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Supreme Court: 11 साल तक जेल में रहने के बाद शीर्ष अदालत ने हत्या के दोषी को दी जमानत, हाईकोर्ट में अपील लंबित

Mon, 02 Oct 2023 05:37 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 02 Oct 2023 05:37 PM IST
सार

Supreme Court: न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने आदेश दिया कि दोषी दिनेश उर्फ पॉल डेनियल खाजेकर को बंबई उच्च न्यायालय द्वारा अपील का अंतिम निपटारा होने तक जमानत पर रिहा किया जाए।

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supreme court update: sentence suspends and grants bail to murder convict, pending appeal in HC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उच्चतम न्यायालय ने हत्या के एक दोषी की सजा निलंबित कर दी है और उसे जमानत दे दी है। निचली अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी और वह 11 साल से अधिक समय तक जेल में रहा था।

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न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने आदेश दिया कि दोषी दिनेश उर्फ पॉल डेनियल खाजेकर को बंबई उच्च न्यायालय द्वारा अपील का अंतिम निपटारा होने तक जमानत पर रिहा किया जाए।

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20 साल की उम्र में गिरफ्तार हुआ था दिनेश खाजेकर
दिनेश को 29 अक्टूबर, 2011 को उसके और अन्य के बीच हाथापाई में एक व्यक्ति की मौत के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। तब वह बीस साल का था। उनके वकील के मुताबिक वह इस समय 32 साल का है और उसकी अपील पिछले छह साल से उच्च न्यायालय में लंबित है।

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उच्च न्यायालय ने सजा निलंबित करने से किया था इनकार
बंबई उच्च न्यायालय ने सात फरवरी के अपने आदेश में उसकी सजा निलंबित करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उसने शीर्ष अदालत का रुख किया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा- जमानत पर रिहा किया जाए
शीर्ष अदालत ने 25 सितंबर के अपने आदेश में कहा, उच्च न्यायालय को अपीलकर्ता को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा  389 के तहत राहत देनी चाहिए थी। इसलिए, अपीलकर्ता (दिनेश) को उच्च न्यायालय के समक्ष अपील का अंतिम निपटारा होने तक जमानत पर रिहा किया जाए।

सीरआरपीसी की धारा 389 में क्या है?
सीआरपीसी की धारा 389 अदालत को अपील की सुनवाई लंबित रहने तक आरोपी की सजा को निलंबित करने की अनुमति देती है और उसे जमानत पर रिहा कर सकती है।

औपचारिकता पूरी करने के लिए निचली अदालत में पेश होगा आरोपी
शीर्ष अदालत ने खाजेकर को जमानत की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए निचली अदालत में पेश करने का निर्देश दिया और कहा कि उसे उचित नियमों और शर्तों पर जमानत दी जाएगी। 

उच्च न्यायालय में छह साल से लंबित है दिनेश की अपील
दिनेश की ओर से पेश वकील सना रईस खान ने कहा कि अपीलकर्ता, जिसे कथित अपराध के लिए निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, 11 साल से जेल में है और उसकी अपील पिछले छह साल से उच्च न्यायालय में लंबित है।

उन्होंने दलील दी कि मामले में तीन चश्मदीद गवाह हैं और किसी स्वतंत्र गवाह से पूछताछ नहीं की गई, अपराध कथित तौर पर सार्वजनिक स्थान पर हुआ था।

खान ने कहा कि दो चश्मदीदगवाहों ने अपनी जिरह में कहा है कि जब वे घटनास्थल पर पहुंचे तो उन्होंने मृतक को खून से लथपथ देखा, जो इस तथ्य को स्थापित करता है कि उन्होंने घटना नहीं देखी थी।

किसने दर्ज कराई थी दिनेश के खिलाफ प्राथमिकी
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, तुषार मोरे की शिकायत पर 29 अक्टूबर, 2011 को एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी कि पुणे में गणेश लॉटरी सेंटर में काम करने वाले उनके भाई तन्मय मोरे की दिनेश और अन्य के साथ हाथापाई में कथित तौर पर हत्या कर दी गई।

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