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बोफोर्स सौदे की जांच होगी या नहीं सुप्रीम कोर्ट दो फरवरी को तय करेगा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 16 Jan 2018 10:18 PM IST
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बोफोर्स घोटाला मामले की जांच फिर से होनी चाहिए या नहीं यह दो फरवरी को सर्वोच्च न्यायालय तय करेगी। इस मामले की जांच की अपील के लिए दायर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सवाल किया है और जवाब दाखिल करने के लिए दो फरवरी तक का समय दिया है।
बोफोर्स तोप घोटाला मामले की जांच के लिए अजय अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकार्ता की याचिका दाखिल करने के आधार (लोकस) पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सवाल किया है कि क्या कोई ऐसा फैसला है, जिसमें आपराधिक मामले में तीसरे पक्ष को याचिका दाखिल करने की इजाजत दी गई हो, जबकि जांच एजेंसी ने कोई अपील दाखिल न की हो? सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि क्रिमिनल अपील में कोई तीसरा पश्र कैसे याचिका दाखिल कर सकता है?
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सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश मनिंदर सिंह ने कहा कि सीबीआई ने 2005 में राय मांगी थी और फिर तय किया गया कि हाईकोर्ट के फैसले की अपील नहीं की जाएगी।
गौरतलब है कि साल 1986 में 1,437 करोड़ रुपये के बोफोर्स तोप घोटाले में भारतीय अधिकारियों को 64 करोड़ रुपये घूस देने का आरोप है। याचिकाकर्ता और बीजेपी नेता अजय अग्रवाल ने कहा है कि सीबीआई ने इस मामले में 31 मई 2005 को दिल्ली हाई कोर्ट के दिए फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी। 2005 में दिल्ली हाई कोर्ट ने घोटाले में यूरोप में रहने वाले हिंदुजा भाईयों पर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया था।
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बोफोर्स तोप घोटाला मामले की जांच के लिए अजय अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकार्ता की याचिका दाखिल करने के आधार (लोकस) पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सवाल किया है कि क्या कोई ऐसा फैसला है, जिसमें आपराधिक मामले में तीसरे पक्ष को याचिका दाखिल करने की इजाजत दी गई हो, जबकि जांच एजेंसी ने कोई अपील दाखिल न की हो? सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि क्रिमिनल अपील में कोई तीसरा पश्र कैसे याचिका दाखिल कर सकता है?
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Supreme Court asked Ajay Aggarwal, a petitioner in Bofors case, what is his locus in the case.
— ANI (@ANI) January 16, 2018
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सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश मनिंदर सिंह ने कहा कि सीबीआई ने 2005 में राय मांगी थी और फिर तय किया गया कि हाईकोर्ट के फैसले की अपील नहीं की जाएगी।
गौरतलब है कि साल 1986 में 1,437 करोड़ रुपये के बोफोर्स तोप घोटाले में भारतीय अधिकारियों को 64 करोड़ रुपये घूस देने का आरोप है। याचिकाकर्ता और बीजेपी नेता अजय अग्रवाल ने कहा है कि सीबीआई ने इस मामले में 31 मई 2005 को दिल्ली हाई कोर्ट के दिए फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी। 2005 में दिल्ली हाई कोर्ट ने घोटाले में यूरोप में रहने वाले हिंदुजा भाईयों पर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया था।