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SC Updates: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में दिल्ली के वकील के खिलाफ हरियाणा एसटीएफ की जांच पर लगाई रोक
Thu, 20 Nov 2025 08:21 PM IST
देवेश त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Thu, 20 Nov 2025 08:21 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट में आज के बड़े फैसले
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली के एक वकील के खिलाफ हरियाणा पुलिस स्पेशल टास्क फोर्स की जांच पर रोक लगा दी। वकील को हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस प्रसन्ना बी वराले और के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले में वकील विक्रम सिंह को 12 नवंबर को दी गई अंतरिम जमानत की भी पुष्टि कर दी।
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अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह की दलीलों पर ध्यान दिया और कहा कि वकील के मामले में जांच आगे नहीं बढ़ेगी। सिंह ने कहा पहले सीबीआई से स्थिति रिपोर्ट मंगाई जाए। उसके बाद, अगर पीठ उचित समझे तो डिस्चार्ज करने पर विचार किया जाए। इस मामले में अभियोजन पक्ष का व्यवहार गलत है। हालांकि, पीठ ने मामले की पूरी जांच पर रोक नहीं लगाई और कहा कि सीबीआई को जांच सौंपने की अर्जी पर बाद में विचार किया जाएगा।
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बुधवार को वरिष्ठ अधिवक्ता ने आरोप लगाया था कि वकील को हिरासत में यातना दी गई और सिर्फ उनके मुवक्किलों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया। विक्रम सिंह को 31 अक्तूबर को बिना किसी लिखित कारण या स्वतंत्र गवाह के गिरफ्तार किया गया था, जो संविधान के आर्टिकल 21 और 22 का उल्लंघन है। 1 नवंबर को फरीदाबाद की एक ट्रायल कोर्ट ने सिंह को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
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सूरत क्रिकेट प्रमुख 2.92 करोड़ रुपये की लोन धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार
गुजरात की सूरत पुलिस ने गुरुवार को जिला क्रिकेट एसोसिएशन (एसडीसीए) के अध्यक्ष को 2.92 करोड़ रुपये के गिरवी लोन धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया है। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एसडीसीए प्रमुख कनैयालाल कॉन्ट्रैक्टर (82) को उनके दिवंगत भाई की पत्नी की शिकायत पर गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार, कॉन्ट्रैक्टर ने अपनी भाभी नयनाबेन और उनके दिवंगत पति के फर्जी हस्ताक्षर करके साझेदारी फर्म पर नियंत्रण हासिल किया। आठवालाइन्स इलाके में फर्म की संपत्ति पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी का उपयोग कर लोन लिया गया था। आरोपी ने लोन की राशि अपने व्यक्तिगत खर्चों के लिए इस्तेमाल की और 67 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया। कॉन्ट्रैक्टर ने गुजरात हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मांगी थी, लेकिन राहत नहीं मिली।
गुजरात की सूरत पुलिस ने गुरुवार को जिला क्रिकेट एसोसिएशन (एसडीसीए) के अध्यक्ष को 2.92 करोड़ रुपये के गिरवी लोन धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया है। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एसडीसीए प्रमुख कनैयालाल कॉन्ट्रैक्टर (82) को उनके दिवंगत भाई की पत्नी की शिकायत पर गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार, कॉन्ट्रैक्टर ने अपनी भाभी नयनाबेन और उनके दिवंगत पति के फर्जी हस्ताक्षर करके साझेदारी फर्म पर नियंत्रण हासिल किया। आठवालाइन्स इलाके में फर्म की संपत्ति पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी का उपयोग कर लोन लिया गया था। आरोपी ने लोन की राशि अपने व्यक्तिगत खर्चों के लिए इस्तेमाल की और 67 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया। कॉन्ट्रैक्टर ने गुजरात हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मांगी थी, लेकिन राहत नहीं मिली।
अरावली क्षेत्र में सतत खनन की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को अरावली पहाड़ियों व पर्वतमालाओं के लिए सतत खनन के लिए प्रबंधन योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अरावली पहाड़ियों व पर्वतमालाओं में पारिस्थितिक रूप से नाजुक इलाके में किसी भी नई खनन गतिविधि की इजाजत देने से पहले व्यापक प्रबंधन योजना तैयार की जानी चाहिए। अरावली क्षेत्र दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैला हुआ है। मई, 2024 में अरावली में गैर-कानूनी खनन से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्यों ने अरावली क्षेत्र के लिए अलग-अलग परिभाषाएं अपनाई हैं। इसके बाद उसने इन मुद्दों को देखने के लिए एक कमेटी बनाई थी। कमेटी ने पिछले माह में एक रिपोर्ट पेश कर अरावली को सुरक्षित रखने के उपाय सुझाए हैं। इसमें कहा गया कि अरावली जिलों में किसी भी 100 मीटर या उससे ऊंची जमीन को अरावली पगड़ी कहा जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने समिति की उन सिफारिशों को मान लिया जो परिभाषाओं के साथ कोर या अनछुए क्षेत्र में खनन पर रोक लगाने के बारे में थीं। कोर्ट ने कहा, झारखंड के सिंहभूम में सारंडा और चाईबासा में इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च उपं एजुकेशन द्वारा किए गए अध्ययन की तरह ही अरावली क्षेत्र के लिए भी एक अध्ययन किया जाना चाहिए।
खनन गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के खिलाफ फैसला
पीठ का मानना था कि इस तरह की रोक से गैर-कानूनी खनन, माफिया और अपराधीकरण को बढ़ावा मिलता है। कोर्ट ने कहा कि हम अरावली में खनन के लिए सिफारिशों और गैर-कानूनी खनन रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को भी मानते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को अरावली पहाड़ियों व पर्वतमालाओं के लिए सतत खनन के लिए प्रबंधन योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अरावली पहाड़ियों व पर्वतमालाओं में पारिस्थितिक रूप से नाजुक इलाके में किसी भी नई खनन गतिविधि की इजाजत देने से पहले व्यापक प्रबंधन योजना तैयार की जानी चाहिए। अरावली क्षेत्र दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैला हुआ है। मई, 2024 में अरावली में गैर-कानूनी खनन से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्यों ने अरावली क्षेत्र के लिए अलग-अलग परिभाषाएं अपनाई हैं। इसके बाद उसने इन मुद्दों को देखने के लिए एक कमेटी बनाई थी। कमेटी ने पिछले माह में एक रिपोर्ट पेश कर अरावली को सुरक्षित रखने के उपाय सुझाए हैं। इसमें कहा गया कि अरावली जिलों में किसी भी 100 मीटर या उससे ऊंची जमीन को अरावली पगड़ी कहा जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने समिति की उन सिफारिशों को मान लिया जो परिभाषाओं के साथ कोर या अनछुए क्षेत्र में खनन पर रोक लगाने के बारे में थीं। कोर्ट ने कहा, झारखंड के सिंहभूम में सारंडा और चाईबासा में इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च उपं एजुकेशन द्वारा किए गए अध्ययन की तरह ही अरावली क्षेत्र के लिए भी एक अध्ययन किया जाना चाहिए।
खनन गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के खिलाफ फैसला
पीठ का मानना था कि इस तरह की रोक से गैर-कानूनी खनन, माफिया और अपराधीकरण को बढ़ावा मिलता है। कोर्ट ने कहा कि हम अरावली में खनन के लिए सिफारिशों और गैर-कानूनी खनन रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को भी मानते हैं।