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SC: गिरफ्तारी के खिलाफ अशोका विवि के प्रोफेसर की याचिका पर सुनवाई आज; ऑपरेशन सिंदूर पर की थी विवादित पोस्ट

Tue, 20 May 2025 02:24 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Tue, 20 May 2025 02:24 AM IST
सार

एसोसिएट प्रोफेसर अली महमूदाबाद ने कहा था कि कर्नल सोफिया कुरैशी की सराहना करने वाले दक्षिणपंथी लोगों को भीड़ की ओर से की गई हत्याओं और संपत्तियों को मनमाने ढंग से गिराए जाने के पीड़ितों के लिए सुरक्षा की मांग करनी चाहिए। महमूदाबाद ने कर्नल कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की मीडिया ब्रीफिंग को दिखावा बताया था। साथ ही कहा था कि दिखावे को जमीनी हकीकत में बदलना होगा, अन्यथा यह सिर्फ पाखंड है।

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Supreme Court to hear Ashoka University professor's petition against arrest, Operation Sindoor know everything
प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को पुलिस ने किया गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पोस्ट के लिए गिरफ्तारी को चुनौती वाली अली खान महमूदाबाद की याचिका पर सुनवाई को तैयार हो गया। याचिकाकर्ता अशोका विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख हैं। सीजेआई जस्टिस बीआर गवई व जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने एसोसिएट प्रोफेसर के वकील कपिल सिब्बल की दलीलों पर गौर किया। सिब्बल ने कहा कि उनके मुवक्किल को देशभक्ति वाले बयान के लिए गिरफ्तार किया गया है। कृपया इसे दिन के दौरान सूचीबद्ध करें। इस पर सीजेआई ने कहा कि याचिका को मंगलवार या बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। प्रोफेसर को पोस्ट में संप्रभुता और अखंडता को खतरे में डालने समेत कड़े आरोपों के तहत दो एफआईआर में रविवार को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 18 मई को सोनीपत की एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया और दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। हरियाणा के पुलिस उपायुक्त नरेंद्र कादयान ने बताया कि सोनीपत के राई पुलिस स्टेशन में दर्ज दो प्राथमिकियों में एक हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया की शिकायत पर और दूसरी एक गांव के सरपंच की शिकायत पर है।

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हरियाणा राज्य महिला आयोग ने भी भेजा था प्रोफेसर को नोटिस
हरियाणा राज्य महिला आयोग ने की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने हाल ही में एसोसिएट प्रोफेसर को नोटिस भेजकर उनकी टिप्पणियों पर सवाल उठाया था। हालांकि महमूदाबाद ने कहा था कि उनकी टिप्पणियों को गलत समझा गया है। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल किया है। राज्य के डीजीपी को 16 मई को लिखे पत्र में एचएससीडब्ल्यू ने प्रथम दृष्टया साक्ष्य और मिसाल के आधार पर महमूदाबाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत भी की थी।
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इन धाराओं में दर्ज हुई हैं एफआईआर
पुलिस ने बताया कि आयोग अध्यक्ष की शिकायत पर अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अली के खिलाफ बीएनएस धारा 152 (भारत की संप्रभुता या एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य), 353 (सार्वजनिक शरारत करने वाले बयान), 79 (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से जानबूझकर की गई कार्रवाई) और 196 (1) (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। ये सभी धाराएं गैर-जमानती हैं।
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एसोसिएट प्रोफेसर ने यह कहा था
एसोसिएट प्रोफेसर अली महमूदाबाद ने कहा था कि कर्नल सोफिया कुरैशी की सराहना करने वाले दक्षिणपंथी लोगों को भीड़ की ओर से की गई हत्याओं और संपत्तियों को मनमाने ढंग से गिराए जाने के पीड़ितों के लिए सुरक्षा की मांग करनी चाहिए। महमूदाबाद ने कर्नल कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की मीडिया ब्रीफिंग को दिखावा बताया था। साथ ही कहा था कि दिखावे को जमीनी हकीकत में बदलना होगा, अन्यथा यह सिर्फ पाखंड है।
 
आयोग ने की थी ये शिकायत
आयोग ने शिकायत में कहा कि महमूदाबाद की टिप्पणियों में कर्नल कुरैशी और विंग कमांडर सिंह सहित वर्दीधारी महिलाओं के अपमान और भारतीय सशस्त्र बलों में पेशेवर अधिकारियों के रूप में उनकी भूमिका को कमतर आंकने की प्रवृत्ति दिखती है। आयोग का आरोप है कि एसोसिएट प्रोफेसर की सोशल मीडिया पोस्ट ऐसी भाषा से युक्त थी, जो पहली नजर में कुछ लोगों को सहानुभूतिपूर्ण लग सकती है, लेकिन ध्यानपूर्वक पढ़ने के बाद इसमें ऐसे शब्द हैं, जो वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य और घरेलू सुरक्षा एवं शांति संबंधी चिंताओं के मद्देनजर पूरी तरह से अनुचित हैं। उनके ‘...मनमाना...संवेदनहीन मौत...’ जैसे शब्द सभी रूपों में गंभीर निंदा के पात्र हैं, क्योंकि बयान के संदर्भ को न तो सद्भावना के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है और न ही भारत सरकार की ओर से युद्ध की घोषणा के अभाव के कारण इसे ईजुस्डेम जेनेरिस कहा जा सकता है।

 
एक शिक्षाविद होने के नाते उनके कुछ दायित्व हैं
आयोग ने कहा, एक शिक्षाविद् होने के नाते अली का समाज के प्रति विशेष दायित्व है कि वह अपने शब्दों के प्रति अधिक सावधान रहें और निम्नलिखित भावनाओं को साझा करने के लिए साइबर स्पेस का उपयोग करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के साथ रखकर नहीं देखा जा सकता। इस बयान में सिर्फ कर्नल कुरैशी का जिक्र करना साफतौर पर उनकी मंशा को दर्शाता है कि वह अपने पोस्ट को धार्मिक पहचान का रंग देना चाहता है। मौजूदा समय में साइबरस्पेस की ताकत को देखते हुए इसके दूरगामी नतीजे हो सकते हैं।

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