SC: सात और नौ न्यायाधीशों वाली पीठ को लेकर साझा आदेश देगा सुप्रीम कोर्ट, 20 साल से लंबित हैं कई केस
सीजेआई ने कहा कि इन मामलों में एक साझा आदेश देने का मकसद इन्हें सुनवाई के लिए तैयार करना है। इसलिए आदेश दिया जाएगा की दलीलों, दस्तावेजों और मिसालों को दायर किया जाए। इसके लिए सभी को तीन सप्ताह का समय दिया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह धन विधेयकों और विधायकों को अयोग्य ठहराने के विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार समेत सात से नौ न्यायाधीशों वाली पीठ के कई मामलों में एक साझा आदेश देगा, जिससे उन्हें सुनवाई के लिए तैयार किया जा सके। बता दें, प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात जजों की पीठ ने सात से नौ जजों वाली पीठ के चार मामलों पर विचार किया।
तीन सप्ताह का समय
सीजेआई ने कहा कि इन मामलों में एक साझा आदेश देने का मकसद इन्हें सुनवाई के लिए तैयार करना है। इसलिए आदेश दिया जाएगा की दलीलों, दस्तावेजों और मिसालों को दायर किया जाए। इसके लिए सभी को तीन सप्ताह का समय दिया जाएगा।
सात जजों की पीठ ने कहा, ‘हम हर मामले में नोडल वकील नियुक्त करेंगे, जो एक साझा संकलन तैयार करेगा। बता दें, पीठ में न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, संजीव खन्ना, बीआर गवई, सुर्या कांत, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं।
पीठ ने इन मामलों में पेश होने वाले वकीलों से नोडल वकील का नाम देने को कहा। इनमें से कुछ मामलों में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ से अनुरोध किया कि वह सुनवाई की तारीखों के बारे में पहले से बता दें ताकि वकील अपना केस तैयार कर सकें। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वह कैलेंडर देख कर बताएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वकील भी किसी मामले के लिए अनुमानित समय बता सकते हैं।
बता दें, इनमें से कई मामले 20 साल से लंबित हैं।
धन विधेयकों से संबंधित मामला उठा
धन विधेयकों से संबंधित मामला जब सुप्रीम कोर्ट में आया तो सिब्बल ने पीठ से इसे प्राथमिकता देने को कहा। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘हम अनुरोध करेंगे कि वरीयता के आधार पर निर्णय लिया जाए। यह पूरी तरह से न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर है।’ उन्होंने कहा कि प्राथमिकता राजनीतिक मजबूरियों के आधार पर तय नहीं की जा सकती। इस पर पीठ ने कहा कि यह हम पर छोड़ दीजिए।
क्या था अरुणाचल प्रदेश के नबाम रेबिया केस का फैसला?
नबाम रेबिया मामले में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 2016 में अरुणाचल प्रदेश के नबाम रेबिया के मामले पर फैसला दिया था कि यदि विधानसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए नोटिस सदन में पहले से लंबित हो, तो वह विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए दी गई अर्जी पर कार्यवाही नहीं कर सकता। दरअसल, 29 जून 2022 को महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट चरम पर पहुंच गया था, जब शीर्ष अदालत ने ठाकरे के नेतृत्व वाली 31 महीने पुरानी एमवीए सरकार का बहुमत परीक्षण कराने के राज्यपाल के निर्देश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना-भाजपा सरकार बनी थी। शीर्ष अदालत ने छह अक्तूबर को कहा था कि वह ऐसे मामले पर विचार करने के लिए सात न्यायाधीशों की पीठ का गठन करेगी।