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Supreme Court: जिला अदालतों में चेक बाउंस के मामले पर 'सुप्रीम' निर्देश, निपटारे के लिए जारी किए दिशानिर्देश

Fri, 26 Sep 2025 06:17 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 26 Sep 2025 06:17 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, मुंबई और कोलकाता की जिला अदालतों में चेक बाउंस के लाखों मामलों को चौंकाने वाला बताते हुए चिंता जताई है। कोर्ट ने मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। अब सुनवाई के अलग-अलग चरणों में भुगतान करने पर बिना जुर्माना या तय प्रतिशत शुल्क के समझौते की अनुमति दी जाएगी।

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Supreme Court strict on the huge number of check bounce cases issued new guidelines for speedy disposal
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने देश के महानगरों की जिला अदालतों में चेक बाउंस के मामले की भारी संख्या को चौंकाने वाला बताया है। साथ ही इसको लेकर चिंता जताते हुए इन्हें तुरंत निपटाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मामले में जस्टिस मनमोहन और एन वी अंजारिया की पीठ ने यह फैसला तब सुनाया जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक मामले में निचली अदालतों के फैसले को पलट दिया था। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में कई बार इस विषय में दिशा-निर्देश दिए गए हैं, लेकिन फिर भी बड़े शहरों की अदालतों में इन मामलों की संख्या बेहद ज्यादा है।

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कोर्ट ने जारी किए चौंकाने वाले आंकड़े
कोर्ट ने नेशनल जुडिशियल डाटा ग्रिड के हवाले से कुछ चौंकाने वाले आंकड़े भी साझा किए। इसके तहत कोर्ट ने बताया कि दिल्ली की जिला अदालतों में चेक बाउंस के 6,50,283, मुंबई में 1,17,190 और कोलकाता में 2,65,985 मामले लंबित हैं। इतना ही नहीं, दिल्ली की ट्रायल कोर्ट में चल रहे कुल मामलों में लगभग 50% सिर्फ चेक बाउंस से जुड़े हैं।
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मामलों को जल्द निपटाने के लिए जारी दिशा निर्देश
जिला अदालतों में लंबित पड़े इन मामलो को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान अगर आरोपी चेक की पूरी रकम चुका देता है, तो उसे समझौते के जरिए राहत मिल सकती है। अगर बचाव पक्ष की गवाही दर्ज होने से पहले भुगतान होता है, तो बिना किसी जुर्माने के मामला समाप्त किया जा सकता है। वहीं, अगर आरोपी अपनी गवाही दर्ज कराने के बाद लेकिन कोर्ट के फैसले से पहले भुगतान करता है, तो उसे चेक राशि का 5% अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

ऐसे में यदि मामला सेशन कोर्ट या हाईकोर्ट तक पहुंच गया है और वहां भुगतान किया जाता है, तो आरोपी को 7.5% अतिरिक्त राशि अदा करनी होगी और अगर सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर समझौता होता है, तो भुगतान के साथ-साथ 10% अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य सजा से अधिक भुगतान की वसूली और चेक को एक भरोसेमंद भुगतान माध्यम बनाए रखना है।


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समझौता और प्रोबेशन की सुविधा भी मिलेगी
कोर्ट ने कहा कि चेक बाउंस का मामला पूरी तरह से आपराधिक नहीं बल्कि अर्ध-आपराधिक होता है, और इसमें स्वैच्छिक समझौते की अनुमति है। इसके साथ ही, आरोपी को अपराधियों की परिवीक्षा अधिनियम 1958 के तहत राहत भी मिल सकती है, यानी उसे सजा की बजाय चेतावनी देकर छोड़ा जा सकता है।

समन की प्रक्रिया में भी बदलाव
इसके साथ ही इस मामले में अब नया कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) लागू होने के बाद, समन सिर्फ परंपरागत तरीकों से नहीं बल्कि 'दस्ती' यानी शिकायतकर्ता स्वयं भी आरोपी को समन दे सकता है। इससे मामले की कार्यवाही तेजी से शुरू हो सकेगी।

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