Supreme Court: पंजाब एवं हरियाणा HC में निर्माण पर 'सुप्रीम' रोक; राहुल लोधी को निर्देश स्वीकार करें तथ्य
याचिका में मस्जिद कमेटी प्रबंधन ने मांग की थी कि जिलाधिकारी को निर्देश दिया जाए कि यथास्थिति बरकरार रखी जाए। दरअसल जिस निजी कुएं की खुदाई की जा रही है, वह मस्जिद की सीढ़ियों के पास स्थित है।
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संभल की शाही जामा मस्जिद विवाद पर यूपी सरकार को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने संभल की शाही जामा मस्जिद के विवाद में उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से स्टेट्स रिपोर्ट मांगी है। संभल शाही जामा मस्जिद प्रबंधक कमेटी की याचिका पर यह नोटिस जारी किया गया है। याचिका में मस्जिद कमेटी प्रबंधन ने मांग की थी कि जिलाधिकारी को निर्देश दिया जाए कि यथास्थिति बरकरार रखी जाए। दरअसल जिस निजी कुएं की खुदाई की जा रही है, वह मस्जिद की सीढ़ियों के पास स्थित है।
कुएं की पूजा पर रोक
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की सदस्यता वाली पीठ ने प्रशासन को यह भी निर्देश दिया है कि वे नगर पालिका के नोटिस पर कार्रवाई न करें, जिसमें सार्वजनिक कुएं को हरि मंदिर बताया गया है और उसकी पूजा की इजाजत दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में पूजा पर रोक लगा दी है। हालांकि कुएं के सार्वजनिक इस्तेमाल की छूट है। संभल शाही जामा मस्जिद प्रबंधन कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट ने 19 नवंबर 2024 को मस्जिद के सर्वे का निर्देश दिया था। मस्जिद कमेटी की तरफ से वरिष्ठ वकील हुफैजा अहमदी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। वहीं वादी पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन पेश हुए। जैन ने अदालत में कहा कि कुआं मस्जिद के बाहर स्थित है। वहीं अहमदी ने कहा कि कुआं आधा अंदर और आधा मस्जिद के बाहर है। अहमदी ने ये भी दावा किया कि कुआं मस्जिद के इस्तेमाल के लिए ही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुएं का इस्तेमाल अगर मस्जिद के बाहर से हो रहा है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले के निपटारे तक सभी कारण बताओ नोटिस की कार्यवाही पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों और कैसीनो के खिलाफ जीएसटी विभाग द्वारा जारी एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के टैक्स धोखाधड़ी के नोटिस पर रोक लगा दी। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि इस मामले की सुनवाई की जरूरत है और इस दौरान गेमिंग कंपनियों के खिलाफ सभी कार्यवाही स्थगित रहेंगी।
जीएसटी विभाग के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने कहा कि कुछ नोटिस फरवरी में समाप्त हो जाएंगे।
अक्तूबर 2023 में जीएसटी अधिकारियों ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के खिलाफ टैक्स चोरी के आरोप में शो-कॉज नोटिस जारी किए थे। सरकार ने एक अक्टूबर 2023 से विदेशी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के लिए भारत में पंजीकरण अनिवार्य कर दिया था।अगस्त 2023 में जीएसटी काउंसिल ने यह स्पष्ट किया था कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफार्मों पर लगाए गए दांव की पूरी राशि पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाएगा।
कई गेमिंग कंपनियों ने इन जीएसटी मांगों के खिलाफ उच्च न्यायालयों में याचिका दायर की थी, जिसमें वे राजस्व अधिकारियों के दावों का विरोध कर रही थीं। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल केंद्र सरकार की याचिका मंजूर करते हुए इस मामले को अपने पास स्थानांतरित कर लिया था, ताकि 28 प्रतिशत जीएसटी के प्रभाव पर अंतिम निर्णय लिया जा सके।
कई ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों जैसे गैम्स 24x7, हेड डिजिटल वर्क्स और फेडरेशन ऑफ इंडिया फेंटसी स्पोर्ट्स ने इस जीएसटी आरोप के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस फैसले पर भी रोक लगाई थी, जिसमें ऑनलाइन गेमिंग कंपनी को 21,000 करोड़ रुपये के जीएसटी नोटिस को खारिज कर दिया था।
मुंबई की आरे कॉलोनी में हमारी अनुमति के बिना कोई पेड़ न काटा जाए: सुप्रीम कोर्ट
मुंबई नगर निगम के वृक्ष प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह अदालत की अनुमति के बिना आरे कॉलोनी क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की अनुमति न दे। जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस अरविंद कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।
