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SC: वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध न मानने वाले कानून की वैधता की होगी जांच, जनवरी के दूसरे हफ्ते में सुनवाई
Wed, 14 Dec 2022 09:10 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 14 Dec 2022 09:10 AM IST
सार
वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने बेंच को बताया कि इस मामले में अलग-अलग याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट की ही अलग-अलग बेंच के पास लंबित हैं और इन्हें किसी एक बेंच द्वारा सुना जाना चाहिए।
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क्या है वैवाहिक दुष्कर्म?
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह वैवाहिक दुष्कर्म के मुद्दे पर दायर याचिकाओं पर जनवरी के दूसरे हफ्ते से सुनवाई शुरू करेगा। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि वह वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध न मानने वाली आईपीसी की धारा 375 की संवैधानिक वैधता को परखेगा।
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह निर्देश कोर्ट में एक ताजा रिट पिटीशन दायर होने के बाद जारी किए। वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने बेंच को बताया कि इस मामले में अलग-अलग याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट की ही अलग-अलग बेंच के पास लंबित हैं और इन्हें किसी एक बेंच द्वारा सुना जाना चाहिए।
गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट में वैवाहिक दुष्कर्म को लेकर दो जजों की बेंच ने विभाजित फैसला दिया था। इसे लेकर भी सुप्रीम कोर्ट के सामने एक याचिका दायर है। इसके अलावा कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक मामले में पत्नी के साथ रेप के दोषी व्यक्ति को सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ भी सर्वोच्च न्यायालय में कुछ याचिकाएं लंबित हैं।
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जहां दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर एडवोकेट करुणा नंदी पक्ष रख रही हैं, वहीं कर्नाटक हाईकोर्ट वाले फैसले पर इंदिरा जयसिंह वकील हैं। दोनों ही सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को मौजूद रहीं। इसके बाद ही बेंच ने मामले पर जनवरी के दूसरे हफ्ते में सुनवाई का आदेश दिया।
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चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह निर्देश कोर्ट में एक ताजा रिट पिटीशन दायर होने के बाद जारी किए। वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने बेंच को बताया कि इस मामले में अलग-अलग याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट की ही अलग-अलग बेंच के पास लंबित हैं और इन्हें किसी एक बेंच द्वारा सुना जाना चाहिए।
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गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट में वैवाहिक दुष्कर्म को लेकर दो जजों की बेंच ने विभाजित फैसला दिया था। इसे लेकर भी सुप्रीम कोर्ट के सामने एक याचिका दायर है। इसके अलावा कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक मामले में पत्नी के साथ रेप के दोषी व्यक्ति को सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ भी सर्वोच्च न्यायालय में कुछ याचिकाएं लंबित हैं।
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जहां दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर एडवोकेट करुणा नंदी पक्ष रख रही हैं, वहीं कर्नाटक हाईकोर्ट वाले फैसले पर इंदिरा जयसिंह वकील हैं। दोनों ही सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को मौजूद रहीं। इसके बाद ही बेंच ने मामले पर जनवरी के दूसरे हफ्ते में सुनवाई का आदेश दिया।