फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court Upates Delhi govt delay premature release prisoners; expressed displeasure over BJP MP statement

सुप्रीम कोर्ट: कैदियों की समयपूर्व रिहाई में देरी पर दिल्ली सरकार को फटकार; BJP नेता के बयान पर जताई नाराजगी

Mon, 21 Apr 2025 09:21 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 21 Apr 2025 09:21 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कैदियों की समय पूर्व रिहाई में देरी को लेकर दिल्ली सरकार को फटकार लगाई। वहीं, भाजपा सांसद की सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना पर टिप्पणी को लेकर शीर्ष कोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने अवमानना के एक मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि कोई भी अधिकारी खुद को कानून से ऊपर न समझे। पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की दिनभर की खबरें-

विज्ञापन
Supreme Court Upates Delhi govt delay premature release prisoners; expressed displeasure over BJP MP statement
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कैदियों की समय से पहले रिहाई में देरी को लेकर दिल्ली सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने इसे 'खेदजनक स्थिति' बताया। जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने दिल्ली सरकार के अलावा सजा पुररावलोकर बोर्ड (एसआरबी) को भी फटकार लगाई, जिसने समय से पहले रिहाई के आवेदनों को खारिज कर दिया था। 

विज्ञापन

 
पीठ ने कहा, दिल्ली सरकार जिस तरीके से समय से पहले रिहाई के मामलों को संभाल रही है, वह बेहद चिंताजनक है। इस पर बहुत कुछ कहा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार ने पहले आश्वासन दिया था कि वह इस मुद्दे पर कदम उठाएगी, लेकिन अब तक कुछ नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच की जरूरत है। 
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट पहले भी दिल्ली सरकार को फटकार चुका है। 114 सजायाफ्ता कैदियों की दया याचिकाएंलंबित थीं, जिनमें एक जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी भी शामिल था, जिसे देश के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में उम्रकैद की सजा मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की यह कहकर आलोचना की थी कि जो कैदी 14 साल से ज्यादा जेल में रह चुके हैं, उनकी याचिकाएं सोच-विचार किए बिना मशीनी तरीके से खारिज की जा रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


शीर्ष कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि दिल्ली सरकार कैदियों की समयपूर्व रिहाई के मामलों को ठीक से नहीं संभाल रही है। कोर्ट अब चाहता है कि इस पर गंभीरता से और न्यायसंगत तरीके से कार्रवाई की जाए।

Trending Videos

सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा सांसद की टिप्पणी पर जताई नाराजगी 
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि हमें संविधानिक संस्थाओं की गरिमा और प्रतिष्ठा बनाए रखनी चाहिए, खासकर जब आरोप लगाए जा रहे हों। यह टिप्पणी तब की गई, जब कोर्ट को बताया गया कि एक सांसद ने चीफ जस्टिस (सीजेआई) के खिलाफ विवादित बयान दिए हैं।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने ये टिप्पणी उस समय की जब वकील विशाल तिवारी ने संशोधित वक्फ कानून के बाद बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा को लेकर दायर अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। तिवारी ने झारखंड से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था, अगर सुप्रीम कोर्ट ही कानून बनाएगा, तो संसद और विधानसभाओं को बंद कर देना चाहिए। साथ ही उन्होंने सीजेआई संजीव खन्ना को देश में गृह युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराया।

शीर्ष कोर्ट ने कहा, जब भी आरोप लगाए जाएं, तो एक सम्मानजनक भाषा और संस्थान की गरिमा बनाए रखी जानी चाहिए। अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिकाओं में भी भाषा सम्मानजनक होनी चाहिए। कोर्ट ने तिवारी को याचिका में बदलाव करने की अनुमति दी और कहा, आप अदालत के सामने कुछ ठोस तथ्य रखें।

सरकारी अधिकारी स्वयं को कानून से ऊपर न समझे: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अदालत के आदेश की अवमानना के एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि सरकारी अधिकारी स्वयं को 'कानून से ऊपर' न समझे। शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश की कथित रूप से अवहेलना करने के मामले में एक अधिकारी को फटकार लगाते हुए यह बात कही।

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच अधिकारी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो अब डिप्टी कलेक्टर हैं। उन्होंने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें उनकी अवमानना की अपील खारिज कर दी गई। खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया, जिसमें अधिकारी को अदालत के आदेश की 'जानबूझकर और पूरी तरह से अवज्ञा' करने के लिए दो महीने के कारावास की सजा सुनाई गई थी।

एकल न्यायाधीश का आदेश उन याचिकाओं पर आया था, जिनमें आरोप लगाया गया था कि अधिकारी (उस समय तहसीलदार) ने 11 दिसंबर] 2013 के निर्देश के बावजूद जनवरी 2014 में गुंटूर जिले में जबरन झोपड़ियां हटा दीं।
 

