सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: विकास जैसे खतरनाक अपराधी हो, जमानत देना खतरे से खाली नहीं
गैंगेस्टर विकास दुबे मामले की सुनवाई से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के एक अपराधी की जमानत याचिका खारिज कर दी। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता की वाली पीठ ने कहा, यूपी पहले से ही 64 आपराधिक मामलों वाले अपराधी को मिली जमानत को भोग रहा है। ऐसे अपराधियों को जमानत देना खतरे से खाली नहीं है, जिस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हों। उनका इशारा गैंगेस्टर विकास दुबे की ओर था।
सुप्रीम कोर्ट मेरठ के खरखौदा थाने के घोसीपुर गांव निवासी अपराधी उस्मान की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था। दो युवकों की हत्या तथा हत्या के प्रयास संबंधी एक मामले में जमानत के लिए वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। उस पर आठ मुकदमे दर्ज हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गत वर्ष 28 नवंबर को उसकी जमानत याचिका खारिज की थी। इसके खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
इन दिनों एनकाउंटर हो रहे हैं अच्छा है कि पुलिस साथ रहे
सुप्रीम कोर्ट में ही एक अन्य मामले में आरोपी की ओर से कहा गया कि वह छह महीने से जमानत पर है। जमानत की शर्त के तहत दो पुलिसकर्मी हमेशा उसके साथ हमेशा रहते हैं। उसका कहना था कि इसकी जरूरत नहीं है और खासकर कोरोना संक्रमण के देखते हुए यह अनावश्यक है। इस पर चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने हल्के अंदाज में कहा, इन दिनों एनकाउंटर हो रहे हैं। बेहतर है पुलिसकर्मी आपके साथ रहें। इसके साथ ही सीजेआई ने महाराष्ट्र के इस आरोपी को मिली अंतरिम जमानत फिर से बढ़ा दी।