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SC: सुप्रीम कोर्ट ने CBI को दिया यूपी की एमबीबीएस छात्रा की मौत मामले की जांच का निर्देश, 2017 का है मामला

Thu, 26 Jan 2023 10:26 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 26 Jan 2023 10:26 PM IST
सार

ये घटना 5 सितंबर, 2017 की है। छात्रा ने अपने छात्रावास के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। बाद में, उसके पिता ने 11 सितंबर, 2017 को उसी जिले के न्यायिक पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी।

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Supreme Court today news update in hindi court directs CBI probe to probe death of MBBS student in 2017 in UP
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में 2017 में उन्नीस साल के एमबीबीएस छात्रा की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने सीबीआई को इस मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। दरअसल, एमबीबीएस छात्रा ने अपने छात्रावास के कमरे में पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली थी।

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इस मामले में सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों की अलग-अलग रिपोर्ट्स को देखते हुए जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा कि जांच के बाद सीबीआई को अपनी रिपोर्ट एक उपयुक्त अदालत में रिपोर्ट दाखिल करना होगा। छात्रा की आत्महत्या मामले में दो जांच एजेंसियों ने रिपोर्ट दाखिल की है। एक चार्जशीट में दो व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। वहीं, दूसरी ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। 
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जानकारी के मुताबिक, ये घटना 5 सितंबर, 2017 की है। छात्रा ने अपने छात्रावास के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। बाद में, उसके पिता ने 11 सितंबर, 2017 को उसी जिले के न्यायिक पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस ने एक चार्जशीट फाइल की थी, जिसमें भारतीय दंड संहिता 1860 (आईपीसी) की धारा 306/201 के तहत अपराध करने के आरोप में दो व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया था।
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इसके बाद, मामले की जांच को राज्य पुलिस की एक अन्य जांच शाखा सीबीसीआईडी को सौंप दिया गया। CBCID ने दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 173(8) के तहत अंतिम रिपोर्ट/क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी। बाद में शीर्ष अदालत उस छात्र के पिता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस बीच, मजिस्ट्रेट द्वारा 30 अक्टूबर, 2018 को प्रस्तुत चार्जशीट के संबंध में संज्ञान लिया गया और मामला सत्र न्यायालय को सौंप दिया गया है।

Supreme Court today news update in hindi court directs CBI probe to probe death of MBBS student in 2017 in UP
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

SC ने 1985 के हत्याकांड के आरोपियों को दिया संदेह का लाभ
सुप्रीम कोर्ट ने 1985 के एक हत्या के मामले में पिछले 35 वर्षों से कार्यवाही का सामना कर रहे दो लोगों को संदेह का लाभ दिया है। शीर्ष अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनकी दोषसिद्धि की पुष्टि की गई है। 

न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने इस मामले में सुनवाई की। दरअसल, 1985 के हत्याकांड के आरोपियों को 29 जनवरी, 1986 के एक निचली अदालत ने और फिर 9 जुलाई, 2014 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आरोपी ठहराया था। इन दोनों अदालतों के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द करते हुए कहा कि अपीलकर्ताओं ने नारायण की हत्या की, यह कहा नहीं जा सकता और एक उचित संदेह से परे साबित नहीं किया जा सकता है, इसलिए वे संदेह के लाभ के हकदार थे और हैं। साथ ही अदालत ने यह भी कहा है कि अपीलकर्ता जो अपीलीय निर्णय और आदेश दिए जाने के बाद से सुधार गृह में बंद हैं, अगर किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत रिहा कर दिया जाएगा।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश द्वारा 29 जनवरी, 1986 को मुन्ना और शिव लाल को हत्या का दोषी ठहराया गया था, जिसकी पुष्टि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 9 जुलाई, 2014 को की थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दो लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

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