पश्चिम बंगाल स्कूल शिक्षा विभाग के खिलाफ अवमानना याचिका पर कल सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नौकरी गंवाने वाले 26 हजार शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारी की ओएमआर शीट अपलोड नहीं करने पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को गहरी नाराजगी जताई। जस्टिस देबांगसु बसाक और जस्टिस मोहम्मद शब्बार राशिदी की पीठ ने कहा कि ओएमआर शीट अपलोड नहीं करने पर वह पश्चिम बंगाल स्कूल शिक्षा विभाग के खिलाफ अवमानना याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बंगाल स्कूल शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले और फिर उसके संशोधित फैसले का उल्लंघन किया है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि तीन हार्ड डिस्क में उपलब्ध ओएमआर शीट को पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) की वेबसाइट पर तुरंत अपलोड नहीं किया गया है और जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया है।

सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना एससीओ बैठक में भाग लेने के हांग्जोऊ पहुंचे
सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना 20वीं शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के मुख्य जजों की बैठक में भाग लेने के लिए सोमवार को हांग्जोऊ पहुंचे। सीजेआई खन्ना का स्वागत चीन के सुप्रीम पीपुल्स कोर्ट के कार्यकारी उप मुख्य न्यायाधीश डेंग शियमिंग और शंघाई में भारत के महावाणिज्य दूतावास के प्रतीक माथुर ने किया। बीजिंग ने घोषणा की थी कि इस वर्ष शिखर सम्मेलन शरद ऋतु में बंदरगाह शहर तियानजिन में आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने की उम्मीद है। एससीओ में 10 सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें चीन, रूस, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण में अवमानना याचिका पर राजस्थान से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के अधिकारियों से जैसलमेर में एक संपत्ति को अवैध तरीके से ध्वस्त करने के आरोप में अवमानना कार्यवाही की मांग वाली की याचिका पर जवाब मांगा है।

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ के समक्ष यह याचिका सुनवाई के लिए आई तो पीठ ने सुनवाई पर सहमति जताते हुए अधिकारियों को जवाब देने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि प्राधिकरण ने उसकी संपत्ति को अवैध रूप से ध्वस्त कर दिया, जो शीर्ष अदालत के 13 नवंबर, 2024 के फैसले की पूर्ण अवमानना है। शीर्ष अदालत ने बिना कारण बताओ नोटिस दिए संपत्तियों को ध्वस्त करने पर रोक लगा दी थी और पीड़ित पक्ष को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय देने का निर्देश दिया था। पीठ ने इस मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।

पूजा खेडकर को दो मई को दिल्ली पुलिस के सामने पेश होने का ‘सुप्रीम’ निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सेवा परीक्षा में धोखाधड़ी और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) तथा दिव्यांगता आरक्षण का गलत लाभ उठाने की आरोपी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की पूर्व प्रशिक्षु पूजा खेडकर को दो मई को दिल्ली पुलिस के सामने पेश होने का निर्देश दिया। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने यह भी कहा कि मामले की अगली सुनवाई की तारीख 21 मई तक खेडकर के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले में कोई ठोस जांच नहीं हुई है और दिल्ली पुलिस को तेजी से जांच पूरी करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि खेडकर से हिरासत में पूछताछ की जरूरत है। हालांकि पीठ ने उन्हें अंतरिम संरक्षण प्रदान किया।  पूजा  पर आरक्षण का लाभ हासिल करने के लिए 2022 संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी)  परीक्षा के लिए अपने आवेदन में गलत जानकारी देने का आरोप है। खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने प्रथमदृष्टया उनके खिलाफ एक मजबूत मामला पाया था और कहा था कि व्यवस्था में हेरफेर करने की बड़ी साजिश का पता लगाने के लिए जांच की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना पर दिव्यांगों का उपहास उड़ाने के आरोपों का लिया संज्ञान
 इंडियाज गॉट लैटेंट के प्रस्तोता समय रैना के लिए नई कानूनी मुसीबत खड़ी हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह उस याचिका की जांच करेगा जिसमें आरोप लगाया गया है कि रैना ने दिव्यांगों का उपहास किया है। रैना पर दृष्टिबाधित व्यक्ति व स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी (एसएमए) जैसे दुर्लभ विकार से पीड़ित व्यक्तियों का उपहास करने का आरोप लगाया गया है।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने पॉडकास्टर रणबीर अल्लाहबादिया मामले में सुनवाई करते हुए गैरसरकारी संगठन क्योर एसएमए फाउंडेशन ऑफ इंडिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह से कहा कि वह अल्लाहबादिया मामले में अंतरिम हस्तक्षेप याचिका के बदले उचित याचिका दायर करें। पीठ ने सिंह से कहा, यह एक गंभीर मुद्दा है। आप एक रिट याचिका दायर करें। हम देखेंगे कि क्या किया जा सकता है। एनजीओ ने दिव्यांगों के खिलाफ टिप्पणी मामले में मौजूदा कानूनी ढांचे में कमियों का हवाला दिया और पीठ से ऑनलाइन सामग्री पर दिशानिर्देश देने का आग्रह किया। अपराजिता सिंह ने कहा, दिव्यांगों, उनकी बीमारियों व उपचार विकल्पों के खिलाफ किसी भी अपमानजनक व कमतर आंकने वाली सामग्री को स्पष्ट रूप से और पर्याप्त रूप से विनियमित करने के लिए व्यापक दिशा-निर्देशों और नियामक उपायों की तत्काल जरूरत है। ऐसी सामग्री के निर्माता, प्रसारक, बिचौलिए, स्वयंभू प्रभावशाली व्यक्ति आदि के खिलाफ कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश बनाए जाएं।  

