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Agusta Westland: क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की जमानत याचिका पर शीर्ष कोर्ट में सुनवाई टली, अब सात फरवरी को होगी

Thu, 02 Feb 2023 10:25 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 02 Feb 2023 10:25 PM IST
सार

3,600 करोड़ रुपये का यह कथित घोटाला अगस्ता वेस्टलैंड से 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की खरीद से संबंधित है। बीते साल मई में शीर्ष अदालत ने जेम्स की जमानत याचिकाओं पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब मांगा था। पढें सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें...

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Supreme Court to hear bail pleas of Christian Michel James on February 7 update news in hindi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में कथित बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की जमानत याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सात फरवरी को सुनवाई करेगा। इस घोटाले के संबंध में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने दो अलग-अलग मामले दर्ज किये हैं। 

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दरअसल, गुरुवार को यह मामला मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और जे बी पारदीवाला की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। जिसपर पीठ ने समय ना होने का हवाला देते हुए कहा कि याचिकाओं पर अगले मंगलवार को सुनवाई की जाएगी। गौरतलब है कि 3,600 करोड़ रुपये का यह कथित घोटाला अगस्ता वेस्टलैंड से 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की खरीद से संबंधित है।
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बीते साल मई में शीर्ष अदालत ने जेम्स की जमानत याचिकाओं पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब मांगा था। पिछली सुनवाई के दौरान, अभियुक्त के वकील ने कहा था कि मामला सीआरपीसी की धारा 436ए  के तहत कवर किया गया था। उन्होंने यह भी कहा था कि जेम्स ने कथित रूप से उसके द्वारा किए गए अपराध के लिए 50 प्रतिशत सजा काट ली थी। 
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बता दें कि जेम्स ब्रिटेन का निवासी है। उसे दिसंबर 2018 में दुबई से प्रत्यर्पित किया गया था और तब से वह हिरासत में है। उसके वकील का दावा है कि उसके खिलाफ जांच अभी पूरी नहीं हुई है। वकील ने कहा था कि याचिकाकर्ता जिस मामले में जेल में बंद है वह भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 8 और 9 के तहत है। इसमें अधिकतम सजा पांच साल जेल है, इसमें से वह करीब चार साल जेल में बिता चुका है।

वहीं, जांच एजेंसियों की ओर से अदालत में पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने पिछली सुनवाई के दौरान कहा था कि बड़ी मुश्किल से एजेंसियों को आरोपी की हिरासत मिली है। साथ ही दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 436ए ईडी की कार्यवाही पर लागू नहीं होगी।

मामले में आरोपी जेम्स ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 11 मार्च, 2022 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। सीबीआई और ईडी के दोनों मामलों में अपनी रिहाई की मांग करते हुए आरोपी ने कहा था कि जांच के लिए उसकी जरूरत नहीं है बावजूद इसके उसने जांच में सहयोग करने की इच्छा जताई थी।

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सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI

हमारे बार-बार आदेश के बाद भी नफरती भाषणों पर नहीं हो रही कोई कार्रवाई
 शीर्ष कोर्ट ने कहा है कि हमारे बार बार आदेश जारी करने के बाद भी नफरती भाषणों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। अगर इस तरह बार बार नफरती भाषणों पर अंकुश लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाएगा तो उसे बार बार शर्मिंदा होना पड़ेगा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट मुंबई में 5 फरवरी को होने वाले कथित नफरती भाषण के कार्यक्रम को रोकने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने को तैयार हो गया।

जस्टिस केएम जोसेफ, जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि वह सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ से निर्देश लेगी और अनुमति मिलने पर शुक्रवार को सुनवाई करेगी। पीठ ने कहा, इस संबंध में हम आपके साथ हैं, लेकिन यह समझें कि हर बार किसी रैली की घोषणा होने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया जा सकता। हम पहले ही एक आदेश पारित कर चुके हैं जो काफी स्पष्ट है। कल्पना कीजिए कि देश भर में रैलियां हो रही हैं। हर बार सुप्रीम कोर्ट के सामने कोई आवेदन होगा। यह कैसे व्यवहार्य हो सकता है?

पीठ की यह टिप्पणी एक वकील के उल्लेख करने पर आई। वकील ने कहा, हिंदू जन आक्रोश मोर्चा के मुंबई में होने वाली कथित नफरती भाषण रैली के खिलाफ तत्काल सुनवाई की जरूरत है। कुछ दिन पहले भी इसी तरह की एक रैली आयोजित हुई थी जिसमें 10000 लोगों ने भाग लिया और मुस्लिम समुदाय का आर्थिक एवं सामाजिक रूप से बहिष्कार करने का आह्वान किया गया था। वकील के बार-बार आग्रह करने पर पीठ ने आवेदन की एक प्रति महाराष्ट्र के वकील को देने को कहा।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

वीआरएस लेने वाले कर्मचारियों पर शीर्ष कोर्ट ने की अहम टिप्पणी
वीआरएस लेने वाले कर्मचारी सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त करने के बाद सेवानिवृत्त होने वालों के साथ समानता का दावा नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यह अहम टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फैसले को चुनौती देने वाली वीआरएस लेने वाले कर्मियों की अपील पर सुनवाई करते हुए की। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने आदेश में उन्हें वेतनमान में संशोधन के लाभ से वंचित रखा था।

जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने कहा कि वीआरएस का लाभ पाने वाले और स्वेच्छा से इस अवधि के दौरान महाराष्ट्र राज्य वित्तीय निगम (एमएसएफसी) की सेवा छोड़ने वाले कर्मचारी अलग स्थिति में हैं। यह माना जाता है कि वीआरएस कर्मचारी अन्य लोगों के साथ समानता का दावा नहीं कर सकते हैं जो सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त करने के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं। वे उन लोगों के साथ समानता का दावा नहीं कर सकते हैं जिन्होंने लगातार काम किया, अपने कार्यों का निर्वहन किया और उसके बाद सेवानिवृत्त हो गए। 

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

 अदालतों, न्यायाधिकरणों में एकत्र राशि बैंकों में जमा करने के दिशा निर्देश बनें: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों, न्यायाधिकरणों से उनकी रजिस्ट्री में एकत्रित राशि को अनिवार्य रूप से बैंक या किसी वित्तीय संस्थान में जमा करने के लिए दिशा निर्देश बनाने को कहा है। शीर्ष अदालत का यह निर्देश कोर्ट के पास वादियों की ओर से किए गए भुगतान की राशि पर भविष्य में ब्याज के नुकसान से बचने के लिए जारी किया।

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा करते हुए मंगलवार को यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा, इस मामले से अलग होने से पहले, अदालत की राय है कि सभी अदालतों और न्यायिक मंचों को उन मामलों में दिशा-निर्देश तैयार करना चाहिए जहां राशि कार्यालय/अदालत/ट्रिब्यूनल की रजिस्ट्री के पास जमा की जाती है। ऐसी राशि अनिवार्य रूप से किसी बैंक या कुछ वित्तीय संस्थान में जमा की जानी चाहिए। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में कोई नुकसान न हो।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

सुप्रीम कोर्ट ने न्याय विभाग के आंकड़े और ओडिशा सरकार के आंकड़े बेमेल रहने का संज्ञान लिया
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय कानून मंत्रालय में न्याय विभाग के आंकड़ों और न्यायिक अवसंरचना के लिए 2018-19 एवं 2019-20 में ओडिशा को जारी की गई केंद्रीय सहायता के उपयोग प्रमाणपत्रों पर मंत्रालय को राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी के एक-दूसरे से मेल नहीं खाने के मामले का बृहस्पतिवार को संज्ञान लिया। 

इस मामले में शीर्ष कोर्ट ने निर्देश दिया कि न्याय विभाग, ओडिशा सरकार के कानून सचिव और अन्य के बीच दो हफ्तों में एक बैठक आयोजित की जाए, ताकि राज्य द्वारा सौंपे गये उपयोगिता प्रमाणपत्रों का मिलान किया जा सके।

प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केंद्र की ओर से न्यायालय में पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी द्वारा उपलब्ध कराये गये आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ओडिशा को 2019-20 के लिए 35.69 करोड़ रुपये जारी किये गये, जबकि 2020-21, 2021-22 और 2022-23 के लिए कोई राशि जारी नहीं की गई।

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