SC: यूपी गैंगस्टर्स एक्ट की वैधता को चुनौती, याचिका पर सुनवाई करेगा SC; TTZ में पेड़ों की गणना को लेकर तैयारी
कोर्ट ने यह शर्त भी रखी है कि मामले के लंबित रहने के दौरान वह कोई सार्वजनिक पद नहीं संभालेंगे और मामले के बारे में मीडिया में कोई बयान नहीं देंगे।कोर्ट ने यह शर्त भी रखी है कि मामले के लंबित रहने के दौरान वह कोई सार्वजनिक पद नहीं संभालेंगे और मामले के बारे में मीडिया में कोई बयान नहीं देंगे।
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की ओर से जांच की गई भर्ती अनियमितताओं के मामले में टीएमसी नेता कुंतल घोष को जमानत दे दी है। कोर्ट ने यह शर्त भी रखी है कि मामले के लंबित रहने के दौरान वह कोई सार्वजनिक पद नहीं संभालेंगे और मामले के बारे में मीडिया में कोई बयान नहीं देंगे।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि इस मामले में निकट भविष्य में सुनवाई पूरी होने की संभावना नहीं है। घोष पिछले 19 महीनों से हिरासत में हैं। घोष के वकील एमएस खान ने अपनी दलील के समर्थन में निचली अदालत के दो आदेश पेश किए कि निकट भविष्य में सुनवाई पूरी नहीं हो पाएगी, क्योंकि सीबीआई ने अब तक मामले में अंतिम आरोपपत्र दाखिल नहीं किया है।
इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने 20 नवंबर को स्कूल भर्ती घोटाले से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले में मुख्य आरोपियों में से एक घोष को सशर्त जमानत दे दी थी। घोष को ईडी ने 21 जनवरी, 2023 को धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया था । इसके बाद 20 फरवरी, 2023 को उन्हें सीबीआई ने पश्चिम बंगाल प्राथमिक विद्यालय भर्ती घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया था।
पनीरसेल्वम से जुड़ी याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) से निष्कासित नेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने पनीरसेल्वम और उनके परिवार के सात सदस्यों के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति का मामला बहाल करने के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति एस वी एन भट्टी की पीठ ने पनीरसेल्वम द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया।
इससे पहले हाईकोर्ट ने 29 अक्तूबर को एक अधीनस्थ अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें पनीरसेल्वम और उनके परिवार के सात सदस्यों के खिलाफ मामले में अभियोजन वापस लेने की अनुमति देने के साथ उन्हें आरोपमुक्त कर दिया गया था। कोर्ट ने तीन दिसंबर 2012 को पारित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/विशेष न्यायाधीश, शिवगंगा के आदेश को रद्द कर दिया था। जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश ने मुकदमे को बहाल करते हुए कहा था कि दो आरोपियों की इस बीच मौत हो गई है इसलिए उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी जाएगी।
मथुरा शाही ईदगाह परिसर विवाद से जुड़ी याचिका पर सुनवाई नौ दिसंबर को
मथुरा शाही ईदगाह परिसर विवाद से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नौ दिसंबर को होगी। कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से संबंधित हिंदू पक्ष के 18 मामलों की विचारणीयता को चुनौती देने वाली मस्जिद समिति की याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर खारिज किए जाने के खिलाफ दायर की गई याचिका पर नौ दिसंबर को सुनवाई करेगा। प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कहा कि वह नौ दिसंबर को दोपहर दो बजे याचिका पर विस्तृत सुनवाई करेगी। हमें यह तय करना है कि कानूनी स्थिति क्या है। प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि हाईकोर्ट की एकल न्यायाधीश पीठ के एक अगस्त के आदेश के खिलाफ अंतर-न्यायालयीय अपील की जा सकती है।
