फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme court says, Meritorious student cannot be denied admission

मेधावी छात्र को दाखिला देने से नहीं किया जा सकता इनकार: सुप्रीम कोर्ट

Sun, 15 Dec 2019 02:50 AM IST
संजीव कुमार झा राजीव सिन्हा, अमर उजाला
राजीव सिन्हा, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 15 Dec 2019 02:50 AM IST
विज्ञापन
Supreme court says, Meritorious student cannot be denied admission
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी मेधावी और योग्य छात्र को बगैर उसकी गलती के दाखिला देने से इनकार किया जाता है तो कोर्ट उस छात्र को प्रवेश देने का आदेश दे सकता है। कोर्ट उस छात्र के लिए या तो सीटों की संख्या बढ़ा सकता है या मेरिट लिस्ट में सबसे नीचे वाले छात्र का दाखिला रद्द कर सकता है।

विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि मौजूदा सत्र की कट-ऑफ तारीख (30 सितंबर) खत्म होने की स्थिति में छात्र को अगले सत्र में प्रबंधन कोटे से दाखिल दिया जा सकता है। ऐसी स्थिति में छात्र को दाखिले के अलावा मुआवजा भी दिया जा सकता है।
विज्ञापन


दरअसल, जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने एमबीबीएस में प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट के ही दो विरोधाभासी फैसलों का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया। बेंच ने कहा, अगर किसी मेधावी छात्र को बिना उसकी गलती दाखिला देने से इनकार किया जाता है और वह समय पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाता है तो उसे उचित राहत न देना न्याय को नकाराने जैसा होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ ने 2014 के उस फैसले को दरकिनार कर दिया जिसमें कहा गया कि ऐसे छात्र को राहत के तौर पर सिर्फ मुआवजा दिया जा सकता है। पीठ ने कहा कि यह सही न्याय नहीं। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। किसी मेधावी छात्र के लिए मेडिकल कोर्स में दाखिला लेना उसकी जिंदगी का अहम मोड़ है।

ऐसे में बिना उसकी गलती के दाखिला नहीं देना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। मुआवजा अतिरिक्त उपाय जरूर हो सकता है लेकिन यह उचित उपाय नहीं हो सकता है।

इन सवालों का करना था निपटारा

पीठ को इस सवाल का निपटारा करना था कि अगर कोई मेधावी छात्र बिना देरी कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करता है तो कट ऑफ की तारीख निकलने के बाद क्या उसे दाखिला देने से इनकार किया जा सकता है और क्या ऐसे छात्रों के लिए महज मुआवजा ही एकमात्र विकल्प है?

पहले दो अलग-अलग दिए गए थे फैसले

2012 में कोर्ट ने कहा था कि कट ऑफ तारीख निकलने के बाद अपवाद के तौर पर छात्र को दाखिला देने का निर्देश दिया जा सकता है। वर्ष 2014 में कोर्ट ने कहा कि छात्र को महज मुआवजा दिया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed