फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court to examine validity of amended GNCTD Act seeks Centre response on Delhi govt plea

सुप्रीम कोर्ट: जीएनसीटीडी अधिनियम 2021 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस, जानें पूरा मामला

Thu, 03 Mar 2022 09:43 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 03 Mar 2022 09:43 PM IST
सार

यह अधिनियम उपराज्यपाल को ‘दिल्ली की सरकार’ घोषित करके व्यापक अधिकार देता है। इसके अलावा इसमें यह भी प्रावधान है कि एलजी द्वारा निर्दिष्ट सभी मामलों पर दिल्ली सरकार के मंत्रिपरिषद के निर्णयों पर कोई कार्यकारी कार्रवाई करने से पहले एलजी की राय ली जाएगी।

विज्ञापन
Supreme Court to examine validity of amended GNCTD Act seeks Centre response on Delhi govt plea
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अधिनियम, 2021 की सांविधानिक वैधता को चुनौती देने वाली दिल्ली सरकार की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इस संशोधन अधिनियम के तहत निर्वाचित सरकार पर दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) की शक्तियों को बढ़ाया गया है।

विज्ञापन


सीजेआई एनवी रमण, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने दिल्ली सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलें सुनने के बाद केंद्र सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट चार हफ्ते बाद इस मामले की सुनवाई करेगा। केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने कहा, इस मामले को संविधान पीठ के पास भेजने की जरूरत है। लेकिन सीजेआई ने कहा, हमें नहीं लगता कि इसकी आवश्यकता है। मुझे लगता है कि हम  तीन, मामले को सुलझा सकते हैं। तीन न्यायाधीशों की पीठ ही मामले की सुनवाई करेगी।
विज्ञापन


पीठ ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रशासनिक सेवाओं पर अधिकार से संबंधित केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच विवाद से संबंधित अनसुलझे मुद्दे को भी उठाने का फैसला किया है। फरवरी 2019 में जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण (अब दोनों सेवानिवृत्त) की पीठ ने इस मुद्दे पर खंडित फैसला दिया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


जस्टिस सीकरी ने कहा था, संयुक्त सचिव व उससे ऊपर के रैंक के अधिकारियों के स्थानांतरण व पोस्टिंग दिल्ली के उपराज्यपाल की शक्तियों के अधीन हैं। जबकि अन्य अधिकारी दिल्ली सरकार के नियंत्रण में हैं। वहीं जस्टिस भूषण की राय अलग थी। उनका मानना था कि सेवाएं पूरी तरह से दिल्ली सरकार के दायरे से बाहर हैं। खंडित फैसला होने के कारण मामले को तीन सदस्यीय पीठ के पास भेज दिया गया था।

ऐसे तो अनुशासन शून्य होगा
दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील सिंघवी ने कहा, मैं एक सरकार हूं लेकिन मैं अधिकारियों को स्थानांतरित नहीं कर सकता। मैं अधिकारियों की नियुक्ति व शासन नहीं कर सकता और यदि वे यह जानते हैं तो अनुशासन शून्य होगा। यह मामला बेहद जरूरी है और इसका जल्द निपटारा किया जाना चाहिए।


क्या है मामला
यह अधिनियम उपराज्यपाल को ‘दिल्ली की सरकार’ घोषित करके व्यापक अधिकार देता है। इसके अलावा इसमें यह भी प्रावधान है कि एलजी द्वारा निर्दिष्ट सभी मामलों पर दिल्ली सरकार के मंत्रिपरिषद के निर्णयों पर कोई कार्यकारी कार्रवाई करने से पहले एलजी की राय ली जाएगी। रिट याचिका में 2021 संशोधन अधिनियम द्वारा संशोधित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम, 1991 की धारा- 21, 24, 33, 44 को रद्द करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed