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Supreme Court: सलाहकार बोर्ड की पुष्टि के बाद तीन महीने से अधिक अवधि तक निवारक हिरासत संभव; कोर्ट का फैसला
Thu, 17 Aug 2023 08:40 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 17 Aug 2023 08:40 PM IST
सार
अदालत ने यह भी कहा है कि राज्य सरकार को सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट के बाद पुष्टिकरण आदेश पारित करने के बाद हर तीन महीने में हिरासत के अपने आदेशों की समीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने यह आदेश दिया।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष कोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति को तीन महीने की अवधि से अधिक निवारक हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। यदि सलाहकार बोर्ड पुष्टि करता है कि किसी व्यक्ति को तीन महीने से अधिक समय तक निवारक हिरासत में रखने के पर्याप्त कारण हैं। सिर्फ ऐसी स्थिति में यह लागू नहीं होगा।
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चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने अपने 75 पेज के फैसले में कहा कि राज्य सरकार को सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट के बाद पुष्टिकरण आदेश पारित करने पर हर तीन महीने में हिरासत के अपने आदेशों की समीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है। संविधान का अनुच्छेद 22(4) कुछ मामलों में गिरफ्तारी और हिरासत के खिलाफ सुरक्षा से संबंधित है। यह कहता है कि निवारक हिरासत का प्रावधान करने वाला कोई भी कानून किसी व्यक्ति को तीन महीने से अधिक समय तक हिरासत में रखने की अनुमति नहीं देगा, जब तक (ए) एक सलाहकार बोर्ड जिसमें ऐसे व्यक्ति शामिल हैं जो हाईकोर्ट के न्यायाधीश हैं या थे या नियुक्त होने के लिए योग्य हैं, ने तीन महीने की उक्त अवधि की समाप्ति से पहले रिपोर्ट दी है कि उनकी राय में इस तरह की हिरासत के लिए पर्याप्त कारण हैं। संविधान के अनुच्छेद 22(4)(ए) में निर्धारित तीन महीने की अवधि हिरासत की प्रारंभिक अवधि से लेकर सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट प्राप्त होने के चरण तक संबंधित है और हिरासत की अवधि पर कोई असर नहीं पड़ता है, जो सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट प्राप्त होने पर राज्य सरकार के पारित पुष्टिकरण आदेश के बाद भी जारी रहती है।
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सरकार को पुष्टिकरण आदेश के बाद समीक्षा करने की आवश्यकता नहीं
जस्टिस पारदीवाला ने फैसला लिखते हुए कहा कि राज्य सरकार के पारित पुष्टिकरण आदेश के अनुसार हिरासत की निरंतरता को जारी रखने के लिए हिरासत की अवधि निर्दिष्ट करने की भी आवश्यकता नहीं है और न ही यह केवल तीन महीने की अवधि तक सीमित है। यदि पुष्टिकरण आदेश में कोई अवधि निर्दिष्ट है तो हिरासत की अवधि उस अवधि तक होगी, यदि कोई अवधि निर्दिष्ट नहीं है तो यह हिरासत की तारीख से अधिकतम बारह महीने की अवधि के लिए होगी। हमारा विचार है कि राज्य सरकार को पुष्टिकरण आदेश पारित होने के बाद हर तीन महीने में हिरासत के आदेश की समीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है।
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आंध्र प्रदेश के नुकराजू की अपील पर फैसला
यह फैसला पेसाला नुकराजू की अपील पर आया है। नुकराजू को 25 अगस्त, 2022 को आंध्र प्रदेश बूटलेगर्स, डकैती, ड्रग अपराधियों, गुंडों, अनैतिक तस्करी अपराधियों और भूमि कब्जा करने वालों की खतरनाक गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1986 के तहत अवैध शराब की गतिविधियों में शामिल होने के लिए हिरासत में लिया गया था। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने काकीनाडा के जिला मजिस्ट्रेट से पारित हिरासत आदेश के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि एक बार सलाहकार बोर्ड ने हिरासत की पुष्टि कर दी तो उसे 12 महीने की अवधि के लिए निवारक हिरासत में रखा जा सकता है।