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Supreme Court: ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़े मामले में सुनवाई 14 अप्रैल को; मुस्लिम पक्ष ने दायर की है याचिका

Thu, 06 Apr 2023 01:59 PM IST
देव कश्यप एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 06 Apr 2023 01:59 PM IST
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Supreme Court says it will hear the case relating to Varanasi Gyanvapi mosque on 14 April
Supreme Court - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह 14 अप्रैल को वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद से संबंधित मामले की सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट इस दिन मुस्लिम पक्ष को मस्जिद परिसर के अंदर वजू (धार्मिक कार्य के लिए मुंह-हाथ को धोना) की प्रथा की अनुमति देने के उनके अनुरोध के संबंध में एक आवेदन दायर करने की अनुमति दे सकता है।

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वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में रमजान के पवित्र महीने के दौरान नमाज अदा करने से पहले वजूखाना को सील किए जाने को लेकर अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष कोर्ट ने पिछले साल 11 नवंबर को उस क्षेत्र की सुरक्षा अगले आदेश तक बढ़ा दी थी जहां शिवलिंग पाए जाने का दावा किया गया था।
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वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी ने बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इसका जिक्र किया। इसके बाद सीजेआई 14 अप्रैल को मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमत हो गए। पीठ ने अहमदी से कहा, इस संबंध में एक आवेदन दाखिल करें और हम इस पर 14 अप्रैल को विचार करेंगे।
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यह भी पढ़ें: Gyanvapi Masjid case: अखिलेश-ओवैसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग वाली याचिका पर 14 अप्रैल को होगी सुनवाई

ज्ञानवापी मस्जिद का वुजू क्षेत्र हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विवाद का केंद्र है क्योंकि हिंदू पक्षकारों का दावा है कि उस स्थान पर एक शिवलिंग पाया गया है। विवाद तब उठा जब हिंदू भक्तों ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के अंदर पूजा करने के अधिकार का दावा करते हुए सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका कहना था कि यह एक हिंदू मंदिर था और अभी भी हिंदू देवताओं का घर है।


सिविल कोर्ट ने एक एडवोकेट कमिश्नर से मस्जिद के सर्वेक्षण का आदेश दिया था। इसके बाद एडवोकेट कमिश्नर ने वीडियोग्राफी सर्वे किया और सिविल कोर्ट को एक रिपोर्ट सौंपी। सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर हिंदू दलों ने दावा किया कि परिसर में खोजी गई वस्तु शिवलिंग है।

हालांकि मुस्लिम पक्षकारों ने इस पर विरोध करते हुए कहा कि यह केवल एक पानी का फव्वारा है। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष 17 मई को उस क्षेत्र को संरक्षित करने का आदेश दिया था।

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