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SC: बिलकिस बानो की वकील ने किया दावा, दोषी मुस्लिमों का शिकार करने और उन्हें मारने की मंशा से थे प्रेरित

Mon, 07 Aug 2023 07:31 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 07 Aug 2023 07:31 PM IST
सार

बिलकिस बानो की वकील शोभा गुप्ता ने जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुइयां की पीठ को बताया कि वह गुहार लगाती रही कि वह उनकी बहन की तरह है क्योंकि वह उन सभी को जानती थी। वे आसपास के इलाके से थे...यह अचानक हुई घटना नहीं थी। दोषी मुसलमानों को शिकार बनाने और उन्हें मारने के लिए 'खून के प्यासे' की भावना से बिलकिस का पीछा कर रहे थे।

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Supreme Court told Bilkis Bano case convicts driven by blood thirsty approach to hunt and kill Muslims
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट को सोमवार को बताया गया कि बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले और 2002 के गुजरात दंगों के दौरान उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के दोषियों ने मुसलमानों को शिकार बनाने और उन्हें मारने की मंशा के साथ उनका पीछा किया था। सभी 11 दोषियों को पिछले साल दी गई सजा में छूट को चुनौती देने वाली याचिका पर बहस शुरू करते हुए बिलकिस बानो की ओर से पेश वकील शोभा गुप्ता ने कहा कि जब वह गर्भवती थीं तो उनके साथ क्रूरतापूर्वक सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और उनके पहले बच्चे को पत्थर से कुचलकर मार डाला गया था।

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शोभा गुप्ता ने जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुइयां की पीठ को बताया कि वह गुहार लगाती रही कि वह उनकी बहन की तरह है क्योंकि वह उन सभी को जानती थी। वे आसपास के इलाके से थे...यह अचानक हुई घटना नहीं थी। दोषी मुसलमानों को शिकार बनाने और उन्हें मारने के लिए 'खून के प्यासे' की भावना से बिलकिस का पीछा कर रहे थे। उन्होंने नारे लगाए थे- ये मुसलमान हैं, इन्हें मार डालो। उच्च न्यायालय ने इस बात पर ध्यान दिया था कि उनके द्वारा किया गया अपराध दुर्लभ, असामान्य और सांप्रदायिक घृणा से प्रेरित था
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वकील ने अदालत को बताया कि दोषियों को सजा में छूट के बाद 15 अगस्त, 2022 को रिहा कर दिया गया था और बिलकिस को इसके बारे में तब पता चला जब जेल के बाहर उनके आते ही जश्न मनाया गया।दोषियों को दी गई छूट का विरोध करते हुए गुप्ता ने कहा कि सीबीआई ने दोषियों की समय से पहले रिहाई का विरोध करते हुए कहा था कि इससे बड़े पैमाने पर समाज में गलत संदेश जाएगा क्योंकि अपराध इस तरह का है कि इसे माफ नहीं किया जा सकता है।
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सुनवाई मंगलवार को फिर शुरू होगी। शीर्ष अदालत ने मामले में सभी 11 दोषियों को पिछले साल दी गई सजा में छूट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू करने के लिए सात अगस्त की तारीख तय की थी। शीर्ष अदालत ने नौ मई को उन दोषियों के खिलाफ गुजराती और अंग्रेजी सहित स्थानीय समाचार पत्रों में नोटिस प्रकाशित करने का निर्देश दिया था, जिन्हें नोटिस नहीं दिया जा सका था। इससे पहले अदालत ने दो मई को सुनवाई तब टाल दी थी जब दोषियों के कुछ वकीलों ने उन्हें दी गई छूट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर नोटिस नहीं दिए जाने पर आपत्ति जताई थी।

केंद्र और गुजरात सरकार ने अदालत को बताया था कि वे अदालत के 27 मार्च के आदेश की समीक्षा के लिए कोई याचिका दायर नहीं कर रहे हैं, जिसमें दोषियों को दी गई छूट के संबंध में मूल रिकॉर्ड पेश करने को कहा गया है। गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो की याचिका के अलावा इस मामले में दायर अन्य याचिकाओं के संबंध में प्रारंभिक आपत्तियां उठाई थीं और कहा था कि इसके व्यापक प्रभाव होंगे क्योंकि समय-समय पर तीसरे पक्ष आपराधिक मामलों में अदालतों का दरवाजा खटखटाएंगे।

शीर्ष अदालत ने 18 अप्रैल को 11 दोषियों को दी गई छूट पर गुजरात सरकार से सवाल किया था और कहा था कि नरमी दिखाने से पहले अपराध की गंभीरता पर विचार किया जाना चाहिए था और आश्चर्य जताया था कि क्या इसमें दिमाग का कोई इस्तेमाल किया गया था। शीर्ष अदालत ने दोषियों की समय से पहले रिहाई का कारण पूछते हुए जेल में बंद रहने के दौरान उन्हें बार-बार दी जाने वाली पैरोल पर भी सवाल उठाया था। इसमें कहा गया था, यह (छूट) एक तरह की कृपा है, जो अपराध के अनुपात में होनी चाहिए।

बिलकिस बानो के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या को "भयानक" कृत्य करार देते हुए शीर्ष अदालत ने 27 मार्च को गुजरात सरकार से पूछा था कि क्या दोषियों को सजा में छूट देते समय अन्य हत्या के मामलों की तरह समान मानक लागू किए गए थे। बिलकिस बानो की याचिका के अलावा, सीपीआई (एम) नेता सुभाषिनी अली, स्वतंत्र पत्रकार रेवती लौल, लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति रूप रेखा वर्मा सहित कई अन्य जनहित याचिकाओं ने छूट को चुनौती दी है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने भी छूट के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है।


बता दें कि जब गोधरा ट्रेन जलाने की घटना के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगों के डर से भागते समय उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था तब बिलकिस बानो 21 साल की थीं और पांच महीने की गर्भवती थीं।उनकी तीन साल की बेटी दंगों में मारे गए परिवार के सात सदस्यों में से एक थी।

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