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SC: 'एसबीआई 21 मार्च तक दे चुनावी बॉन्ड से जुड़ी सारी जानकारियां', सुप्रीम कोर्ट का स्टेट बैंक को आदेश
Mon, 18 Mar 2024 11:06 AM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Mon, 18 Mar 2024 11:06 AM IST
सार
चुनावी बॉन्ड को लेकर एसबीआई से सभी विवरण का खुलासा करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि 21 मार्च शाम पांच बजे तक एसबीआई सारी जानकारी निर्वाचन आयोग को सौंपे।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को फिर फटकार लगाते हुए कहा कि वह चुनावी बॉन्ड के चुनिंदा आंकड़ों के बदले सारा डाटा 21 मार्च तक चुनाव आयोग को सौंपे। कोर्ट ने कहा, 15 फरवरी के आदेश के तहत चुनावी बॉन्ड जारीकर्ता बैंक को अल्फा न्यूमेरिक नंबरों सहित पूरे विवरण का खुलासा करना होगा। आदेश में बॉन्ड से जुड़ा सारा डाटा सार्वजनिक करने के निर्देश थे। बैंक को इस बारे में और आदेश का इंतजार नहीं करना चाहिए।
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की संविधान पीठ ने कहा कि एसबीआई को खरीद व रसीद के सभी विवरण पेश करने होंगे। सुनवाई के दौरान एसबीआई के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि बैंक को पूरा डाटा बताने में कोई परेशानी नहीं है। बैंक कोई जानकारी छिपाकर नहीं रख रहा। इस पर पीठ ने कहा, फैसले के पूरी तरह अनुपालन और भविष्य में किसी तरह के विवाद को टालने के लिए बैंक के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक कोर्ट के सामने बृहस्पतिवार शाम पांच बजे तक हलफनामा दायर करें कि बैंक ने पूरे डाटा का खुलासा कर दिया है और कोई भी जानकारी बची नहीं है।
12 अप्रैल, 2019 से पहले के विवरण का खुलासा नहीं
शीर्ष कोर्ट ने 2018 में चुनावी बॉन्ड योजना के लॉन्च के बाद से 12 अप्रैल, 2019 के बीच जारी किए गए सभी बॉन्डों का खुलासा करने की मांग से जुड़ी याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस योजना को लेकर 13 अप्रैल, 2019 को अंतरिम आदेश पारित किया था। पीठ ने कहा, हमने सचेत निर्णय लिया था कि कट-ऑफ तारीख अंतरिम आदेश की तारीख होनी चाहिए।
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उद्योग संगठनों की याचिका नहीं सुनी
पीठ ने एसोचैम, सीआईआई जैसे उद्योग संगठनों की गैर सूचीबद्ध याचिका पर भी विचार से इन्कार कर दिया। इन संगठनों की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी चुनावी बॉन्ड के खुलासे के खिलाफ अपनी बात रखना चाहते थे और मामले में त्वरित सुनवाई की अपील की थी।
सोशल मीडिया पर कहा-हमारे कंधे बहुत चौड़े
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने फैसले के बाद सोशल मीडिया पर सूचनाओं को तोड़-मोड़ कर पेश करने के बारे में पीठ का ध्यान आकृष्ट किया। कहा, कोर्ट में पेश लोग बाहर साक्षात्कार देने में जुटे हैं। पीठ ने कहा, सोशल मीडिया से निपटने के लिए हमारे कंधे काफी चौड़े हैं। हम कानून के शासन से शासित हैं। हमारा इरादा केवल बॉन्ड का खुलासा करना था और खुद को यहीं तक सीमित रखेंगे।
मामले पर कुछ निर्देशों पर विचार करने का अनुरोध- तुषार मेहता
इस बीच, केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अंतिम उद्देश्य काले धन पर अंकुश लगाना था और शीर्ष अदालत को पता होना चाहिए कि इस फैसले को अदालत के बाहर कैसे खेला जा रहा है। इस दौरान तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से इस संबंध में कुछ निर्देश जारी करने का विचार करने को कहा है। इस मामले में सोशल मीडिया पोस्ट की एक श्रृंखला शुरू हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश- प्रशांत भूषण
वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एसबीआई को फटकार लगाई। कोर्ट ने एसबीआई से पूछा कि आखिर चुनावी बॉन्ड से जुड़ी जानकारी में प्रत्येक बॉन्ड पर नंबर क्यों नहीं है। प्रशांत भूषण ने कहा कि अदालत ने एसबीआई से सख्त लहजे में कहा कि वह इसका खुलास करे। एसबीआई को 21 मार्च को शाम 5 बजे तक एक हलफनामा दाखिल करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि हम कानून के शासन और संविधान के अनुसार काम करते हैं। न्यायाधीशों के रूप में हमसे भी चर्चा की जाती है। हम केवल फैसले के अपने निर्देशों को लागू कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे निर्देश
दरअसल, भारतीय स्टेट बैंक ने 2018 में योजना की शुरुआत के बाद से 30 किस्तों में 16,518 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड जारी किए हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को 12 अप्रैल 2019 से खरीदे गए चुनावी बॉन्ड की जानकारी निर्वाचन आयोग को सौंपने का निर्देश दिया था। एसबीआई चुनावी बॉन्ड जारी करने के लिए अधिकृत वित्तीय संस्थान है।
एसबीआई ने सौंपा था डेटा
एसबीआई ने मंगलवार शाम को उन संस्थाओं का विवरण चुनाव आयोग को सौंपा था, जिन्होंने चुनावी बॉन्ड खरीदे थे और राजनीतिक दलों ने उन्हें भुनाया था। शीर्ष अदालत के आदेश के मुताबिक, निर्वाचन आयोग को 15 मार्च शाम पांच बजे तक बैंक द्वारा साझा की गई जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करनी थी।
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चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की संविधान पीठ ने कहा कि एसबीआई को खरीद व रसीद के सभी विवरण पेश करने होंगे। सुनवाई के दौरान एसबीआई के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि बैंक को पूरा डाटा बताने में कोई परेशानी नहीं है। बैंक कोई जानकारी छिपाकर नहीं रख रहा। इस पर पीठ ने कहा, फैसले के पूरी तरह अनुपालन और भविष्य में किसी तरह के विवाद को टालने के लिए बैंक के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक कोर्ट के सामने बृहस्पतिवार शाम पांच बजे तक हलफनामा दायर करें कि बैंक ने पूरे डाटा का खुलासा कर दिया है और कोई भी जानकारी बची नहीं है।
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12 अप्रैल, 2019 से पहले के विवरण का खुलासा नहीं
शीर्ष कोर्ट ने 2018 में चुनावी बॉन्ड योजना के लॉन्च के बाद से 12 अप्रैल, 2019 के बीच जारी किए गए सभी बॉन्डों का खुलासा करने की मांग से जुड़ी याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस योजना को लेकर 13 अप्रैल, 2019 को अंतरिम आदेश पारित किया था। पीठ ने कहा, हमने सचेत निर्णय लिया था कि कट-ऑफ तारीख अंतरिम आदेश की तारीख होनी चाहिए।
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उद्योग संगठनों की याचिका नहीं सुनी
पीठ ने एसोचैम, सीआईआई जैसे उद्योग संगठनों की गैर सूचीबद्ध याचिका पर भी विचार से इन्कार कर दिया। इन संगठनों की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी चुनावी बॉन्ड के खुलासे के खिलाफ अपनी बात रखना चाहते थे और मामले में त्वरित सुनवाई की अपील की थी।
सोशल मीडिया पर कहा-हमारे कंधे बहुत चौड़े
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने फैसले के बाद सोशल मीडिया पर सूचनाओं को तोड़-मोड़ कर पेश करने के बारे में पीठ का ध्यान आकृष्ट किया। कहा, कोर्ट में पेश लोग बाहर साक्षात्कार देने में जुटे हैं। पीठ ने कहा, सोशल मीडिया से निपटने के लिए हमारे कंधे काफी चौड़े हैं। हम कानून के शासन से शासित हैं। हमारा इरादा केवल बॉन्ड का खुलासा करना था और खुद को यहीं तक सीमित रखेंगे।
मामले पर कुछ निर्देशों पर विचार करने का अनुरोध- तुषार मेहता
इस बीच, केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अंतिम उद्देश्य काले धन पर अंकुश लगाना था और शीर्ष अदालत को पता होना चाहिए कि इस फैसले को अदालत के बाहर कैसे खेला जा रहा है। इस दौरान तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से इस संबंध में कुछ निर्देश जारी करने का विचार करने को कहा है। इस मामले में सोशल मीडिया पोस्ट की एक श्रृंखला शुरू हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश- प्रशांत भूषण
वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एसबीआई को फटकार लगाई। कोर्ट ने एसबीआई से पूछा कि आखिर चुनावी बॉन्ड से जुड़ी जानकारी में प्रत्येक बॉन्ड पर नंबर क्यों नहीं है। प्रशांत भूषण ने कहा कि अदालत ने एसबीआई से सख्त लहजे में कहा कि वह इसका खुलास करे। एसबीआई को 21 मार्च को शाम 5 बजे तक एक हलफनामा दाखिल करना होगा।
हम संविधान के मुताबिक काम करते हैं- चंद्रचूड़#WATCH | Delhi: Advocate Prashant Bhushan says, "Today, the Supreme Court heard its notice to SBI, asking them why they had not disclosed the alphanumeric number on each bond of the purchaser, as well as of the party which redeemed those bonds...The Court passed an order saying… pic.twitter.com/xRLJzwVF3G
— ANI (@ANI) March 18, 2024
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि हम कानून के शासन और संविधान के अनुसार काम करते हैं। न्यायाधीशों के रूप में हमसे भी चर्चा की जाती है। हम केवल फैसले के अपने निर्देशों को लागू कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे निर्देश
दरअसल, भारतीय स्टेट बैंक ने 2018 में योजना की शुरुआत के बाद से 30 किस्तों में 16,518 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड जारी किए हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को 12 अप्रैल 2019 से खरीदे गए चुनावी बॉन्ड की जानकारी निर्वाचन आयोग को सौंपने का निर्देश दिया था। एसबीआई चुनावी बॉन्ड जारी करने के लिए अधिकृत वित्तीय संस्थान है।
एसबीआई ने सौंपा था डेटा
एसबीआई ने मंगलवार शाम को उन संस्थाओं का विवरण चुनाव आयोग को सौंपा था, जिन्होंने चुनावी बॉन्ड खरीदे थे और राजनीतिक दलों ने उन्हें भुनाया था। शीर्ष अदालत के आदेश के मुताबिक, निर्वाचन आयोग को 15 मार्च शाम पांच बजे तक बैंक द्वारा साझा की गई जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करनी थी।