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Stray Dogs Case: सुप्रीम कोर्ट का सवाल- आप क्या चाहते हैं, अस्पतालों के गलियारों में कितने आवारा कुत्ते दिखें?

Thu, 08 Jan 2026 12:03 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Thu, 08 Jan 2026 12:03 PM IST
सार

संवेदनशील स्थानों में सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए पीठ ने पूछा कि अस्पताल के गलियारों और मरीजों के आसपास कितने कुत्तों को घूमने की अनुमति दी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चे, वयस्क, सभी को काटा जा रहा है। लोग मर रहे हैं।

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आवारा कुत्तों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर गुरुवार को फिर से सुनवाई शुरू की। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा जानवरों से होने वाले खतरों और उन्हें नियंत्रित करने में नागरिक अधिकारियों की कथित कमियों को उजागर करने वाली याचिकाओं पर ध्यान केंद्रित किया।

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लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने दलील देते हुए कहा, 'दिल्ली में चूहे और बंदरों का भी खतरा है। कुत्तों को अचानक हटाने से क्या होता है? चूहों की आबादी बढ़ जाती है। कुत्ते संतुलन बनाए रखते हैं।'
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सुप्रीम कोर्ट- ...तो क्या बिल्लियों को बढ़ाना चाहिए? 
उनकी इस दलील पर न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने टिप्पणी की, 'क्या इसका आपस में कोई संबंध है? हमें बिल्लियों को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि वे चूहों की दुश्मन हैं।' इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हमने गली के हर कुत्ते को हटाने का निर्देश नहीं दिया है। उनके साथ नियमानुसार व्यवहार किया जाना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान की ये टिप्पणियां


सड़क से हर कुत्ते को हटाने का नहीं दिया निर्देश :सुप्रीम कोर्ट
आवारा कुत्तों के मामले पर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की पीठ में सुनवाई शुक्रवार के लिए स्थगित कर दी गई। इस बीच पीठ ने अपने पहले के निर्देशों को स्पष्ट करते हुए इस बात पर जोर दिया कि सड़कों से हर आवारा कुत्ते को हटाने का आदेश नहीं दिया गया था। नियमों के तहत उन्हें केवल संस्थागत इलाकों से हटाए जाने के निर्देश दिए गए थे।

कल भी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील देते हुए कहा था कि सभी कुत्तों को पकड़ना समाधान नहीं है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होती है। सिब्बल ने दलील देते हुए कहा कि सभी कुत्तों को शेल्टर में रखना संभव नहीं है। आर्थिक रूप से भी व्यवहार्य नहीं है। इसे वैज्ञानिक तरीके से करना होगा। समस्या यह है कि कानूनों का पालन नहीं किया जा रहा है।


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