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Supreme Court: राज्य के अदालती मामलों को लेकर SC की अहम टिप्पणी, कहा- कोर्ट की सुनवाई में स्टेट 'एकल वादी'
Mon, 23 Sep 2024 03:08 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 23 Sep 2024 03:08 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, मिजोरम सरकार के वन विभाग और राजस्व विभाग के बीच कुछ आपसी विवाद हैं। हमने बार-बार दोहराया है कि अदालतों के लिए राज्य एक 'एकल वादी' है और राज्य को सभी संबंधित विभागों को शामिल करने के बाद एक एकीकृत रुख अपनाना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
सु्प्रीम कोर्ट ने सोमवार को मिजोरम के वन और राजस्व विभागों से जुड़े एक अंतर-विभागीय विवाद को लेकर अहम टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत की ओर से कहा गया है कि, राज्य को अदालती कार्यवाही में 'एकल वादी' के तौर पर काम करना चाहिए। सभी संबंधित विभागों को एकीकृत करके उनकी वकालत करनी चाहिए।
न्यायमूर्ति बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ की यह टिप्पणी मई 1965 की अधिसूचना से संबंधित मामले को लेकर है। जिसमें मिजोरम सरकार के वन और राजस्व विभागों के बीच आपसी विवाद चल रहा है। यह मामला मई 1965 की एक अधिसूचना से जुड़ा है। जिस पर दोनों विभागों एक दूसरे के खिलाफ कोर्ट में हैं। जिसे मूल रूप से जनवरी 2021 में गुवाहाटी हाई कोर्ट की आइजोल पीठ के एकल न्यायाधीश द्वारा अस्थिर घोषित किया गया था।
राजस्व विभाग और वन विभाग के बीच विवाद-
बता दें कि, मिजो जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा पारित आदेश में तुइरियल नदी और 15 अन्य नदियों के दोनों ओर आधे मील के भीतर स्थित वनों को परिषद द्वारा आरक्षित वन घोषित किया गया है। जो कानूनी तौर पर समावेशी नहीं है। राज्य ने हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष अपील की थी, लेकिन 9 नवंबर, 2022 को उसने अपील वापस लेने की छूट मांगी और आवश्यकता पड़ने पर नई अपील दायर करने की भी छूट मांगी।
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जिसके बाद शीर्ष अदालत ने मिजोरम राज्य और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) सहित विभिन्न पक्षों की दलीलों पर गौर किया कि एकल न्यायाधीश के फैसले से विभिन्न समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। कोर्ट का मानना है कि, यह उचित होगा कि उक्त रिट अपील को संबंधित मामलों के साथ मूल फाइल में बहाल किया जाए तथा उनके गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए।
'हाईकोर्ट 3 महीने में निर्णय करे'
सुप्रीम कोर्ट की इस बेंच में न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन भी शामिल थे। पीठ ने कहा कि यह सर्वोच्च न्यायालय के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग करने और अपील को हाईकोर्ट की खंडपीठ के पास वापस भेजने का उपयुक्त मामला है। पीठ ने अपील को बहाल करते हुए कहा कि, मामले के महत्व को ध्यान में रखते हुए, हम हाईकोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वह उक्त अपील पर यथाशीघ्र और किसी भी स्थिति में आज से तीन महीने की अवधि के भीतर निर्णय करे।
पीठ ने कहा कि उसने जुलाई में हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश के फैसले पर रोक लगा दी थी, जो आदेश अपील के निपटारे तक लागू रहेगा। पिछले सप्ताह पारित अपने आदेश में पीठ ने कहा, "ऐसा प्रतीत होता है कि मिजोरम सरकार के वन विभाग और राजस्व विभाग के बीच कुछ आपसी विवाद हैं। हमने बार-बार दोहराया है कि अदालतों के लिए राज्य एक 'एकल वादी' है और राज्य को सभी संबंधित विभागों को शामिल करने के बाद एक एकीकृत रुख अपनाना चाहिए।
'मामले को जल्दी सुलझाएं ताकि विकास कार्य ना रुकें'
शीर्ष अदालत ने कहा कि यह उचित होगा कि मिजोरम के मुख्य सचिव राजस्व और वन विभाग के सचिवों के साथ बैठक करें ताकि इस मुद्दे को सुलझाया जा सके। हम अनुरोध करते हैं कि इसे यथासंभव शीघ्रता से किया जाए ताकि क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण परियोजनाएं रुकी न रहें।
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न्यायमूर्ति बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ की यह टिप्पणी मई 1965 की अधिसूचना से संबंधित मामले को लेकर है। जिसमें मिजोरम सरकार के वन और राजस्व विभागों के बीच आपसी विवाद चल रहा है। यह मामला मई 1965 की एक अधिसूचना से जुड़ा है। जिस पर दोनों विभागों एक दूसरे के खिलाफ कोर्ट में हैं। जिसे मूल रूप से जनवरी 2021 में गुवाहाटी हाई कोर्ट की आइजोल पीठ के एकल न्यायाधीश द्वारा अस्थिर घोषित किया गया था।
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राजस्व विभाग और वन विभाग के बीच विवाद-
बता दें कि, मिजो जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा पारित आदेश में तुइरियल नदी और 15 अन्य नदियों के दोनों ओर आधे मील के भीतर स्थित वनों को परिषद द्वारा आरक्षित वन घोषित किया गया है। जो कानूनी तौर पर समावेशी नहीं है। राज्य ने हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष अपील की थी, लेकिन 9 नवंबर, 2022 को उसने अपील वापस लेने की छूट मांगी और आवश्यकता पड़ने पर नई अपील दायर करने की भी छूट मांगी।
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जिसके बाद शीर्ष अदालत ने मिजोरम राज्य और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) सहित विभिन्न पक्षों की दलीलों पर गौर किया कि एकल न्यायाधीश के फैसले से विभिन्न समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। कोर्ट का मानना है कि, यह उचित होगा कि उक्त रिट अपील को संबंधित मामलों के साथ मूल फाइल में बहाल किया जाए तथा उनके गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए।
'हाईकोर्ट 3 महीने में निर्णय करे'
सुप्रीम कोर्ट की इस बेंच में न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन भी शामिल थे। पीठ ने कहा कि यह सर्वोच्च न्यायालय के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग करने और अपील को हाईकोर्ट की खंडपीठ के पास वापस भेजने का उपयुक्त मामला है। पीठ ने अपील को बहाल करते हुए कहा कि, मामले के महत्व को ध्यान में रखते हुए, हम हाईकोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वह उक्त अपील पर यथाशीघ्र और किसी भी स्थिति में आज से तीन महीने की अवधि के भीतर निर्णय करे।
पीठ ने कहा कि उसने जुलाई में हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश के फैसले पर रोक लगा दी थी, जो आदेश अपील के निपटारे तक लागू रहेगा। पिछले सप्ताह पारित अपने आदेश में पीठ ने कहा, "ऐसा प्रतीत होता है कि मिजोरम सरकार के वन विभाग और राजस्व विभाग के बीच कुछ आपसी विवाद हैं। हमने बार-बार दोहराया है कि अदालतों के लिए राज्य एक 'एकल वादी' है और राज्य को सभी संबंधित विभागों को शामिल करने के बाद एक एकीकृत रुख अपनाना चाहिए।
'मामले को जल्दी सुलझाएं ताकि विकास कार्य ना रुकें'
शीर्ष अदालत ने कहा कि यह उचित होगा कि मिजोरम के मुख्य सचिव राजस्व और वन विभाग के सचिवों के साथ बैठक करें ताकि इस मुद्दे को सुलझाया जा सके। हम अनुरोध करते हैं कि इसे यथासंभव शीघ्रता से किया जाए ताकि क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण परियोजनाएं रुकी न रहें।