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SC: कोल्हापुर मंदिर की हथिनी महादेवी मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार; इस तारीख को सुना जाएगा केस

Mon, 11 Aug 2025 12:21 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Mon, 11 Aug 2025 12:21 PM IST
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Supreme Court Updates listed matter shifting of elephant in Kolhapur Maharashtra Vantara animal rescue centre
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
महाराष्ट्र के कोल्हापुर की मशहूर मंदिर हथिनी महादेवी (माधुरी) को गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा एनिमल रेस्क्यू सेंटर भेजने के फैसले ने विवाद खड़ा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर गुरुवार को सुनवाई करने का फैसला किया है। हथिनी के स्थानांतरण को लेकर स्थानीय लोग, धार्मिक संस्थाएं और राज्य सरकार भी अलग-अलग पक्ष रख रहे हैं, जिससे मामला संवेदनशील बन गया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कोल्हापुर मंदिर की हथिनी महादेवी को वनतारा भेजने के खिलाफ दायर याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमति दी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हथिनी को जबरन ले जाया गया और वह मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ ने भी स्थानांतरण के आदेश को सही ठहराया था।
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जुलाई में बॉम्बे हाईकोर्ट ने जैन मंदिर ट्रस्ट की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें हाई पावर कमेटी के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें हथिनी को वेलफेयर ट्रस्ट में भेजने की सिफारिश की गई थी। अदालत ने कहा था कि हथिनी की सेहत बिगड़ी हुई है और उसके कल्याण को धार्मिक गतिविधियों से ऊपर रखा जाना चाहिए। अदालत ने जल्द से जल्द हथिनी को जामनगर भेजने का निर्देश भी दिया था। हथिनी के स्थानांतरण के बाद हजारों लोग सड़कों पर उतरकर विरोध कर चुके हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य सरकार हथिनी को वापस लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। उन्होंने वनतारा टीम से मुलाकात कर भरोसा दिलाया कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाएगा और हथिनी के लिए कोल्हापुर में ही एक पुनर्वास केंद्र बनाने की संभावना है। 
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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी पर की गई टिप्पणी हटाने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु के पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी के खिलाफ "कैश फॉर जॉब" मामले में अपने 2022 के आदेश में की गई टिप्पणियां हटाने से इनकार कर दिया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि आदेश का एक भी शब्द संशोधित नहीं किया जाएगा, लेकिन यह भी कहा कि टिप्पणियों का असर ट्रायल कोर्ट में लंबित मुकदमे पर नहीं पड़ेगा। पीठ ने सेवानिवृत्त जजों द्वारा दिए गए फैसलों में बदलाव की मांग को “फोरम शॉपिंग” जैसी खराब प्रथा बताया और कहा कि इस आधार पर आवेदन खारिज किया जा सकता है। अदालत ने तीन अलग-अलग आवेदनों पर यह निर्णय दिया, जो 2022 और 2023 के फैसलों से जुड़े थे, जिनमें ईडी जांच की अनुमति, ट्रायल बहाल करना और जमानत रद्द करने से इनकार करना शामिल था।
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सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने टिप्पणी हटाने की मांग नहीं की, बल्कि अदालत से यह स्पष्ट करने का आग्रह किया कि अवलोकन ट्रायल को प्रभावित न करें। अदालत ने कहा कि यह आपराधिक न्यायशास्त्र का बुनियादी सिद्धांत है। मामले में ईडी ने 2021 में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। यह मामला 2018 में दर्ज तीन एफआईआर और “कैश फॉर जॉब” घोटाले की शिकायतों पर आधारित है। शीर्ष अदालत 13 अगस्त को एफआईआर को क्लब करने की चुनौती पर विस्तृत सुनवाई करेगी।

सुप्रीम कोर्ट में 'तलाक-ए-हसन' पर 19-20 नवंबर को अंतिम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 'तलाक-ए-हसन' और अन्य सभी तरह के 'एकतरफा गैर-न्यायिक तलाक' को असंवैधानिक घोषित करने की मांग वाली याचिकाओं पर 19-20 नवंबर को अंतिम सुनवाई तय की। 'तलाक-ए-हसन' मुस्लिम समाज में तलाक का एक तरीका है, जिसमें पति तीन महीने तक हर महीने एक बार "तलाक" कहकर विवाह समाप्त कर सकता है।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू), राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) से इस मुद्दे पर राय मांगी है। कोर्ट ने सभी हस्तक्षेप याचिकाएं मंजूर कर कहा कि वे सुनवाई में मदद कर सकते हैं। केंद्र की ओर से अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने बताया कि ट्रिपल तलाक मामले में सरकार पहले ही सभी 'एकतरफा गैर-न्यायिक तलाक' का विरोध कर चुकी है, इसलिए इस पर अलग से जवाब दाखिल नहीं किया गया। कोर्ट ने एएसजी केएम नटराज से निर्देश लेकर आयोगों की राय रिकॉर्ड में लाने को कहा।

पीठ ने कहा कि पीड़ित और प्रभावित पक्ष उसके सामने मौजूद हैं, इसलिए तकनीकी आपत्तियों जैसे लोकस स्टैंडी को इस चरण में महत्व नहीं दिया जाएगा। मामला गाजियाबाद निवासी बेनज़ीर हीना सहित नौ याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें लिंग और धर्म-निरपेक्ष तलाक के समान नियम बनाने की मांग भी की गई है। 'तलाक-ए-हसन' में अगर पहले या दूसरे बार तलाक कहने के बाद पति-पत्नी साथ रहने लगते हैं, तो तलाक की प्रक्रिया समाप्त मानी जाती है। अन्यथा, तीसरे महीने तीसरी बार 'तलाक' कहने पर यह प्रभावी हो जाता है।
 

सुप्रीम कोर्ट ने वकील अशोक पांडे की सजा पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने वकील अशोक पांडे को आपराधिक अवमानना मामले में मिली छह महीने की कैद की सजा पर रोक लगा दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पांडे को खुले कोर्ट में न्यायाधीशों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में दोषी ठहराया था। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। कोर्ट ने पांडे को वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया को अपना पक्ष रखने के लिए ब्रीफ करने का निर्देश दिया है, जैसा कि अदालत ने सुझाव दिया।

भूषण पावर के लिए समाधान योजना पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट ने कर्ज में डूबी भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड (बीपीएसएल) के लिए जेएसडब्ल्यू स्टील की 19,700 करोड़ रुपये की समाधान योजना से संबंधित याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने सक्षी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जेएसडब्ल्यू स्टील की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल और पूर्व प्रमोटरों की ओर से वरिष्ठ वकील ध्रुव मेहता की दलीलें रखीं।

सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने 31 जुलाई को अपने 2 मई के फैसले को वापस ले लिया था। उस फैसले में बीपीएसएल के परिसमापन का निर्देश दिया गया था और जेएसडब्ल्यू की समाधान योजना को रद्द कर दिया गया था। पीठ ने सीओसी, समाधान पेशेवर और राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के आचरण की आलोचना करते हुए इसे दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) का घोर उल्लंघन करार दिया था।

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