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Supreme Court: 'नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए राज्य बाध्य', शीर्ष कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

Tue, 25 Apr 2023 09:09 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 25 Apr 2023 09:09 PM IST
सार

न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार से सोनू मंसूरी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में अब तक की गई जांच पर एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। 
 

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Supreme Court says State must protect rights and liberties of citizens
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि संविधान के तहत अनिवार्य रूप से नागरिकों को दिए जाने वाले अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए राज्य को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। एक मामले में सुनवाई करते हुए मंगलवार को न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने यह टिप्पणी की। 

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पीठ लॉ इंटर्न सोनू मंसूरी से जुड़े मामले में सुनवाई कर रही थी। इस दौरान न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार से सोनू मंसूरी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में अब तक की गई जांच पर एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। 
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दरअसल, पठान फिल्म के दौरान हुए विवाद में मध्य प्रदेश पुलिस ने हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जब कोर्ट में उन्हें पेश किया जा रहा था तब लॉ इंटर्न सोनू  उन लोगों का वीडियो बनाते हुए पकड़ी गई थी। बाद में पूछताछ में सोनू ने बताया था कि वह यह सब काम वकील नूरजहां के कहने पर कर रही थी। यह जानकारियां नूरजहां दिल्ली में प्रतिबंधित संगठन पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) को देती थी। इस मामले में दाखिल एफआईआर में मंसूरी को नामजद आरोपी बनाया गया है। सोनू को 28 जनवरी को जेल भेज दिया गया था। बाद में जब उनका मामला शीर्ष कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने 22 मार्च को शीर्ष अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी। 
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राज्य पुलिस ने दावा किया था कि महिला के पीएफआई से संबंध थे और उसने प्रतिबंधित समूह के इशारे पर इंदौर में अदालती कार्यवाही की रिकार्डिंग की थी। पुलिस ने आरोप लगाया कि महिला ने जांचकर्ताओं को बताया कि एक वकील ने उसे वीडियो बनाकर पीएफआई को भेजने के लिए कहा और उसे इस काम के लिए 3 लाख रुपये दिए गए।

इस दौरान पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार का पक्ष रख रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा कि राज्य मशीनरी को नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। राज्य अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए बाध्य है।

सुनवाई की शुरुआत में मध्य प्रदेश सरकार का पक्ष रख रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि इस मामले की जांच चल रही है। राज्य अब तक की गई जांच पर जल्द ही स्थिति रिपोर्ट दाखिल करेगा। 


इस पर शीर्ष कोर्ट की पीठ ने कहा कि राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एक स्वतंत्र जांच हो। फिलहाल पीठ ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 11 मई को सूचीबद्ध किया है। साथ ही राज्य सरकार से महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। 

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