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धार्मिक परंपराओं पर सभी धर्मों के खिलाफ समान रुख अपनाए सुप्रीम कोर्ट: जेटली 

Mon, 08 Oct 2018 03:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 08 Oct 2018 03:14 AM IST
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Supreme Court to adopt equitable stand against religious beliefs on religious traditions, jaitley
अरुण जेटली

धार्मिक परंपराओं, प्रथाओं, मान्यताओं और प्रक्रियाओं को संविधान प्रदत्त मौलिक एवं समानता के अधिकार से जोड़े जाने का विरोध करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सुप्रीम कोर्ट पर चुनिंदा दृष्टिकोण (सिलेक्टिव एप्रोच) अपनाने का आरोप लगाया। सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की इजाजत संबंधी फैसले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अगर यह प्रगतिशील और साहसिक फैसला है तो इसी आधार पर सभी धर्मों की परंपराओं के संबंध में निर्णय लिया जाना चाहिए। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने बीते दिनों सबरीमाला में 10 साल की बच्चियों से ले कर 55 साल की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को समानता का अधिकार और मौलिक अधिकार का उल्लंघन करार दिया था। 

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वित्त मंत्री ने एक कार्यक्रम में कहा कि अनुच्छेद 14 और 21 का पालन महज एक धर्म के लिए क्यों अनिवार्य होना चाहिए? शीर्ष अदालत अगर प्रगतिशील कदम उठाना चाहती है तो इसके दायरे में सभी धर्मों की पंरपराओं, मान्यताओं और प्रक्रियाओं को शामिल करना चाहिए। अगर धार्मिक मान्यताओं-प्रथाओं को अनुच्छेद 14 की कसौटी पर कसा जाता है तो फिर इसके दायरे से पर्सनल लॉ को क्यों बाहर रखा जाना चाहिए? फिर यह बहुविवाह प्रथा, एक साथ मौखिक रूप से दिया गया तीन तलाक पर लागू क्यों नहीं होना चाहिए? एक धर्मविशेष में जहां धार्मिक स्थलों पर महिलाओं को प्रवेश निषेध है, उसे भी अनुच्छेद 14 के खांचे में क्यों नहीं रखना चाहिए? सबरीमाला के फैसले तो तभी साहसिक और प्रगतिशील माना जाएगा जब इसी आधार पर सभी धर्मों की प्रथाओं, मान्यताओं और प्रक्रियाओं को तौला जाए। 
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जेटली ने शीर्ष अदालत के विवाहेतर संबंधों को जायज ठहराने और समलैंगिता को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने संबंधी फैसले केकुछ अंशों से असहमति जाहिर की। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने हाल ही में अपने फैसले में समलैंगिता को अभिव्यक्ति की आजादी से जोड़ा था। मेरा व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि व्यक्ति की सेक्सुअल पसंद को अभिव्यक्ति की आजादी नहीं कह सकते। 
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गौरतलब है कि हाल ही में सेवानिवृत्त हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठों ने अलग-अलग मामले में सबरीमाला में महिलाओं को प्रवेश की इजाजत दी थी। इसके अलावा समलैंगिता और विवाहेतर संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। इन फैसलों को शीर्ष अदालत के साहसिक और प्रगतिशील फैसलों के रूप में देखा जा रहा है। 

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