कोर्ट पांच मार्च को मेट्रो कार शेड के निर्माण के लिए आरे जंगल में पेड़ों की कटाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।
मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने कोर्ट को सूचित किया कि क्षेत्र में और पेड़ों की कटाई का कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है। नवंबर, 2022 में कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के आरे क्षेत्र में मेट्रो कार शेड की अनुमति देने का फैसला अस्वीकार कर दिया था। एमएमआरसीएल को पेड़ों की कटाई की अनुमति मांगने वाले आवेदनों को आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी।
अप्रैल, 2023 में कोर्ट ने 84 पेड़ों की अनुमति देने के बावजूद 177 पेड़ों को काटने की मांग करने के लिए एमएमआरसीएल पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने वाले 2023 नारी शक्ति वंदन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं की जांच करने से इनकार कर दिया। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत जया ठाकुर और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वूमेन (एनएफआईडब्ल्यू) की याचिकाओं पर विचार करने की इच्छुक नहीं है।
पीठ ने कहा कि जया ठाकुर की याचिका में उस विधेयक को चुनौती दी गई थी, जो अब अधिनियम बन चुका है, जबकि एनएफआईडब्ल्यू ने कानून के परिसीमन खंड को चुनौती दी है। पीठ ने जहां ठाकुर की याचिका को निरर्थक बताकर खारिज कर दिया गया, वहीं अनुच्छेद 32 के तहत एनएफआईडब्ल्यू की याचिका को अस्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट या किसी अन्य उचित मंच पर जाने की छूट दी। एनएफआईडब्ल्यू ने अनुच्छेद 334ए (1) या 2023 अधिनियम की धारा 5 की सांविधानिक वैधता को चुनौती दी, जिसमें अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन को एक पूर्व शर्त बना दिया गया था। शीर्ष अदालत ने 3 नवंबर, 2023 को ठाकुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि अदालत के लिए महिला आरक्षण कानून के उस हिस्से को रद्द करना बहुत कठिन होगा जो जनगणना के बाद लागू होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम के वृक्ष प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह बिना उसकी अनुमति के मुंबई की आरे कॉलोनी में और अधिक पेड़ न काटने दें। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि प्राधिकरण आवेदनों पर विचार कर सकता है और फिर अदालत से आदेश मांग सकता है। मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएमआरसीएल) ने पीठ को सूचित किया कि क्षेत्र में और अधिक पेड़ काटने का कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है। इसके बाद पीठ ने यह आदेश दिया। इस मामले में अगली सुनवाई 5 मार्च को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा था कि क्या आरे जंगल में और पेड़ काटने का कोई प्रस्ताव है। अदालत ने 2023 में कुछ वनवासी समुदायों को मेट्रो रेल परियोजना के लिए जंगल में पेड़ों की कटाई पर अपनी शिकायतों के साथ बॉम्बे हाईकोर्ट जाने की अनुमति दी थी। 17 अप्रैल, 2023 को, सर्वोच्च न्यायालय ने कार शेड परियोजना के लिए जंगल में केवल 84 पेड़ों की कटाई की अनुमति देने वाले अपने आदेश का उल्लंघन करने की के लिए मुंबई मेट्रो को कड़ी फटकार लगाई और 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
स्वामी श्रद्धानंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिसंबर 2023 में राष्ट्रपति को सौंपी अपनी दया याचिका पर जल्द फैसला लेने की मांग की है। श्रद्धानंद अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में 30 साल की सजा काट रहे हैं। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ के समक्ष श्रद्धानंद उर्फ मुरली मनोहर मिश्रा की याचिका सुनवाई के लिए पेश की गई। पीठ ने श्रद्धानंद के वकील वरुण ठाकुर से कहा कि वह अपनी याचिका की एक प्रति केंद्र सरकार के वकील को मुहैया कराएं। पीठ ने कहा कि याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई की जाएगी। ठाकुर ने कहा कि श्रद्धानंद ने एक दिन की पैरोल के बिना 30 साल जेल में बिताए हैं।
