SC Update: छावला गैंगरेप मामले में शीर्ष अदालत के फैसले की समीक्षा की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने की यह टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और जे बी पारदीवाला की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान वकीलों ने कहा कि समीक्षा याचिका पर सुनवाई के लिए आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामला है जिसने जनता के विश्वास को हिला दिया है। इसे तत्काल सूचीबद्ध करने की आवश्यकता है।
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छावला रेप-मर्डर केस में तीन आरोपियों को बरी करने के फैसले की समीक्षा की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह 19 वर्षीय एक लड़की से सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में मौत की सजा पाए तीन दोषियों को बरी करने के सात नवंबर के फैसले पर पुनर्विचार की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए विचार करेगी।
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और जे बी पारदीवाला की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान वकीलों ने कहा कि समीक्षा याचिका पर सुनवाई के लिए आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामला है जिसने जनता के विश्वास को हिला दिया है। इसे तत्काल सूचीबद्ध करने की आवश्यकता है।
बता दें कि शीर्ष अदालत ने सात नवंबर को तीनों दोषियों को बरी करते हुए कहा था कि कानून अदालतों को किसी आरोपी को नैतिक दोषसिद्धि या केवल संदेह के आधार पर दंडित करने की अनुमति नहीं देता है। शीर्ष अदालत के फैसले की समीक्षा के लिए हाल ही में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। किशोरी के पिता ने भी वकील रोहित डंडरियाल के माध्यम से शीर्ष अदालत का रुख कर दोषियों को आरोपों से बरी करने के फैसले की समीक्षा की मांग की है।
छावला इलाके में साल 2012 में घटना को अंजाम दिया गया था जिसने हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थी। तीन युवकों ने इलाके की रहने वाली 19 साल की युवती को कार से अगवा कर लिया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद उसकी आंखों में तेजाब डालकर मार डाला। घटना 14 फरवरी 2012 की है।
जी एन साईबाबा की रिहाई के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर जनवरी में सुनवाई करेगा शीर्ष कोर्ट
माओवादी लिंक मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जी एन साईबाबा को रिहा करने के बंबई उच्चतम न्यायालय के आदेश के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की है। इस याचिका पर 17 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा।
इस मामले में न्यायमूर्ति एम.आर. शाह और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने पक्षकारों को दलीलें पूरी करने का निर्देश दिया है। पीठ ने कहा कि अगर कोई विरोध है तो उसे 10 दिन की अवधि के अंदर दर्ज कराना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर को माओवादी लिंक मामले में साईबाबा और अन्य को बरी करने के बंबई उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी थी। साईबाबा की 2014 में गिरफ्तारी के बाद उच्च न्यायालय ने इसी साल 14 अक्टूबर को साईबाबा व अन्य को जेल से रिहा करने का आदेश दिया था।
‘जल्लीकट्टू’ मामले में फैसला सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट ने सांडों को वश में करने वाले खेल 'जल्लीकट्टू' और बैलगाड़ी दौड़ की अनुमति देने वाले तमिलनाडु तथा महाराष्ट्र के कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया। ‘जल्लीकट्टू’ को ‘एरुथाझुवुथल’ के रूप में भी जाना जाता है। सांडों को वश में करने वाला यह खेल तमिलनाडु में पोंगल फसल उत्सव अवसर पर खेला जाता है। पांच न्यायाधीशों-न्यायमूर्ति के एम जोसेफ, न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस, न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की संविधान पीठ ने तमिलनाडु की ओर से पेश मुकुल रोहतगी सहित वरिष्ठ अधिवक्ताओं और हस्तक्षेपकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले कई अन्य वकीलों की दलीलें सुनीं। पीठ ने सभी पक्षों से एक सप्ताह के भीतर लिखित अभिवेदन का सामूहिक संकलन दाखिल करने के लिए कहा। शीर्ष अदालत ने पहले कहा था कि पशु क्रूरता रोकथाम (तमिलनाडु संशोधन) अधिनियम, 2017 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एक बड़ी पीठ द्वारा निर्णय लिए जाने की आवश्यकता है क्योंकि इनमें संविधान की व्याख्या से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल हैं।