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सुप्रीम कोर्ट अपडेट: सीजेआई कोर्ट में मामलों की मेंशनिंग की लाइव स्ट्रीमिंग बंद, जूनियर वकीलों को बढ़ावा
Wed, 28 Oct 2026 03:50 PM IST
अमन मौर्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमन मौर्या
Updated Wed, 28 Oct 2026 03:50 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने सीजेआई कोर्ट में मामलों के उल्लेख (मेंशनिंग) की लाइव स्ट्रीमिंग बंद कर दी है। मंगलवार को राहुल गांधी से जुड़े मामले पर नाराजगी के बाद दो नवंबर से सीनियर वकीलों की मौखिक मेंशनिंग पर भी रोक रहेगी।
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की अदालत में मामलों का उल्लेख (मेंशनिंग) करने की लाइव स्ट्रीमिंग बंद कर दी है। सुप्रीम कोर्ट में 'मेंशनिंग' एक प्रक्रिया है, जिसके तहत वकील या संबंधित पक्ष, सीजेआई या किसी बेंच से मौखिक या लिखित रूप में किसी मामले की तत्काल सुनवाई या उसे जल्द सूचीबद्ध (लिस्ट) करने का अनुरोध करते हैं। यह कदम तब उठाया गया है, जब मंगलवार को एक वकील द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़ा मामला सामने लाए जाने पर सीजेआई ने नाराजगी जताई थी।
बिना किसी ठोस मुद्दे के मामले का उल्लेख करने वाले वकीलों पर नाराजगी जताते हुए, सीजेआई ने इसे सबसे बड़ी परेशानी (न्यूसेंस) बताया और कहा कि इस प्रथा को पूरी तरह से बंद कर दिया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने एक सर्कुलर भी जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि दो नवंबर से किसी भी वरिष्ठ वकील (सीनियर वकील) को अदालत के सामने मौखिक रूप से मामले का उल्लेख करने की अनुमति नहीं होगी। सर्कुलर में कहा गया है, 'सभी संबंधित लोगों को सूचित किया जाता है कि अब अदालतों के सामने मौखिक रूप से मामलों का उल्लेख करने के लिए युवा और कनिष्ठ (जूनियर) वकीलों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।'
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बिना किसी ठोस मुद्दे के मामले का उल्लेख करने वाले वकीलों पर नाराजगी जताते हुए, सीजेआई ने इसे सबसे बड़ी परेशानी (न्यूसेंस) बताया और कहा कि इस प्रथा को पूरी तरह से बंद कर दिया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने एक सर्कुलर भी जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि दो नवंबर से किसी भी वरिष्ठ वकील (सीनियर वकील) को अदालत के सामने मौखिक रूप से मामले का उल्लेख करने की अनुमति नहीं होगी। सर्कुलर में कहा गया है, 'सभी संबंधित लोगों को सूचित किया जाता है कि अब अदालतों के सामने मौखिक रूप से मामलों का उल्लेख करने के लिए युवा और कनिष्ठ (जूनियर) वकीलों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।'
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