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भीड़ हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, किसी को भी कानून का ठेकेदार बनने का हक नहीं

Tue, 02 Oct 2018 06:22 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली 
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली  Updated Tue, 02 Oct 2018 06:22 AM IST
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Supreme court strict on mob lynching, No one has the right to become a law contractor
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भीड़ हिंसा और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर कहा है कि किसी को भी कानून का ठेकेदार बनने का हक नहीं है। साथ ही स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।

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मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकारों को जिलावार रैपिड रिस्पांस टीम का गठन करने के लिए कहा है। ताकि बिना विलंब के इस तरह की घटनाओं पर काबू पाया जा सके। साथ ही विशेष हेल्पलाइन शुरू करने और पुलिस को साइबर पोर्टल के जरिये घटनाओं का रिकॉर्ड रखने के लिए कहा है। 
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पीठ ने यह फैसला कोडुंगल्लूर फिल्म सोसायटी की याचिका पर दिया है, जिसमें विवादास्पद फिल्म पद्मावत फिल्म की रिलीज से पहले कई राज्यों में हुई हिंसा और तोड़फोड़ का जिक्र किया गया था। पीठ ने कहा कि राज्यों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाओं को होने से पहले ही रोका जाना चाहिए।
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साथ कानूनी एजेंसियां दोषियों को सजा दिलाने के लिए अपनी शक्तियों का प्रयोग करें। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के उकसाने, पहल या किसी अन्य कारणों की वजह से सांस्कृतिक कार्यक्रमों के खिलाफ हिंसा हो। किसी की जान चली जाए या संपत्तियों को नुकसान हो तो उन्हें पीड़ित को मुआवजा देना होगा। 
 

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