चंद्रबाबू नायडू की जमानत के खिलाफ याचिका पर सुनवाई स्थगित
सुप्रीम कोर्ट ने कौशल विकास निगम घोटाला मामले में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू को जमानत देने के आदेश के खिलाफ दायर आंध्र प्रदेश सरकार की याचिका पर सुनवाई शुक्रवार को जनवरी, 2025 तक के लिए स्थगित कर दी। राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति एस सी शर्मा की पीठ से सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया जिसके बाद इसे स्थगित कर दिया गया। पीठ ने कहा कि इस मामले को समय-समय पर स्थगित करने का कोई मतलब नहीं है। आखिरी बार सुनवाई स्थगित करते हुए इसे जनवरी के दूसरे सप्ताह के लिए निर्धारित किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह को उनके पैतृक इलाहाबाद हाई कोर्ट में वापस भेजने की सिफारिश की है। भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 और 29 नवंबर को हुई अपनी बैठकों में यह निर्णय लिया।
सुप्रीम कोर्ट के प्रस्ताव में कहा गया है, 'सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 और 29 नवंबर, 2024 को हुई अपनी बैठकों में दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह को उनके पैतृक हाई कोर्ट यानी इलाहाबाद हाई कोर्ट में वापस भेजने की सिफारिश की है। न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह ने 1993 में दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और 20 जुलाई, 1994 को अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुए।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में 'एडवोकेट-ऑन रिकॉर्ड' के रूप में अभ्यास किया और 6 सितंबर, 2019 को स्थायी न्यायाधीश बनाए जाने से पहले 22 सितंबर, 2017 को उन्हें अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। उन्हें 11 अक्तूबर, 2021 को दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में पेड़ों की गणना की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि वह वृक्ष अधिकारी की तरफ से किए जाने वाले काम की निगरानी के लिए एक प्राधिकरण बनाना चाहता है। जस्टिस अभय एस ओका और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 के प्रावधानों के सख्त क्रियान्वयन के मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
पीठ ने कहा, पेड़ों की गणना के अलावा, जो आदेश हम पारित करने जा रहे हैं, हम एक प्राधिकरण भी बनाना चाहते हैं। वह प्राधिकरण यह सत्यापित करेगा कि वृक्ष अधिकारी ने उचित काम किया है या नहीं। किसी को दी गई अनुमति की निगरानी करनी होगी। 1994 के अधिनियम के प्रावधान, जो दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वृक्षों के संरक्षण का प्रावधान करते हैं, वृक्ष प्राधिकरण की स्थापना और कर्तव्यों तथा वृक्ष अधिकारी की नियुक्ति से संबंधित हैं। पीठ दिल्ली सरकार को सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति के बिना पेड़ों की कटाई की अनुमति देने से रोकने की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के दूरसंचार टैरिफ आदेशों को चुनौती देने वाली अपील को खारिज कर दिया और केरल हाईकोर्ट के फैसले की पुष्टि की कि ऐसे मामलों पर दूरसंचार न्यायाधिकरण टीडीसैट को विचार करना चाहिए। केरल हाईकोर्ट ने ट्राई की तरफ से जारी दूरसंचार (प्रसारण और केबल) सेवा इंटरकनेक्शन (एड्रेसेबल सिस्टम) विनियम, 2017 और दूरसंचार (प्रसारण और केबल) सेवा (आठवां) (एड्रेसेबल सिस्टम) टैरिफ आदेश, 2017 के कुछ प्रावधानों के खिलाफ भारतीय प्रसारण और डिजिटल फाउंडेशन (आईबीडीएफ) की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था।
