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Supreme Court: तमिलनाडु में मूर्ति चोरी से जुड़े 41 FIR फाइल गायब होने से हैरान; अदालत ने सरकार से मांगा जवाब
Sat, 21 Dec 2024 07:17 AM IST
शुभम कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: शुभम कुमार
Updated Sat, 21 Dec 2024 07:17 AM IST
सार
अदालत ने पाया कि 41 फाइलों में से 27 का पता लगा लिया गया है और 11 मामलों में नई एफआईआर दर्ज की गई हैं। पीठ ने कहा, जिस क्षण आप नई एफआईआर दर्ज करते हैं, यह आरोपी के बचाव का एक तरीका बन जाता है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि तमिलनाडु में मूर्ति चोरी के मामलों में 41 एफआईआर फाइलों का गायब होना चौंकाने वाला है। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने तमिलनाडु सरकार के गृह विभाग के सचिव को हलफनामा दाखिल करने और सरकार का रुख स्पष्ट करने के लिए 31 जनवरी, 2025 तक का समय दिया है।
पीठ ने सुनवाई के दौरान उन्हें ऑनलाइन उपस्थित रहने का भी निर्देश दिया है। अदालत ने पाया कि 41 फाइलों में से 27 का पता लगा लिया गया है और 11 मामलों में नई एफआईआर दर्ज की गई हैं। पीठ ने कहा, जिस क्षण आप नई एफआईआर दर्ज करते हैं, यह आरोपी के बचाव का एक तरीका बन जाता है। नई एफआईआर कैसे दर्ज की जा सकती है।
याचिकाकर्ता का तर्क
याचिकाकर्ता एलीफेंट जी राजेंद्रन की ओर से पेश वकील जी एस मणि ने कहा कि चोरी कई साल पहले हुई थी। इसमें शामिल मूर्तियों की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 300 करोड़ रुपये से अधिक है। इन मामलों में कोई प्रगति नहीं हुई है। यह सरासर लापरवाही है।
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बता दें कि शीर्ष अदालत ने फरवरी, 2023 में राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक, हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती आयुक्त और मूर्ति चोरी विंग का नेतृत्व करने वाले अतिरिक्त डीजीपी को नोटिस जारी किया था। राजेंद्रन ने फाइलों के गायब होने की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है और आरोप लगाया है कि यह वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, नौकरशाही और मूर्ति माफिया के बीच एक गंभीर साजिश का नतीजा है।
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पीठ ने सुनवाई के दौरान उन्हें ऑनलाइन उपस्थित रहने का भी निर्देश दिया है। अदालत ने पाया कि 41 फाइलों में से 27 का पता लगा लिया गया है और 11 मामलों में नई एफआईआर दर्ज की गई हैं। पीठ ने कहा, जिस क्षण आप नई एफआईआर दर्ज करते हैं, यह आरोपी के बचाव का एक तरीका बन जाता है। नई एफआईआर कैसे दर्ज की जा सकती है।
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याचिकाकर्ता का तर्क
याचिकाकर्ता एलीफेंट जी राजेंद्रन की ओर से पेश वकील जी एस मणि ने कहा कि चोरी कई साल पहले हुई थी। इसमें शामिल मूर्तियों की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 300 करोड़ रुपये से अधिक है। इन मामलों में कोई प्रगति नहीं हुई है। यह सरासर लापरवाही है।
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बता दें कि शीर्ष अदालत ने फरवरी, 2023 में राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक, हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती आयुक्त और मूर्ति चोरी विंग का नेतृत्व करने वाले अतिरिक्त डीजीपी को नोटिस जारी किया था। राजेंद्रन ने फाइलों के गायब होने की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है और आरोप लगाया है कि यह वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, नौकरशाही और मूर्ति माफिया के बीच एक गंभीर साजिश का नतीजा है।