पिछले साल अक्तूबर में सुप्रीम कोर्ट ने श्रद्धानंद की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। इसमें उन्होंने शीर्ष अदालत के उस फैसले की समीक्षा की मांग की थी जिसमें उन्हें जीवनभर जेल से रिहा न करने का निर्देश दिया गया था। श्रद्धानंद ने सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की पीठ के जुलाई 2008 के फैसले की समीक्षा की मांग की थी। श्रद्धानंद की पत्नी शाकेरेह मैसूर रियासत के पूर्व दीवान सर मिर्जा इस्माइल की पोती थीं। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2008 के अपने फैसले में कहा कि दंपती की शादी अप्रैल 1986 में हुई थी लेकिन मई 1991 में शाकेरेह अचानक गायब हो गईं। मार्च 1994 में केंद्रीय अपराध शाखा, बंगलूरू ने शाकेरेह की 'गुमशुदगी' की शिकायत की जांच अपने हाथ में ले ली थी। पूछताछ में श्रद्धानंद ने उसकी हत्या करने की बात कबूल कर ली थी।
सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा नेता राहुल सिंह लोधी को इस तथ्य को स्वीकार करने को कहा कि वह 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की महिला उम्मीदवार चंदा सिंह गौर से 9000 वोटों से हार गए थे। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने लोधी से गौर की याचिका पर जवाब मांगा। गौर ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें भाजपा नेता की चुनाव याचिका की स्वीकार्यता पर उनकी याचिका खारिज दी गई थी। लोधी को नोटिस जारी करते हुए पीठ ने चुनाव याचिका में आगे की कार्यवाही स्थगित करने का निर्देश दिया। पीठ ने लोधी के वकील से कहा, एक महिला उम्मीदवार से भारी बहुमत से पराजित होने के कारण आप अपमानित महसूस कर रहे हैं। आप लगभग 9,000 मतों के अंतर से पराजित हुए हैं। आपको इस तथ्य को स्वीकार कर लेना चाहिए। इस मामले में अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर राज्य की शिक्षक भर्ती परीक्षा के पाठ्यक्रम में राजस्थानी भाषा को शामिल करने की याचिका पर जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि राजस्थान में 4.62 करोड़ से अधिक लोगों की ओर से बोली जाने वाली भाषा को परीक्षा से बाहर रखने से राज्य की सांस्कृतिक विरासत और मातृभाषा में शिक्षा के अधिकार का हनन हुआ है। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष सिंघवी को सुना और राज्य सरकार, प्रमुख सचिव और राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा के समन्वयक समेत अन्य से जवाब मांगा। सिंघवी याचिकाकर्ताओं, वरिष्ठ पत्रकार एवं स्थानीय भाषा पत्रिका माणक के संपादक पदम मेहता और प्रसिद्ध विद्वान एवं स्थानीय भाषा के समर्थक कल्याण सिंह शेखावत की ओर से पेश हुए। याचिका में कहा गया है कि 4.62 करोड़ से अधिक लोग राजस्थानी को अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं, फिर भी राजस्थान में कक्षा 1 से 5 और 6-8 के लिए शिक्षकों की भर्ती के लिए आयोजित रीट के पाठ्यक्रम से भाषा को बाहर रखा गया। याचिका में कहा गया है कि राज्य में अन्य कम बोली जाने वाली भाषाएं, जैसे गुजराती, पंजाबी, सिंधी और उर्दू, परीक्षा में शामिल की गईं।
स्वामी श्रद्धानंद ने जल्द फैसले के लिए दायर की याचिका
स्वामी श्रद्धानंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिसंबर 2023 में राष्ट्रपति को सौंपी अपनी दया याचिका पर जल्द फैसला लेने की मांग की है। श्रद्धानंद अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में 30 साल की सजा काट रहे हैं। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ के समक्ष श्रद्धानंद उर्फ मुरली मनोहर मिश्रा (84) की याचिका सुनवाई के लिए पेश की गई। पीठ ने श्रद्धानंद के वकील वरुण ठाकुर से कहा कि वह अपनी याचिका की एक प्रति केंद्र सरकार के वकील को मुहैया कराएं।
पीठ ने कहा कि याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई की जाएगी। ठाकुर ने कहा कि श्रद्धानंद ने एक दिन की पैरोल के बिना 30 साल जेल में बिताए हैं। पिछले साल अक्तूबर में सुप्रीम कोर्ट ने श्रद्धानंद की याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया था। इसमें उन्होंने शीर्ष अदालत के उस फैसले की समीक्षा की मांग की थी, जिसमें उन्हें जीवनभर जेल से रिहा न करने का निर्देश दिया गया था। श्रद्धानंद ने सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की पीठ के जुलाई 2008 के फैसले की समीक्षा की मांग की थी। श्रद्धानंद की पत्नी शाकेरेह मैसूर रियासत के पूर्व दीवान सर मिर्जा इस्माइल की पोती थीं। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2008 के अपने फैसले में कहा कि दंपती की शादी अप्रैल 1986 में हुई थी लेकिन मई 1991 में शाकेरेह अचानक गायब हो गईं। मार्च 1994 में केंद्रीय अपराध शाखा, बंगलूरू ने शाकेरेह की ‘गुमशुदगी’ की शिकायत की जांच अपने हाथ में ले ली थी। पूछताछ में श्रद्धानंद ने उसकी हत्या करने की बात कबूल कर ली थी।