भीड़ हिंसा पर हमारे दिशा-निर्देशों का पालन हो: सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकारों से लिचिंग या भीड़ द्वारा किसी भी हिंसा लेकर उसके द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि लोगों तक यह संदेश हर हालत में पहुंचना चाहिए कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों पर कानून का कोप बरसेगा।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को कहा कि लोगों को लिंचिंग या भीड़ हिंसा जैसी गतिविधियों की गंभीरता का पता होना चाहिए। साथ ही उन्हें इसकी वजह से कानून व्यवस्था की स्थिति पर पड़ने वाले प्रभाव का अहसास होना चाहिए।
पीठ ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को लोगों तक इस संदेश पहुंचाने के काम को प्राथमिकता देने के लिए कहा है जिससे कि लोगों को इस बात का एहसास हो कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों पर कानून का कोप बरसेगा।
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वास्तव में सुप्रीम कोर्ट ने लिंचिंग या भीड़ हिंसा को लेकर 'निवारक दिशा-निर्देश’ के तौर पर केंद्र और सभी राज्य सरकारों को रेडियो, टेलीविजन और अन्य मीडिया प्लेटफार्म के जरिए लोगों तक यह संदेश पहुंचाने केलिए कहा था कि इस तरह की गतिविधियों पर शामिल लोगों को कानून के तहत गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद व राज्य सरकारों को एक हफ्ते के भीतर इस दिशानिर्दश का पालन करने के लिए कहा है।
12 राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों ने अनुपालन रिपोर्ट नहीं की दाखिल
वहीं सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी गई कि गत 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों को लेकर अब 12 राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों ने अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं की है। इनमें दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, कर्नाटक आदि हैं।
इस पर पीठ ने कहा कि जिन राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों ने अब तक इस संबंध में हलफनामा दाखिल नहीं किया है वे एक हफ्ते में दाखिल कर दें। दिल्ली सहित कुछ अन्य राज्यों की ओर से कोई वकील पेश न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश की प्रति उनके मुख्य सचिव को भेजने के लिए कहा है।
साथ ही सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील संजय हेगडे़ ने पीठ को बताया कि लिंचिंग व भीड़ हिंसा के पीड़ितों के मुआवजे को लेकर कई राज्यों ने स्कीम नहीं बनाई है। पीठ ने इन राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों को एक हफ्ते में अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।