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SC Update: शीर्ष कोर्ट का आरक्षण के खिलाफ जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार, पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें

Tue, 13 Dec 2022 09:32 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 13 Dec 2022 09:32 PM IST
सार

शीर्ष अदालत ने 18 नवंबर को आदेश दिया था कि नवलखा को 24 घंटे के भीतर जेल से निकालकर हाउस अरेस्ट किया जाए। अदालत ने नवलखा को अपनी पार्टनर सहबा हुसैन के साथ रहने की इजाजत दे दी थी।

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Supreme Court Update Elgar Parishad-Maoist links case SC extends house arrest of Gautam Navlakha
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

एल्गार परिषद-माओवादी लिंक मामले में आरोपी गौतम नवलखा के हाउस अरेस्ट की अवधि को बढ़ा दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गौतम नवलखा की हाउस अरेस्ट की अवधि बढ़ाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए जनवरी के दूसरे सप्ताह तक उनकी नजरबंदी की अवधि बढ़ा दी । न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता की नजरबंदी की अवधि बढ़ाने का आदेश पारित किया।

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गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने 18 नवंबर को आदेश दिया था कि नवलखा को 24 घंटे के भीतर जेल से निकालकर हाउस अरेस्ट किया जाए। अदालत ने नवलखा को अपनी पार्टनर सहबा हुसैन के साथ रहने की इजाजत दे दी थी। साथ ही कुछ शर्ते भी लगाईं थी। इन शर्तों के मुताबिक, नवलखा को पुलिस अधिकारियों की ओर से मोबाइल फोन उपलब्ध कराया गया था, जिससे वह रोजाना पांच मिनट अपने परिवार से बात कर सकें। वहीं, पुलिस अधिकारियों को फोन कॉल की निगरानी करने और रिकॉर्ड रखने का अधिकार दिया गया था। इसके साथ ही जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने आदेश दिया था कि खर्च का ड्राफ्ट पुलिस कमिश्नर के ऑफिस में जमा कराया जाए। 
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इन शर्तों का भी करना था पालन
बता दें कि गौतम नवलखा नवी मुंबई में एक महीने के लिए नजरबंद रखने का आदेश अदालत ने 18 नवंबर को दिया था। अदालत नवलखा के मुंबई में रहने के लिए कई शर्तें लगाई थी, जिनमें सुरक्षा के लिए 2.4 लाख रुपये जमा करने, कमरों के बाहर और आवास के प्रवेश एवं निकास द्वार पर सीसीटीवी कैमरे लगाना शामिल था। साथ ही अदालत ने यह भी कहा था कि इस दौरान वह किसी भी तरह के संचार उपकरण यानी लैपटॉप, मोबाइल, कंप्यूटर आदि का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा वह न तो मीडिया से बात करेंगे और न ही मामले से जुड़े लोगों और गवाहों से बातचीत करेंगे। 
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इस मामले में हैं गिरफ्तार
दरअसल, यह मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से जुडा है। इस कार्यक्रम के अगले दिन पश्चिमी महाराष्ट्र शहर के बाहरी इलाके कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क गई थी। इसी मामले में सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा भी आरोपी हैं। 

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

सीजेआई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में छह सदस्यीय कॉलेजियम की हुई बैठक 
बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जज दीपांकर दत्ता द्वारा सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर सोमवार को शपथ लेने के बाद सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में छह सदस्यीय कॉलेजियम ने मंगलवार को पहली बार बैठक की। बैठक के दौरान, कॉलेजियम ने तीन हाई कोर्ट में स्थायी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की। 

सूत्रों ने कहा कि शीर्ष अदालत परिसर में करीब दो घंटे तक चली कॉलेजियम की बैठक में कई नामों पर विचार-विमर्श किया गया। उच्च न्यायालयों के लिए न्यायाधीशों के नाम तय करने वाले शीर्ष तीन न्यायाधीशों वाले कॉलेजियम ने केंद्र को झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति संजय मिश्रा के नाम की सिफारिश की है। वहीं, कॉलेजियम ने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति एन कोटेश्वर सिंह और बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस के विनोद चंद्रन को गुवाहाटी हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश का प्रस्ताव दिया है।

गौरतलब है कि सोमवार को न्यायमूर्ति दत्ता के शपथ ग्रहण के साथ ही शीर्ष अदालत में छह रिक्तियों को छोड़कर न्यायाधीशों की कुल संख्या 28 हो गई है। हालांकि वर्तमान में 28 न्यायाधीशों में से नौ 2023 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। अगले साल जनवरी की शुरुआत में न्यायमूर्ति नजीर की सेवानिवृत्ति के साथ न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी छह सदस्यीय कॉलेजियम का हिस्सा बन जाएंगे।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

 असम नागरिकता कानून के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को दिया अपने अपने मुद्दे तय करने का निर्देश
 सुप्रीम कोर्ट ने असम नागरिकता कानून के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर मंगलवार को सभी वकीलों से उनके अपने अपने मुद्दों जिन पर वे पैरवी करेंगे तय करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत अब 10 जनवरी को इस मामले में सुनवाई करेगी। इन याचिकाओं में असम में अवैध अप्रवासियों से जुड़े नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए की सांविधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। 

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की पांच सदस्यीय पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि इन याचिकाओं को अलग अलग श्रेणीबद्ध करने की जरूरत है और हर मामले पर अलग अलग सुनवाई होनी चाहिए। सिब्बल ने कहा, हम इसे हल कर लेंगे कि मामलों को कैसे अलग किया जाए। हम सब साथ बैठकर इसका समाधान निकालेंगे। पीठ शीत कालीन छुट्टियों के बाद इसे सुनें। सिब्बल की दलील से सहमति जताते हुए पीठ ने सभी वकीलों को उनके पैरवी वाले मामलों को अलग करने का निर्देश दिया और सुनवाई के लिए मापदंड निर्धारित करने के संबंध में निर्देश जारी करने के लिए अगले साल 10 जनवरी की तारीख तय कर दी। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को इस मुद्दे पर दायर याचिका के पूरे सेट की स्कैन की हुई सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

 SC ने कोटा के खिलाफ जनहित याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
देश में आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से मंगलवार को इनकार कर दिया। सुनवाई से इनकार करते हुए मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने याचिका को कानून की ''प्रक्रिया का दुरुपयोग'' बताया। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता जो कि एलएलएम की छात्रा शिवानी पंवार है वह अपनी याचिका वापस ले। पीठ ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका वापस नहीं ली तो वह जुर्माना लगाएगी।

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