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देशभर के अनाथालयों की स्थिति का जायजा लेगा सुप्रीम कोर्ट

Fri, 05 Jan 2018 01:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 05 Jan 2018 01:14 AM IST
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Supreme Court seeks response for all states on running situation of orphanages
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के अनाथालयों की स्थिति का जायजा लेने का निर्णय लेते हुए कहा है कि अगर अनाथालयों से बच्चे बेचे जाते हैं तो देश के लिए इससे बड़ा कोई दुर्भाग्य नहीं हो सकता। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बृहस्पतिवार को कहा कि अनाथालयों के प्रभारी अपनी मर्जी और सनक के हिसाब से बच्चों को किसी को नहीं दे सकते। ऐसा करना वाला व्यक्ति मानवाधिकार के उल्लंघन का दोषी माना जाएगा।

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पीठ ने कहा कि अगर अनाथालयों में ऐसा हो रहा है तो अनाथ बच्चों को लेकर विस्तृत अध्य्यन की दरकार है। यह जानने की जरूरत है कि अनाथालयों में गोद देने की क्या प्रक्रिया है। अनाथालयों में बच्चे किस स्थिति में रह रहे हैं? अनाथालयों की स्थिति क्या है? लिहाजा पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी करते हुए दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। इसके साथ ही पीठ ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा दाखिल विशेष अनुमति याचिका का दायरा बढ़ाते हुए इस पर विस्तृत परीक्षण करने के लिए कहा है।
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पीठ ने विलियम वर्ड्सवर्थ के कथन ‘चाइल्ड इज फादर ऑफ द मैन’ का जिक्र करते हुए कहा कि देश का भविष्य बच्चों के आचरण पर निर्भर करता है। इसमें राज्य की बहुत अहम भूमिका होती है। पीठ ने कहा कि बच्चों के अधिकारों का संरक्षण तो होना ही चाहिए। इसके साथ ही पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें जलपाईगुड़ी के एक अनाथालय में बच्चे की तस्करी के मामले में एनसीपीसीआर को संज्ञान लेने से मना किया गया था।
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एनसीपीसीआर की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि बच्चे की तस्करी किसी एक राज्य से जुड़ा मसला नहीं है। इसका प्रभाव पूरे देश पर पड़ता है। कभी-कभी तो बच्चों की तस्करी का संबंध दूसरे देशों से भी होता है। अगली सुनवाई 22 जनवरी को होगी।

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