रणबीर अल्लाहबादिया के पासपोर्ट वापसी की याचिका पर 28 को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट पॉडकॉस्टर रणबीर अल्लाहबादिया के पासपोर्ट वापसी की मांग पर 28 अप्रैल को सुनवाई करेगा। इंडिया गॉट लैटेंट शो के दौरान रणबीर की ओर से की गई टिप्पणी मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने उन बयानों पर ध्यान दिया कि अल्लाहबादिया के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी को अल्लाहबादिया को उनकी टिप्पणियों पर दर्ज कई एफआईआर में गिरफ्तारी से संरक्षण दिया और उन्हें ठाणे के नोडल साइबर पुलिस थाने के जांच अधिकारी के पास अपना पासपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया था।

अपराजिता ने कहा, चैनलों पर उच्चतम स्तर की संवेदनशीलता और करुणा बनाए रखने की आवश्यकता है। हालांकि, जब कॉमेडियन समय रैना जैसे कुछ व्यक्ति कॉमेडी शो की मेजबानी करते हैं और ऐसी स्थिति वाले लोगों, महंगी दवाओं और उपचार विकल्पों पर असंवेदनशील टिप्पणी करते हैं तो यह एक बहुत मुश्किल काम हो जाता है। रैना की टिप्पणियों से जनता की मानसिकता पर इतनी गंभीर बीमारियों को लेकर खराब असर पड़ता है और संवेदनशीलता में कमी आती है।

बार काउंसिल से हटने पर मुस्लिम सदस्य वक्फ बोर्ड के लिए अयोग्य
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि राज्य बार काउंसिल का कोई मुस्लिम सदस्य निकाय में पद पर नहीं रह जाता है तो वह राज्य वक्फ बोर्ड में सेवा करने के लिए पात्र नहीं रह जाता। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ इस सवाल पर विचार कर रही थी कि क्या कोई व्यक्ति जो बार काउंसिल का मुस्लिम सदस्य नहीं रह जाता है, वह वक्फ बोर्ड का सदस्य बना रह सकता है। मणिपुर हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले को खारिज करते हुए पीठ ने कहा, बोर्ड का सदस्य बनने के लिए दो शर्तें हैं: (1) उम्मीदवार मुस्लिम समुदाय से होना चाहिए; और (2) संसद, राज्य विधानसभा या बार काउंसिल के सदस्य के रूप में सक्रिय पद पर होना चाहिए।

आरोपी की गिरफ्तारी के आधार को लेकर संतुलन बनाना बहुत जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य मशीनरी से उसकी शक्तियों का दुरुपयोग न करने और अभियुक्तों की ओर से उसके अवलोकन का लाभ उठाकर मुक्त न होने के बीच संतुलन बनाने का आह्वान किया। जस्टिस बीआर गवई व जस्टिस एजी मसीह की पीठ इस सवाल पर विचार कर रही थी कि क्या हर मामले में, तत्कालीन भारतीय दंड संहिता के तहत अपराधों से उत्पन्न मामले भी शामिल हैं, गिरफ्तारी से पहले या गिरफ्तारी के तुरंत बाद अभियुक्त को गिरफ्तारी के आधार बताना जरूरी होगा। जस्टिस गवई ने कहा, हम संतुलन बनाना चाहते हैं। एक ओर, हम नहीं चाहते कि मशीनरी अपनी शक्ति का दुरुपयोग करे। दूसरी ओर, हम यह भी नहीं चाहते कि अभियुक्त हमारे अवलोकन का लाभ उठाकर मुक्त हो जाए।

आपने अदालत का माहौल खराब किया...सुप्रीम कोर्ट ने वकील पर लगाया 5 लाख रुपये जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका में मांगी गई राहत की प्रकृति से नाराजगी जताते हुए वकील पर याचिकाकर्ता के रूप में याचिका दायर करने के लिए 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। शीर्ष अदालत ने कहा कि उन्होंने अदालत का माहौल खराब किया। जस्टिस विक्रम नाथ व जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने वकील संदीप तोदी को चार हफ्ते के भीतर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के खातों में राशि जमा करने को कहा और यह पता लगाने के लिए याचिका को छह सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया कि पैसा जमा किया गया या नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed