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मीडिया कर्मियों की छंटनी और वेतन कटौती के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

Mon, 27 Apr 2020 04:16 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 27 Apr 2020 04:16 PM IST
सार

उच्चतम न्यायालय ने कोरोना वायरस महामारी के दौरान कुछ मीडिया संगठनों द्वारा पत्रकारों सहित कर्मचारियों के साथ ‘अमानवीय और गैरकानूनी’ व्यवहार किए जाने के आरोपों पर केंद्र से सोमवार को जवाब मांगा। पत्रकारों के संगठनों का आरोप है कि इन मीडिया संस्थानों ने कोविड-19 की वजह से लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों को नौकरी से हटाने, वेतन में कटौती करने और उन्हें बिना वेतन के छुट्टी पर जाने के नोटिस दिए हैं।

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Supreme Court seeks reply of Centre Government on PIL of journalists bodies on job loss, wage cuts in media
सुप्रीम कोर्ट

विस्तार

न्यायमूर्ति एनवी रमण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने पत्रकारों के तीन संगठनों की याचिका पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान केंद्र, इंडियन न्यूजपेपर्स सोसायटी, द न्यूज ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन को नोटिस जारी किए। पीठ ने इस मामले को दो सप्ताह बाद आगे सुनवाई के लिये सूचीबद्ध किया है।

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केंद्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि इस समय सरकार को कोई नोटिस जारी नहीं किया जाए। इस पर पीठ ने कहा, ‘ये मामले ऐसे हैं जिन पर सुनवाई की आवश्यकता है और इसमें कुछ गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं।’
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याचिकाकर्ता नेशनल एलांयस ऑफ जर्नलिस्ट्स, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स और बृहन्मुम्बई यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोन्साल्विस ने बहस की। उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना वायरस का हवाला देते हुए पत्रकारों सहित कर्मचारियों को नौकरी से हटाया जा रहा है और एकतरफा निर्णय लेकर उनके वेतन में कटौती की जा रही है तथा उन्हें अनिश्चित काल के लिये बगैर वेतन के छुट्टी पर भेजा जा रहा है।
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इस जनहित याचिका में न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि समाचार पत्रों का प्रकाशन करने या डिजिटल मीडिया सहित मीडिया के क्षेत्र में काम करने तथा पत्रकारों और गैर पत्रकारों को नौकरी पर रखने वाले सभी व्यक्तियों को अपने कर्मचारियों को मौखिक या लिखित में दी गई सभी नोटिस अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया जाए।

यह याचिका समाचार पत्रों और मीडिया जगत में कार्यरत कर्मचारियों और श्रमिकों के प्रति नियोक्ताओं के ‘अमानवीय और गैरकानूनी रवैये’ को लेकर दायर की गई है। याचिका में लॉकडाउन के दौरान कुछ मीडिया घरानों द्वारा अपने कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी भी दी गई है।


याचिका के अनुसार , ‘मीडिया जगत में अनेक अखबारों,पत्रिकाओं, ऑनलाइन मीडिया और मीडिया जगत में कार्यरत दूसरे नियोक्ताओं ने मार्च 2020 में देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद श्रम एवं रोजगार विभाग के स्पष्ट परामर्श के बावजूद कर्मचारियों और श्रमिकों की छंटनी करने, वेतन में कटौती करने की दिशा में कदम उठाए हैं।’ याचिका में कहा गया है कि प्रधानमंत्री तक ने कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त नहीं करने या उनके वेतन में कटौती नहीं करने की अपील की है।

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