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SC: 'हाईकोर्ट जज के फैसले को समझने में हुई कठिनाई', सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया उच्च न्यायालय का आदेश
Sat, 23 Aug 2025 02:04 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Sat, 23 Aug 2025 02:04 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को हाईकोर्ट के एक जज के फैसले को समझने में कठिनाई होने की घटना को याद किया। कोर्ट ने कहा कि एक बार हम न्यायाधीशों को हाईकोर्ट के न्यायाधीश द्वारा दिए गए फैसलों को समझने में दिक्कत हुई थी। इसके बाद कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के एक अक्तूबर, 2024 को दिए गए फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई के दौरान कहा कि हमें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के फैसलों को समझने में कठिनाई हुई। सौभाग्य से उन न्यायाधीश ने अपना पद छोड़ दिया है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के प्रत्येक फैसले को तब पलट दिया जाता है जब उसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जाती है। पीठ ने जिन जज का जिक्र किया है, वह इसी साल सेवानिवृत्त हुए हैं। साथ ही पीठ ने जिस मामले पर सुनवाई की वह फैसला भी उन्हीं न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था। हाईकोर्ट ने अपीलकर्ताओं को बरी करने के फैसले को पलट दिया था और उन्हें हत्या के एक मामले में दोषी ठहराया था।
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जबकि शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही अपीलों पर नये सिरे से विचार करने के लिए मामले को उच्च न्यायालय को वापस भेज दिया।
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सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के एक अक्तूबर, 2024 को दिए गए फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई के दौरान कहा कि हमें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के फैसलों को समझने में कठिनाई हुई। सौभाग्य से उन न्यायाधीश ने अपना पद छोड़ दिया है।
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मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के प्रत्येक फैसले को तब पलट दिया जाता है जब उसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जाती है। पीठ ने जिन जज का जिक्र किया है, वह इसी साल सेवानिवृत्त हुए हैं। साथ ही पीठ ने जिस मामले पर सुनवाई की वह फैसला भी उन्हीं न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया था। हाईकोर्ट ने अपीलकर्ताओं को बरी करने के फैसले को पलट दिया था और उन्हें हत्या के एक मामले में दोषी ठहराया था।
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जबकि शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही अपीलों पर नये सिरे से विचार करने के लिए मामले को उच्च न्यायालय को वापस भेज दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने एआईएफएफ और एफएसडीएल को दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय फुटबॉल संघ (एआईएफएफ) और फुटबॉल खेल विकास लिमिटेड (एफएसडीएल) से कहा है कि वे मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (एमआरए) के नवीनीकरण से जुड़ी विवाद की समस्या को सुलझाएं, जिसने इस सीजन में इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) को प्रभावित किया है। न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने एआईएफएफ और एफएसडीएल को निर्देश दिया कि वे इस मुद्दे पर बातचीत करें और 28 अगस्त तक इसका समाधान निकालें, जो अगली सुनवाई की तारीख है।
सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय फुटबॉल संघ (एआईएफएफ) और फुटबॉल खेल विकास लिमिटेड (एफएसडीएल) से कहा है कि वे मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (एमआरए) के नवीनीकरण से जुड़ी विवाद की समस्या को सुलझाएं, जिसने इस सीजन में इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) को प्रभावित किया है। न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने एआईएफएफ और एफएसडीएल को निर्देश दिया कि वे इस मुद्दे पर बातचीत करें और 28 अगस्त तक इसका समाधान निकालें, जो अगली सुनवाई की तारीख है।