{"_id":"68c9f776d33cbfd1f50c97f5","slug":"supreme-court-says-head-of-hindu-undivided-family-can-sell-property-to-meet-expenses-of-daughter-marriage-2025-09-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"SC: बेटी की शादी कानूनी आवश्यकता, शीर्ष अदालत ने हिंदू अविभाजित परिवार के कर्ता के संपत्ति बेचने को वैध ठहराया","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SC: बेटी की शादी कानूनी आवश्यकता, शीर्ष अदालत ने हिंदू अविभाजित परिवार के कर्ता के संपत्ति बेचने को वैध ठहराया
Wed, 17 Sep 2025 05:19 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
राजीव सिन्हा
राजीव सिन्हा
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Wed, 17 Sep 2025 05:19 AM IST
सार
जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 2007 में कर्नाटक हाईकोर्ट का वह फैसला रद्द कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट का आदेश पलटकर एचेयूएफ की संपत्ति बिक्री को अवैध बताया गया था। ट्रायल कोर्ट ने पहले खरीदार के पक्ष में निर्णय दिया था।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया है कि हिंदू अविभाजित परिवार (एययूएफ) का कर्ता (प्रमुख) बेटी की शादी के खर्च को पूरा करने के लिए पारिवारिक संपत्ति बेच सकता है। यह 'कानूनी आवश्यकता' की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने कहा कि भले ही शादी संपत्ति की बिक्री से पहले हो चुकी हो, लेकिन विवाह के लिए लिए गए कर्ज और खर्च का असर वर्षों तक बना रहता है। इसलिए बिक्री वैध मानी जाएगी।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: PM MODI: जनसेवक, प्रधान सेवक से कामदार तक...हर शब्द से हुए जनता के करीब; सत्ता को सेवा का अवसर बता बदली सियासत
विज्ञापन
जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 2007 में कर्नाटक हाईकोर्ट का वह फैसला रद्द कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट का आदेश पलटकर एचेयूएफ की संपत्ति बिक्री को अवैध बताया गया था। ट्रायल कोर्ट ने पहले खरीदार के पक्ष में निर्णय दिया था। मामला उस समय शुरू हुआ जब एचयूएफ के चार बेटों में से एक बेटे ने अपने पिता (कर्ता) की ओर से की गई बिक्री को चुनौती दी। पिता और उनकी पत्नी ने बयान दिया कि संपत्ति बेचने का मकसद बेटी काशीबाई की शादी के लिए उठाए गए खर्च को चुकाना था। इस बिक्री को 5वें प्रतिवादी यानी खरीदार ने भी ‘कानूनी आवश्यकता’ का हवाला देते हुए सही ठहराया।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: उपलब्धि: पराबैंगनी किरणों से बचाने वाली ओजोन परत में हो रहा सुधार, त्वचा कैंसर-मोतियाबिंद का खतरा होगा कम
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खरीदार ने सबूत पेश कर यह साबित कर दिया कि संपत्ति की बिक्री शादी के खर्च से जुड़ी थी। अदालत ने पाया कि रसीदों पर पिता के साथ उनकी पत्नी, बेटी और दो बेटों के हस्ताक्षर भी थे, जिससे यह साबित होता है कि परिवार की सहमति इस सौदे में शामिल थी।