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SC: 'असाधारण मामला न होने पर समयबद्ध निपटारे के प्रलोभन से बचें', जल्द सुनवाई से इनकार कर अदालत ने की टिप्पणी

Sun, 12 Nov 2023 03:53 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 12 Nov 2023 03:53 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक न्यायालय को मामलों के लिए समयबद्ध कार्यक्रम तय करने के मामले में अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा, जब तक असाधारण न हो, समय तय करने से बचना चाहिए।

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Supreme Court time frame fix cases Constitutional Court avoid Unless extraordinary
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

उच्चतम न्यायालय ने एक अपराधी के मामले का निपटारा करते हुए अहम टिप्पणी की। अदालत ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि संवैधानिक न्यायालय को समयबद्ध कार्यक्रम तय करने से बचना चाहिए। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने कहा, जब तक हालात असाधारण न हो, एक निश्चित समय के अंदर किसी भी अदालत के समक्ष मामलों के निपटारे के लिए समयबद्ध कार्यक्रम तय करने से बचना चाहिए।
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लंबित मामलों की बड़ी संख्या, मुकदमे के निपटारे में देरी स्वाभाविक
एक आपराधिक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी में कहा कि देश के प्रत्येक उच्च न्यायालय और विशेष रूप से बड़े न्यायालयों में बड़ी संख्या में जमानत याचिकाएं दायर की जाती हैं। इसलिए, ऐसी याचिकाओं के निपटारे में कुछ देरी अपरिहार्य है। इसे हमेशा टाला नहीं जा सकता।
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सुप्रीम कोर्ट की नसीहत- अदालत को प्रलोभन से बचना चाहिए
न्यायमूर्ति ओका और जस्टिस मिथल की पीठ ने कहा, लंबित मामलों की संख्या देखते हुए, हमारा विचार है कि देश के प्रत्येक उच्च न्यायालय और प्रत्येक अदालत में बड़ी संख्या में लंबित मामले हैं, ऐसे में जब तक कि स्थिति असाधारण न हो, संवैधानिक न्यायालय को किसी भी अदालत के समक्ष किसी भी मामले के निपटान के लिए समयबद्ध कार्यक्रम तय करने के प्रलोभन से बचना चाहिए"
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महाराष्ट्र के बॉम्बे हाईकोर्ट का मामला
शीर्ष अदालत शेख उज्मा फिरोज हुसैन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने महाराष्ट्र उच्च न्यायालय को समयबद्ध तरीके से उनकी जमानत याचिका पर फैसला करने का निर्देश देने की मांग की थी।


जल्दी सुनवाई की अपील हाईकोर्ट में भी कर सकते हैं
दलीलों को सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि कोई असाधारण तात्कालिकता है तो याचिकाकर्ता हमेशा उसी अदालत की संबंधित पीठ का रुख कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट में दो जजों की खंडपीठ ने कहा, "हमें यकीन है कि यदि अनुरोध वास्तविक है, तो संबंधित पीठ इस पर जरूर विचार करेगी।"
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