हाई कोर्ट ने कहा था कि टैरिफ आदेशों की समीक्षा के लिए आईबीडीएफ को टीडीसैट (दूरसंचार विवाद निपटान अपीलीय न्यायाधिकरण) से संपर्क करना चाहिए था। न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा, नियमों के तहत टैरिफ आदेशों को टी.डी.एस.ए.टी. के समक्ष चुनौती दी जा सकती है। इसमें कहा गया है कि नियमों को चुनौती देने के लिए बाद में ट्राई अधिनियम की धारा 18 के तहत वैधानिक अपील के माध्यम से इस न्यायालय में अपील की जा सकती है।
आईबीडीएफ ने अपनी याचिका में बीएसएनएल बनाम ट्राई मामले में शीर्ष न्यायालय के 2014 के फैसले का हवाला दिया और कहा कि इसने ट्राई नियमों की समीक्षा करने के टी.डी.एस.ए.टी. के अधिकार को सीमित कर दिया है, जिससे अधिकार क्षेत्र के बारे में अस्पष्टता पैदा हो रही है। पीठ ने दलील को स्वीकार किया और स्पष्ट किया कि आईबीडीएफ टैरिफ संबंधी विवादों के लिए टी.डी.एस.ए.टी. से संपर्क कर सकता है और बाद में यदि आवश्यक हो तो वैधानिक उपाय अपना सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के निष्कर्षों को बरकरार रखा और हितधारकों को निर्देश दिया कि वे पहले टीडीसैट के विवाद का उपयोग करें।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई।
जस्टिस बी आर गवई और के वी विश्वनाथन की पीठ ने याचिका पर यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने कहा कि इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट को विचार करना चाहिए। वकील मनीष कुमार गुप्ता के माध्यम से दायर याचिका में संपत्ति की कुर्की और जुर्माने से संबंधित प्रावधानों सहित अधिनियम के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी गई है।
इसमें कहा गया है कि हालांकि दोनों याचिकाकर्ताओं पर 1986 अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था, लेकिन न तो आरोपपत्र दाखिल किया गया और न ही मुकदमा शुरू हुआ। याचिका में दावा किया गया है कि 1986 के अधिनियम के प्रावधानों का इस्तेमाल "बदला लेने, याचिकाकर्ताओं को परेशान करने और डराने-धमकाने के हथियार के रूप में किया जा रहा है, ताकि वे पारिवारिक विवादों को सुलझा सकें", जबकि कानून केवल गैंगस्टरों की गतिविधियों से संबंधित है।
इसमें कहा गया है, यूपी गैंगस्टर अधिनियम, 1986 के प्रावधान निवारक प्रकृति के हैं और उन्हें दंडात्मक के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। याचिका में लखनऊ में दर्ज एफआईआर को रद्द करने और याचिकाकर्ताओं पर अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) के 10,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पेड़ों की गणना करने और अवैध रूप से पेड़ों की कटाई पर नजर रखने के लिए एक तंत्र विकसित करने पर विचार किया। जस्टिस अभय एस ओका और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि टीटीजेड में पेड़ों की गणना के अलावा वह संस्थागत तंत्र विकसित करना चाहता है। पीठ ने कहा, हम एक संस्थागत तंत्र बनाना चाहते हैं जो पेड़ों की कटाई के लिए दी गई अनुमतियों पर गौर कर सके।
वहीं केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भट्टी ने कहा कि भारतीय वन सर्वेक्षण, जिसके पास इस तरह के सर्वेक्षण के लिए साधन हैं, जनगणना करने के लिए उपयुक्त प्राधिकारी हो सकता है।
इस पर पीठ ने कहा, टीटीजेड में पेड़ों की गणना की जानी है। लेकिन, हमें विभिन्न पक्षों को सुनने की जरूरत है। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को तय की, जब वह टीटीजेड में पेड़ों की गणना पर भी आदेश पारित करेगी। बता दें कि टीटीजेड उत्तर प्रदेश के आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस और एटा जिलों और राजस्थान के भरतपुर जिले में फैला हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद पर हिंदू पक्ष के 18 मामलों की विचारणीयता को चुनौती देने वाली मस्जिद समिति की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट से खारिज होने के खिलाफ दायर याचिका पर 9 दिसंबर को सुनवाई करेगा।