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SC: सुप्रीम कोर्ट MP बार काउंसिल के अध्यक्ष की याचिका पर करेगा विचार, अवमानना कार्यवाही से जुड़ा है मामला

Fri, 26 Apr 2024 02:10 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 26 Apr 2024 02:10 PM IST
सार

मध्य प्रदेश राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष और बार के अन्य सदस्यों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा के इस कथन का पीठ ने संज्ञान लिया कि बार के कई सदस्य अवमानना कार्यवाही का सामना कर रहे हैं और मामले पर शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता है।
 

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Supreme Court to consider plea of MP Bar Council leaders against contempt proceedings
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट अवमानना कार्यवाही के खिलाफ मध्य प्रदेश बार काउंसिल के सदस्यों की याचिका पर विचार करने को तैयार हो गया है। पीठ ने शुक्रवार को कहा कि वह कथित रूप से हड़ताल का आह्वान करने के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष और अन्य के खिलाफ चल रही अवमानना कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका को सूचीबद्ध करने पर विचार करेगी।

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कई सदस्य अवमानना कार्यवाही का सामना कर रहे
प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने मध्य प्रदेश राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष और बार के अन्य सदस्यों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा के इस कथन का संज्ञान लिया कि बार के कई सदस्य अवमानना कार्यवाही का सामना कर रहे हैं और मामले पर शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता है।
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उन्होंने कहा कि न केवल स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष, बल्कि 103 बार एसोसिएशन भी अवमानना कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। मामले में जल्द सुनवाई होनी चाहिए। इस पर सीजेआई ने कहा, 'मैं मामले को देखूंगा।'
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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य में वकीलों की जारी हड़ताल पर राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष और उसके निर्वाचित सदस्यों के खिलाफ अवमानना का मामला शुरू किया था। अदालत का कहना था कि राज्य बार काउंसिल ने मुद्दे को सुलझाने की बजाय हड़ताल करने का रास्ता चुना। मध्य प्रदेश राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष ने पिछले साल दो नवंबर के उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के खिलाफ अपील दायर की है।

यह है मामला
गौरतलब है कि मार्च 2023 में अधिवक्ता अनिश्चितकालीन प्रदेशव्यापी हड़ताल पर चले गए थे। उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में करते हुए अधिवक्ताओं को तत्काल काम पर वापस लौटने के आदेश दिए थे। उच्च न्यायालय ने कहा था कि अधिवक्ता काम पर नहीं लौटते है तो इसे न्यायालय की अवमानना मानी जाएगी। इसके खिलाफ जाकर हड़ताल बुलाने और सभी वकीलों को काम से दूर रहने के लिए कहने के लिए अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की गई थी, जिससे मध्य प्रदेश राज्य में बड़े पैमाने पर अशांति फैल गई थी।

अब वकील ने यह दी दलील
वकील समीर सोढ़ी के माध्यम से दायर तत्काल पत्र में कहा गया, 'उच्च न्यायालय ने खुद संज्ञान लिया की उसके आदेश को नहीं माना गया, जिसपर मध्य प्रदेश राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू हुई। हालांकि, मामले को सुलझा लिया गया था। शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप के बाद पिछले साल 29 मार्च को हड़ताल वापस ले ली गई थी।'


पत्र में कहा गया कि बार सदस्यों ने दो नवंबर, 2023 को उच्च न्यायालय के समक्ष बिना शर्त माफी मांगी। आगे कहा गया, 'उच्च न्यायालय ने वकीलों द्वारा दी गई माफी को स्वीकार कर लिया है और उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही को रोक दिया है। लेकिन मध्य प्रदेश के राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष और उसके पदाधिकारियों की ओर से दी गई माफी को स्वीकार नहीं किया। इसकी वजह से उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही जारी है।'

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