसे पैसा वसूलना है। हाथ मरोड़ने के लिए उन्होंने एमडी के खिलाफ मजिस्ट्रेट के माध्यम से एफआईआर दर्ज कराई है। वकील ने कहा कि उन्होंने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था लेकिन हाईकोर्ट की तीन पीठों ने अब तक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए अगली संभावित तारीख 14 जुलाई है। हर दिन बैंक को नुकसान हो रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा-हम में नहीं, न्याय में भगवान देखो; मंदिर मामले  में की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट में एक वकील के यह कहने पर कि उन्हें जजों में भगवान दिखते हैं, जस्टिस एमएम सुंदरेश व जस्टिस के विनोद चंद्रन ने कहा कि जज में नहीं न्याय में भगवान देखो। पीठ ने उत्तर प्रदेश में एक मंदिर के मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। इस मामले में पेश एक वकील ने यह कहते हुए मामले से हटने की मांग की कि उनका मुवक्किल उनकी बात नहीं सुन रहा है। वकील ने दावा किया कि उन्हें मुवक्किल से नोटिस मिला है जिसमें आरोप लगाया गया कि वकीलों के माध्यम से जजों को फंसाया जा रहा है। इसे बहुत अपमानजनक बताते हुए वकील ने दुख जताते हुए कहा, अगर हमें लगता है कि कोई बेईमानी हो रही है तो हम मामले से हट जाते हैं। हम अपने न्यायाधीशों में ईश्वर को देखते हैं। जस्टिस सुंदरेश ने कहा, हममें ईश्वर को मत देखिए। कृपया न्याय में ईश्वर को देखिए। पीठ ने अनुरोध स्वीकार कर लिया और वकील को मामले से मुक्त कर दिया। 
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